2024 के मुकाबले 2025 में 17% कम हुए केस, ठगी के मामलों में 36% गिरावट; 3 नए साइबर थाने खोलने की घोषणा
चंडीगढ़: हरियाणा में साइबर अपराध पर लगाम कसने के लिए सरकार की सख्ती के सकारात्मक नतीजे सामने आने लगे हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि वर्ष 2024 की तुलना में 2025 में साइबर क्राइम के मामलों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।
उन्होंने हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2024 में जहां 6054 साइबर क्राइम के मामले दर्ज हुए थे, वहीं वर्ष 2025 में यह संख्या घटकर 5000 रह गई, जो करीब 17 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है। इसी तरह ठगी के मामलों में भी बड़ा सुधार देखने को मिला है। 2024 में 9804 मामलों के मुकाबले 2025 में यह घटकर 6324 रह गए, यानी लगभग 36 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने साइबर अपराध की गंभीरता को देखते हुए एक अलग साइबर क्राइम विभाग का गठन किया है। साथ ही अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जा रही है। वर्ष 2024 में 5156 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 8093 हो गई, जो करीब 57 प्रतिशत की वृद्धि है।
उन्होंने बताया कि साइबर ठगी के मामलों में पुलिस और बैंकों के बीच बेहतर तालमेल से ठगी गई रकम को समय रहते होल्ड किया जा रहा है। वर्ष 2024 में जहां 27 प्रतिशत राशि होल्ड की गई थी, वहीं 2025 में यह बढ़कर 40 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
जीरो एफआईआर और हेल्पलाइन से राहत
सरकार ने साइबर अपराध से पीड़ित लोगों को राहत देने के लिए जीरो एफआईआर की सुविधा लागू की है। अब कोई भी व्यक्ति 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करवा सकता है, जिसे तुरंत संबंधित थाने में भेजकर कार्रवाई शुरू कर दी जाती है।
तीन नए साइबर पुलिस स्टेशन खुलेंगे
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2026-27 के बजट में साइबर अपराध पर और प्रभावी नियंत्रण के लिए गोहाना, बहादुरगढ़ और सोनीपत में तीन नए साइबर पुलिस स्टेशन खोलने की घोषणा की गई है। इससे जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया और तेज होगी।
डिजिटल अरेस्ट रोकने के लिए ड्यूल ओटीपी पर विचार
नायब सिंह सैनी ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में खासतौर पर 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। इसे देखते हुए सरकार ड्यूल ओटीपी सिस्टम लागू करने पर विचार कर रही है। इस व्यवस्था में बैंक ट्रांजैक्शन के लिए ओटीपी बुजुर्ग के साथ-साथ उनके परिवार के सदस्य को भी भेजा जाएगा, जिससे धोखाधड़ी पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
सरकार का मानना है कि इन कदमों से आने वाले समय में साइबर अपराध पर और अधिक नियंत्रण पाया जा सकेगा।











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