April 6, 2026 1:06 am

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PANCHKULA: वसंत उत्सव 2026: यवनिका गार्डन में कला का संगम, कलाकार दे रहे मूर्तिशिल्प व पॉटरी की ट्रेनिंग

84 कला विद्यार्थी क्ले मॉडलिंग व पॉटरी शिविर में निखार रहे प्रतिभा
लुप्त होती मूर्तिशिल्प कला को संजीवनी दे रहे ऐसे शिविर
पंचकूला। “वसंत उत्सव 2026” के अवसर पर पंचकूला के सेक्टर-5 स्थित यवनिका गार्डन में कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग हरियाणा की ओर से तीन दिवसीय क्ले मॉडलिंग एवं पॉटरी का निःशुल्क प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया है। यह कार्यशाला विभाग के महानिदेशक के. मकरंद पांडुरंग के मार्गदर्शन में पहली बार आयोजित की गई है, जिसमें कला विद्यार्थियों और कला-प्रेमियों को मूर्तिशिल्प और पॉटरी की बारीकियां सिखाई जा रही हैं।
इस प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने के लिए कला के विद्यार्थी और आम कला-प्रेमी बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। प्रतिभागियों को प्रशिक्षण के दौरान आवश्यक संपूर्ण कला सामग्री विभाग की ओर से उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे वे क्ले मॉडलिंग और पॉटरी की तकनीकों को व्यावहारिक रूप से सीख सकें।
शिविर के कोऑर्डिनेटर कला अधिकारी (मूर्तिकला) हृदय हैं, जो प्रतिभागियों को मूर्तिशिल्प कला के सिद्धांत, तकनीक और सौंदर्यबोध के बारे में मार्गदर्शन दे रहे हैं। प्रशिक्षण को और प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न जिलों से अनुभवी कलाकारों को आमंत्रित किया गया है।


कैथल के चौशाला से आए मूर्तिशिल्प कलाकार बलजीत प्रतिभागियों को सीमेंट, पत्थर, लकड़ी और धातु जैसे विभिन्न माध्यमों में मूर्तिशिल्प की तकनीक सिखा रहे हैं। वहीं करनाल के कलाकार नंद किशोर आधुनिक मूर्तिशिल्प की नई अवधारणाओं और कलात्मक दृष्टिकोण से प्रतिभागियों को परिचित करा रहे हैं। झज्जर से आए कलाकार पुष्कर सिरेमिक और टेराकोटा के लघु आधुनिक मूर्तिशिल्प की बारीकियां समझा रहे हैं।
पॉटरी कला के प्रशिक्षण के लिए नूंह (मेवात) से पारंगत कलाकार कन्हैया को आमंत्रित किया गया है, जो प्रतिभागियों को पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों और कलात्मक पॉटरी बनाने की विधियां सिखा रहे हैं।
वर्तमान में 84 कला विद्यार्थी इस शिविर में भाग लेकर अपनी कला को निखारने और नई तकनीकों के साथ प्रयोग करने में जुटे हुए हैं। इसके अलावा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से आए कला-प्रेमी भी इस शिविर में भाग लेकर चिकनी मिट्टी से लोक मूर्तिशिल्प कला को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रहे हैं।
कला विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के शिविर लुप्त होती मूर्तिशिल्प कला के संरक्षण और विकास के लिए संजीवनी का काम करते हैं। इससे नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलता है और हरियाणा की समृद्ध कला परंपरा को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है।
शिविर के दौरान बनाए गए रेप्लिका और लघु मूर्तिशिल्प प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले कलाकारों को स्मृति-चिह्न के रूप में भी प्रदान किए जा रहे हैं, ताकि वे इस अनुभव को संजोकर रख सकें।
इस अवसर पर ज्योति, रविंद्र, मनोज, पम्मी सहित अन्य सहयोगियों की सक्रिय भागीदारी और सहयोग भी सराहनीय रहा। आयोजकों का कहना है कि भविष्य में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिससे राज्य के युवा कलाकारों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल सके।

Abhishek Goyat
Author: Abhishek Goyat

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