चंडीगढ़। मानवता और करुणा की मिसाल पेश करते हुए चंडीगढ़ स्थित Postgraduate Institute of Medical Education and Research (PGIMER) में 16 साहसी अंगदाता परिवारों को सम्मानित किया गया। इन परिवारों ने अपने निजी दुख के समय भी अंगदान की सहमति देकर एक ऐसा निर्णय लिया, जिससे 80 लोगों का जीवन प्रभावित हुआ। इनमें 52 गंभीर अंग विफलता से जूझ रहे मरीजों को नया जीवन मिला, जबकि 28 कॉर्निया अंधता से पीड़ित मरीजों की आंखों की रोशनी वापस आई।

यह सम्मान समारोह SAMARTHAN 2026 के उद्घाटन सत्र के दौरान आयोजित किया गया। यह अंगदान और प्रत्यारोपण पर आधारित CME-cum-Workshop थी, जिसका आयोजन Regional Organ and Tissue Transplant Organisation North (ROTTO North) द्वारा PGIMER में किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के चिकित्सा विशेषज्ञों और समाज के विभिन्न वर्गों से 200 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान पूरा सभागार खड़े होकर तालियों के साथ इन परिवारों के साहस और उदारता को नमन करता दिखाई दिया। उनके निस्वार्थ निर्णय ने निजी दुख को कई मरीजों के लिए जीवन के अनमोल उपहार में बदल दिया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि और PGIMER के निदेशक विवेक लाल ने अंगदाता परिवारों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में PGIMER की पहचान इन परिवारों के कारण ही संभव हो पाई है। उन्होंने कहा कि यदि इन परिवारों ने साहस और निस्वार्थ भाव से निर्णय न लिया होता तो यह उपलब्धियां संभव नहीं थीं। उन्होंने कहा, “जीवन के इस महान उपहार को मापने का कोई पैमाना नहीं हो सकता।” उन्होंने यह भी कहा कि इन परिवारों ने दूसरों का जीवन बचाने की भावना से PGIMER पर भरोसा किया और संस्थान उस भरोसे पर खरा उतरने का प्रयास कर रहा है।

इस मौके पर National Organ and Tissue Transplant Organization (NOTTO) के निदेशक अनिल कुमार ने कहा कि अंगों की उपलब्धता और जरूरत के बीच की खाई को पाटने का सबसे प्रभावी तरीका स्वैच्छिक मृतक अंगदान की संस्कृति को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि जब समाज अंगों की प्रतीक्षा कर रहे मरीजों की पीड़ा को समझेगा और अंगदान का संकल्प लेगा, तब अनेक जीवन बचाए जा सकेंगे।

वहीं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, चंडीगढ़ की वरिष्ठ क्षेत्रीय निदेशक अमरजीत कौर ने कहा कि समर्थन 2026 का उद्देश्य अंगदान के बारे में सही जानकारी फैलाना और इस जनआंदोलन को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि इन साहसी दाता परिवारों की उपस्थिति से बढ़कर कोई प्रेरणा नहीं हो सकती, क्योंकि उनके कठिन समय में लिए गए निर्णय हजारों मरीजों के लिए आशा की किरण बनते हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत में PGIMER के चिकित्सा अधीक्षक, अस्पताल प्रशासन विभाग के प्रमुख और ROTTO North के नोडल अधिकारी विपिन कौशल ने कार्यक्रम की पृष्ठभूमि बताते हुए कहा कि समर्थन 2026 का उद्देश्य अंगदान को बढ़ावा देना और उन संस्थागत प्रयासों को मजबूत करना है जो अंगदान और प्रत्यारोपण को संभव बनाते हैं।

समारोह में जिन परिवारों को सम्मानित किया गया उनमें सुखविंदर सिंह (सुनाम), जतिंदर सिंह (फतेहगढ़ साहिब), रविंदर सिंह (चंडीगढ़), हरप्रीत कौर (बस्सी पठाना), नवनीत ठाकुर (कांगड़ा), मेजर सिंह (राजपुरा, पटियाला), परवीन कुमार (पंचकूला), नरेश कुमार (कैथल) और रवीश कुंवर मलिक (जीरकपुर) के परिवार शामिल थे। इसके अलावा हरपिंदर सिंह (आनंदपुर साहिब), गुरनूर सिंह (लुधियाना) और दविंदर सिंह (रोपड़) के परिवारों को भी सम्मानित किया गया। साथ ही भारतीय सेना से जुड़े अरशदीप सिंह, बलविंदर सिंह, प्यार चंद और बिस्वनाथ साव के परिवारों को भी उनके प्रेरणादायक योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

उद्घाटन सत्र के बाद एक शैक्षणिक कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें विशेषज्ञों और चिकित्सकों ने अंग प्रत्यारोपण के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। सत्रों में मृतक अंगदान कार्यक्रमों को मजबूत बनाने, समन्वय व्यवस्था को बेहतर करने और जागरूकता बढ़ाने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ, जिससे प्रतिभागियों के बीच ज्ञान का सार्थक आदान-प्रदान हुआ।












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