चंडीगढ़, 17 मार्च 2026: पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल चुनाव के मद्देनज़र चंडीगढ़ जिला बार एसोसिएशन ने 17 और 18 मार्च को जिला अदालत में ‘नो वर्क डे’ घोषित किया है। इस दौरान वकील नियमित कामकाज से दूर रहेंगे, ताकि वे चुनाव प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग ले सकें और अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।
बार एसोसिएशन के प्रधान अशोक चौहान, उपाध्यक्ष संदीप गुर्जर और सचिव अमीश शर्मा ने न्यायिक अधिकारियों से सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा कि चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अहम हिस्सा हैं, इसलिए वकीलों की भागीदारी सुनिश्चित करना जरूरी है।
जरूरी मामलों की सुनवाई जारी रहेगी
हालांकि ‘नो वर्क डे’ के बावजूद अदालत का काम पूरी तरह बंद नहीं रहेगा। आवश्यक और आपात मामलों की सुनवाई के लिए विशेष ड्यूटी लगाई गई है। वकीलों और क्लर्कों को अदालत की विभिन्न मंजिलों पर तैनात किया गया है, ताकि आम लोगों को किसी तरह की असुविधा न हो।
पहली मंजिल: दिनेश, अरुण भाटिया, क्लर्क काका राम और विजय शर्मा
दूसरी मंजिल: विवेक कुमार शर्मा, अभिषेक चौहान, क्लर्क अनिल कुमार, मनोज कुमार और जय प्रकाश
तीसरी मंजिल: मनजीत सिंह, विकास कुमार, विकास गुप्ता, क्लर्क सुरजीत सिंह, शिव थापर और दयाल कुमार
चौथी मंजिल: राजेश शर्मा, हिमांशु शर्मा, पूजा रानी, क्लर्क जगदीप सिंह, दीपक और रजिंदर
23 पदों पर 157 उम्मीदवार मैदान में
पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल के चुनावों में इस बार 23 पदों के लिए कुल 157 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। खास बात यह है कि पहली बार बार काउंसिल में सात महिला सदस्य चुनी जाएंगी, जिनमें से पांच सीटें आरक्षित हैं। इसी वजह से 53 महिला वकीलों ने भी चुनावी मैदान में उतरकर प्रतिनिधित्व की मजबूत दावेदारी पेश की है।
मतदान और मतगणना का कार्यक्रम
चंडीगढ़: 17 मार्च
पंजाब और हरियाणा: 18 मार्च
इन चुनावों में कुल 1,14,758 वकील मतदान करेंगे। मतगणना पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट परिसर में 20 मार्च से शुरू होगी और इसके एक महीने से अधिक समय तक चलने की संभावना है।
हरियाणा के वकीलों की निर्णायक भूमिका
इस बार चुनाव में हरियाणा का प्रभाव सबसे अधिक माना जा रहा है, क्योंकि यहां सबसे ज्यादा 59,345 वकील मतदाता हैं। इसके मुकाबले पंजाब में 37,873 और चंडीगढ़ में 17,540 मतदाता हैं। ऐसे में हरियाणा के वकीलों की भूमिका चुनाव परिणामों को निर्णायक रूप से प्रभावित कर सकती है।
बार एसोसिएशन का कहना है कि चुनाव और न्यायिक कार्य के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए यह व्यवस्था की गई है, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया भी प्रभावित न हो और जरूरी न्यायिक काम भी सुचारू रूप से चलते रहें।










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