चंडीगढ़। हरियाणा में होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। संभावित क्रॉस वोटिंग के खतरे को देखते हुए कांग्रेस ने अपने विधायकों को सुरक्षित स्थान पर रखने की रणनीति अपनाई है। इसी के तहत हरियाणा कांग्रेस के विधायकों को हिमाचल प्रदेश के शिमला ले जाया जा रहा है, जहां उन्हें अगले तीन दिनों तक होटल में ठहराया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार शुक्रवार देर शाम विधायकों से भरी गाड़ियां पुलिस सुरक्षा के बीच सोलन से शिमला की ओर रवाना हुईं। बताया जा रहा है कि सभी विधायकों को शिमला के कुफरी स्थित एक होटल में ठहराया जाएगा, जहां उनकी सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। कांग्रेस नेतृत्व का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी के सभी विधायक एकजुट रहें और किसी तरह की क्रॉस वोटिंग न हो।
16 मार्च को होगा मतदान
हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होना है। भारतीय जनता पार्टी ने इस चुनाव के लिए अपने उम्मीदवार के रूप में Sanjay Bhatia को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस ने दलित नेता Karmveer Boudh को उम्मीदवार बनाया है।
इसके अलावा निर्दलीय उम्मीदवार Satish Nandal के चुनाव मैदान में उतरने से मुकाबला और रोचक हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निर्दलीय उम्मीदवार की मौजूदगी के कारण चुनावी समीकरण और जटिल हो सकते हैं।
जीत के लिए 31 वोट जरूरी
90 सदस्यीय Haryana Legislative Assembly में राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए कम से कम 31 वोटों की आवश्यकता होती है। वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के पास तीन निर्दलीय विधायकों समेत कुल 48 विधायकों का समर्थन बताया जा रहा है।
वहीं कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं। संख्या बल के आधार पर कांग्रेस अपने उम्मीदवार को जिता सकती है, लेकिन क्रॉस वोटिंग की आशंका को देखते हुए पार्टी सतर्क हो गई है।
पिछले चुनावों का अनुभव
कांग्रेस को पिछले राज्यसभा चुनावों में क्रॉस वोटिंग का नुकसान उठाना पड़ा था। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस बार पार्टी कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि भाजपा द्वारा रणनीतिक तरीके से चुनावी मैदान में उम्मीदवार उतारने के कारण कांग्रेस नेतृत्व में सतर्कता बढ़ गई है।
राजनीतिक सरगर्मियां तेज
कांग्रेस द्वारा अपने विधायकों को हिमाचल प्रदेश भेजने के बाद हरियाणा की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है। आगामी 16 मार्च तक राजनीतिक गलियारों में इस चुनाव को लेकर चर्चा जारी रहने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव के नतीजे केवल संसदीय प्रतिनिधित्व ही तय नहीं करेंगे, बल्कि हरियाणा की मौजूदा राजनीतिक ताकत का भी संकेत देंगे।











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