चंडीगढ़: हरियाणा की राजनीति में राज्यसभा चुनाव के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के भीतर कथित क्रॉस वोटिंग को लेकर उठे विवाद ने अब तूल पकड़ लिया है। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा के एक बयान ने इस पूरे मामले को और ज्यादा गर्मा दिया है, जिससे पार्टी के अंदरूनी समीकरणों पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
दरअसल, मीडिया द्वारा जब कांग्रेस के पांच विधायकों—मोहम्मद इलियास, मोहम्मद इसराइल, शैली चौधरी, रेनू बाला और जनरल सिंह—के क्रॉस वोटिंग करने की चर्चाओं पर सवाल पूछा गया, तो हुड्डा ने सीधा जवाब देने से बचते हुए बड़ा संकेत दे दिया। उन्होंने कहा,
“मैं न तो इन नामों का खंडन करता हूं और ना यह कहता हूं कि उन्होंने क्रॉस वोटिंग नहीं की… आने वाले 2-3 दिन में सब साफ हो जाएगा।”
हुड्डा के इस बयान को राजनीतिक गलियारों में बेहद अहम माना जा रहा है। उनके शब्दों ने यह संकेत जरूर दिया है कि पार्टी के भीतर कुछ न कुछ असंतोष या अंदरूनी खींचतान मौजूद है। इससे कांग्रेस के संगठनात्मक अनुशासन और एकजुटता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
गुर्जर के इस्तीफे से बढ़ा विवाद
इस पूरे विवाद में नया मोड़ तब आया जब कांग्रेस नेता राम किशन गुर्जर ने पार्टी पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि विधायक शैली चौधरी ने कोई क्रॉस वोटिंग नहीं की है और उनका नाम जानबूझकर विवाद में घसीटा जा रहा है।
गुर्जर ने कहा,
“शैली चौधरी ने वोट क्रॉस नहीं किया… उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है… इसके विरोध में मैं पार्टी पद से इस्तीफा देता हूं।”
उनके इस कदम से कांग्रेस के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं और यह साफ हो गया है कि मामला केवल अफवाहों तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी के अंदर गुटबाजी भी सक्रिय है।
2-3 दिनों में खुल सकता है राज
अब पूरे घटनाक्रम पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। हुड्डा के बयान के मुताबिक आने वाले 2-3 दिनों में स्थिति साफ हो सकती है। यदि क्रॉस वोटिंग की पुष्टि होती है, तो कांग्रेस के लिए यह बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है।
फिलहाल, इस विवाद ने हरियाणा की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और आने वाले दिनों में इसके दूरगामी राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं।











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