हरियाणा राज्यसभा चुनाव: दो सीटों पर तीन उम्मीदवार, कांग्रेस ने क्रॉस वोटिंग के डर से विधायकों को हिमाचल भेजा
चंडीगढ़। भारत निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार सोमवार 16 मार्च को देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए मतदान होगा। हरियाणा की दो सीटों पर मुकाबला इस बार काफी रोचक हो गया है, क्योंकि यहां दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के मैदान में आने से राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं और कांग्रेस खेमे में क्रॉस वोटिंग की आशंका को लेकर हलचल तेज हो गई है। इसी वजह से कांग्रेस अपने विधायकों को हिमाचल प्रदेश ले गई है।
सुबह 9 से शाम 4 बजे तक होगी वोटिंग
हरियाणा की दोनों राज्यसभा सीटों के लिए 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा, जबकि शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी।
भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व सांसद संजय भाटिया को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने कर्मवीर बौद्ध को मैदान में उतारा है। इसके अलावा भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल ने भी नामांकन दाखिल कर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है।
भाजपा ने चुनाव प्रक्रिया की निगरानी के लिए गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी को ऑब्जर्वर नियुक्त किया है। वहीं हिसार से निर्दलीय विधायक सावित्री जिंदल को भी पार्टी की ओर से अहम जिम्मेदारी दी गई है।
कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का डर
तीसरे उम्मीदवार के मैदान में आने के बाद कांग्रेस खेमे में क्रॉस वोटिंग की आशंका को लेकर चिंता बढ़ गई। हालांकि नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने पहले कहा था कि कांग्रेस का कोई विधायक कहीं नहीं जाएगा और यह केवल मीडिया की चर्चा है।
लेकिन इसके कुछ दिनों बाद कांग्रेस अपने विधायकों को 13 मार्च को हिमाचल प्रदेश ले गई ताकि उन्हें विपक्षी दलों के संपर्क से दूर रखा जा सके। बताया जा रहा है कि विधायकों को पहले शिमला के कुफरी और बाद में सोलन जिले के कसौली ले जाया गया।
कांग्रेस नेतृत्व भी इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। पार्टी ने विधायकों को एकजुट रहने के निर्देश दिए हैं और मतदान के दिन उन्हें चंडीगढ़ लाया जाएगा।
कौन हैं सतीश नांदल
भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल रोहतक जिले के बोहर गांव के रहने वाले हैं और शिवाल्या कंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक हैं। उन्होंने 1985 में सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी।
उन्होंने 2007 में इनेलो से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता तथा जिलाध्यक्ष भी रहे। 2014 में उन्होंने गढ़ी सांपला-किलोई सीट से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। बाद में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ले ली।
2019 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने हुड्डा के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सके। उनके नामांकन पत्र पर निर्दलीय विधायक सावित्री जिंदल, राजेश जून और देवेंद्र कादियान समेत 10 विधायकों के हस्ताक्षर हैं।
भाजपा उम्मीदवार संजय भाटिया का राजनीतिक सफर
भाजपा उम्मीदवार संजय भाटिया पानीपत के मॉडल टाउन के निवासी हैं। उन्होंने आईबी कॉलेज पानीपत से बीकॉम की पढ़ाई की और छात्र जीवन में ही एबीवीपी से जुड़ गए थे।
1987 में वे एबीवीपी के मंडल सचिव बने और 1989 में जिला महासचिव बनाए गए। बाद में वे भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश महासचिव बने और हरियाणा खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष भी रहे।
2019 के लोकसभा चुनाव में वे करनाल से सांसद चुने गए और कांग्रेस के कुलदीप शर्मा को बड़े अंतर से हराया। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में करनाल से उनका टिकट काटकर पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को उम्मीदवार बनाया गया था। अब भाजपा ने उन्हें राज्यसभा के लिए मैदान में उतारा है।
उनके नामांकन पत्र पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी समेत राज्य सरकार के सभी मंत्रियों और कुल 30 विधायकों ने प्रस्तावक के रूप में हस्ताक्षर किए हैं।
कांग्रेस उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध
कांग्रेस उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध अंबाला के निवासी हैं और अनुसूचित जाति समाज से आते हैं। वे हरियाणा सिविल सचिवालय में प्रशासनिक अधिकारी (एडीओ) के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं।
सेवानिवृत्ति के बाद वे कांग्रेस के कार्यक्रमों में सक्रिय रहे और ‘संविधान बचाओ अभियान’ से जुड़े रहे हैं। इसके अलावा वे आईपीएस वाई. पूरन कुमार से जुड़े आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं।
हरियाणा की दोनों राज्यसभा सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले ने सियासी माहौल को गर्मा दिया है और अब सभी की नजरें सोमवार को होने वाली वोटिंग और उसके नतीजों पर टिकी हुई हैं।











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