August 30, 2026 5:16 am

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590 करोड़ रुपये के सरकारी फंड घोटाले में बड़ा एक्शन: IDFC फर्स्ट बैंक की डीलिंग हेड प्रियंका और पूर्व कर्मी अनुज कौशल गिरफ्तार

फर्जी हस्ताक्षरों से सरकारी राशि ट्रांसफर कराने का आरोप, लाखों रुपये कमीशन लेने की जांच — एसीबी आज कोर्ट में रिमांड मांगेगी

चंडीगढ़/पंचकूला, 10 मार्च: हरियाणा सरकार से जुड़े करीब 590 करोड़ रुपये के बड़े वित्तीय घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सेक्टर-32 स्थित IDFC फर्स्ट बैंक की डीलिंग हेड प्रियंका और पूर्व डीलिंग हेड अनुज कौशल को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपियों से कई दिनों की पूछताछ के बाद सोमवार देर रात यह गिरफ्तारी की गई।
गिरफ्तार आरोपी प्रियंका रोपड़ की रहने वाली है, जबकि अनुज कौशल मोहाली के एरोसिटी का निवासी बताया जा रहा है। एसीबी ने दोनों को हिरासत में लेकर लंबी पूछताछ की और घोटाले में उनकी भूमिका सामने आने के बाद गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपियों को मंगलवार को पंचकूला की जिला अदालत में पेश कर एसीबी रिमांड की मांग की जाएगी, ताकि घोटाले से जुड़े अन्य पहलुओं का खुलासा किया जा सके।
फर्जी हस्ताक्षरों से सरकारी रकम ट्रांसफर कराने का आरोप
जांच में सामने आया है कि आरोपी फर्जी हस्ताक्षरों के आधार पर सरकारी खातों से धनराशि ट्रांसफर कराने में मदद करते थे। इसके बदले में वे लाखों रुपये का कमीशन लेते थे। एसीबी को शक है कि यह काम लंबे समय से संगठित तरीके से किया जा रहा था।
सूत्रों के अनुसार बैंक के अंदर हस्ताक्षरों की सत्यापन और मंजूरी की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होती है, लेकिन आरोप है कि इस प्रक्रिया में हेरफेर कर सरकारी फंड को दूसरे खातों में ट्रांसफर कराया गया।
IAS अधिकारी डीके बेहरा के फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल
जांच के दौरान एक चौंकाने वाला खुलासा यह भी हुआ है कि आईएएस अधिकारी डी.के. बेहरा के जाली हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर सरकारी राशि के ट्रांसफर की मंजूरी दिखाई गई। इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों रुपये का लेन-देन किया गया।

एसीबी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि
फर्जी हस्ताक्षर किसने तैयार किए
बैंकिंग सिस्टम में उन्हें कैसे स्वीकार किया गया
और किन-किन अधिकारियों या कर्मचारियों की इसमें भूमिका रही।
कई अधिकारियों और कर्मचारियों से लगातार पूछताछ
सूत्रों के अनुसार एसीबी पिछले तीन-चार दिनों से दो सरकारी विभागों और बैंक के कई अधिकारियों-कर्मचारियों से पूछताछ कर रही थी। उन्हें पूछताछ के बाद घर भेज दिया जाता था, लेकिन जांच पूरी होने तक बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई थी।
बताया जा रहा है कि दो संदिग्धों को फिलहाल जाने दिया गया है, लेकिन उनसे पूछताछ जारी रहेगी और जरूरत पड़ने पर फिर बुलाया जा सकता है।

विक्रम की तलाश में एसीबी की टीमें
इस घोटाले में एक अन्य संदिग्ध चंडीगढ़ निवासी विक्रम की तलाश भी तेज कर दी गई है। पहले से गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर एसीबी की तीन अलग-अलग टीमें विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर रही हैं।
सूत्रों का कहना है कि विक्रम की गिरफ्तारी के बाद मामले में कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी स्पष्ट हो सकती है।

मोबाइल फोन और लैपटॉप जब्त
एसीबी ने गिरफ्तार दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं, जबकि एक लैपटॉप भी बरामद किया गया है। डिजिटल डाटा की जांच से घोटाले में शामिल अन्य लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।

पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां
इस मामले में इससे पहले भी IDFC फर्स्ट बैंक की अधिकारी स्वाति धीमान और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के रीजनल हेड अरुण शर्मा को गिरफ्तार किया जा चुका है। अब जांच में प्रियंका और अनुज कौशल की इन आरोपियों से कड़ी भी सामने आई है।

जांच में बड़े खुलासों की संभावना
एसीबी अधिकारियों का कहना है कि यह मामला सरकारी फंड से जुड़े बड़े बैंकिंग घोटाले का रूप ले चुका है। जांच आगे बढ़ने के साथ-साथ और भी अधिकारियों, बैंक कर्मचारियों और बिचौलियों के नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

RAMESH GOYAT
Author: RAMESH GOYAT

With over 20 years of experience in Hindi journalism, Ramesh Goyat has served as District Bureau Chief in Kaithal and worked with the Haryana , Punjab , HP and UT Bureau in Chandigarh. Coming from a freedom fighter family, he is known for his fast, accurate, and credible reporting. Through Babugiri Hindi, he aims to deliver impartial and fact-based news to readers.

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