April 6, 2026 8:34 am

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चंडीगढ़ में शराब ठेकों की नीलामी: 83 ठेके बिके, पलसौरा सबसे महंगा 16.71 करोड़ में बिका

बाबूगिरी ब्यूरो
चंडीगढ़, 19 मार्च 2026। शहर में वीरवार को आयोजित शराब ठेकों की वार्षिक नीलामी में इस बार भी भारी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। चंडीगढ़ प्रशासन के एक्साइज एंड टैक्सेशन विभाग द्वारा आयोजित इस नीलामी प्रक्रिया में कुल 97 ठेकों में से 83 ठेके ही बिक सके, जबकि बाकी बचे ठेकों के लिए जल्द दोबारा ऑक्शन कराया जाएगा।
नीलामी के दौरान कई प्रमुख इलाकों के ठेकों पर जमकर बोली लगी, जिससे प्रशासन को उम्मीद से अधिक राजस्व प्राप्त हुआ। सबसे महंगा ठेका पलसौरा क्षेत्र का रहा, जो 16.71 करोड़ रुपये में नीलाम हुआ। इस ठेके का रिजर्व प्राइस 11.41 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया था, यानी बोली में करीब 5 करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। उल्लेखनीय है कि पिछले साल यही ठेका 14 करोड़ रुपये में गया था, जिससे इस बार कीमत में उल्लेखनीय उछाल देखा गया।
दूसरे नंबर पर धनास क्षेत्र का ठेका रहा, जो 12.27 करोड़ रुपये में बिका। इसका रिजर्व प्राइस 9.62 करोड़ रुपये तय किया गया था। धनास का ठेका पिछले कई वर्षों तक शहर का सबसे महंगा ठेका रहा है। बीते वर्ष यह 11.27 करोड़ रुपये और 2024 में 9.17 करोड़ रुपये में नीलाम हुआ था, जिससे साफ है कि यहां लगातार कीमतों में बढ़ोतरी का ट्रेंड जारी है।
तीसरे स्थान पर सेक्टर-61 मार्केट का ठेका रहा, जो 11.52 करोड़ रुपये में नीलाम हुआ। हालांकि इसका रिजर्व प्राइस 8.21 करोड़ रुपये था, लेकिन पिछले वर्ष के मुकाबले इसमें थोड़ी गिरावट देखने को मिली, जब यह ठेका 12.25 करोड़ रुपये में गया था।
पूरी नीलामी प्रक्रिया से प्रशासन को लाइसेंस फीस के रूप में कुल 496.81 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जो निर्धारित रिजर्व प्राइस से लगभग 29 प्रतिशत अधिक है। इसे प्रशासन के लिए बड़ी वित्तीय सफलता माना जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, जिन 14 ठेकों की बोली नहीं लग पाई, उनके लिए जल्द ही दोबारा नीलामी आयोजित की जाएगी। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले चरण में ये ठेके भी बिक जाएंगे और राजस्व में और बढ़ोतरी होगी।
इस नीलामी से एक बार फिर यह स्पष्ट हो गया है कि चंडीगढ़ में शराब कारोबार बेहद लाभकारी बना हुआ है और प्राइम लोकेशन वाले ठेकों के लिए कारोबारियों में कड़ी प्रतिस्पर्धा बनी रहती है।

चंडीगढ़ में नई आबकारी नीति लागू, ई-टेंडरों ने राजस्व के रिकॉर्ड बनाए

यू.टी. चंडीगढ़ प्रशासन ने नीति वर्ष 2026-27 के लिए नई आबकारी नीति को मंजूरी दे दी है। इस नीति को पंजाब के राज्यपाल एवं यू.टी. चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया, मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद, और सचिव (आबकारी एवं कराधान) दीप्रवा लकड़ा, आईएएस की अध्यक्षता में विस्तृत विचार-विमर्श के बाद स्वीकृत किया गया।

नई नीति के तहत राज्य में शराब कारोबार को पारदर्शी बनाने, प्रौद्योगिकी का प्रयोग बढ़ाने और राज्य के राजस्व में वृद्धि करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। नीति के प्रारूप पर विभिन्न हितधारकों से सुझाव लिए गए, जिनमें बार मालिक, रिटेल विक्रेता, व्यापार संगठन और नागरिक समूह शामिल थे। इन सुझावों पर विस्तार से विचार-विमर्श करने के बाद आबकारी एवं कराधान विभाग ने अधिकांश सुझावों को स्वीकार किया।

नई आबकारी नीति की प्रमुख विशेषताएं

नई आबकारी नीति में कई अहम प्रावधान किए गए हैं, जिनका उद्देश्य राज्य में शराब कारोबार को व्यवस्थित करना और किसी भी प्रकार के एकाधिकार या कार्टेल को रोकना है। नीति की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

डिपार्टमेंटल स्टोर्स में शराब लाइसेंस की पुनः शुरुआत – अब राज्य के सरकारी स्टोर्स से भी शराब उपलब्ध होगी।

बार लाइसेंसधारकों को निकटवर्ती दो दुकानों से शराब खरीदने की अनुमति – इससे बार संचालन में सुविधा बढ़ेगी।

रिटेल वेंड्स के लिए सुरक्षा राशि में वृद्धि – इससे व्यापारियों की गंभीरता और वित्तीय क्षमता सुनिश्चित होगी।

शराब के परिवहन के लिए जीपीएस अनिवार्यता – यह कदम ट्रैकिंग और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है।

अधिकतम आवंटन सीमा – किसी भी व्यक्ति, इकाई, परिवार, कंपनी या फर्म को अधिकतम 10 लाइसेंसिंग इकाइयों तक ही आवंटन किया जाएगा, जिससे सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित होंगे।

ई-टेंडरिंग प्रक्रिया – अब सभी लाइसेंस ऑनलाइन बोली प्रक्रिया के माध्यम से आवंटित होंगे और मैनुअल बोली स्वीकार नहीं की जाएगी।

ई-टेंडरिंग में रिकॉर्ड प्रतिसाद

नई नीति के लागू होने के साथ ही 19 मार्च, 2026 को होटल माउंटव्यू, सेक्टर-10, चंडीगढ़ में आयोजित ई-टेंडरों के उद्घाटन में विभाग को बड़ी सफलता मिली। कुल 97 लाइसेंसिंग इकाइयों में से 84 इकाइयों के लिए 195 ई-टेंडर/बोलियां प्राप्त हुईं।

83 इकाइयों का आरक्षित मूल्य: ₹385.24 करोड़

प्राप्त कुल राजस्व: ₹496.81 करोड़ (आरक्षित मूल्य से लगभग 29% अधिक)

भागीदारी शुल्क: ₹3.90 करोड़

विशेष रूप से ग्राम पलसोरा वेंड के लिए आरक्षित मूल्य ₹11.41 करोड़, सर्वाधिक बोली ₹16.71 करोड़; धनास वेंड के लिए आरक्षित ₹9.62 करोड़, सर्वाधिक बोली ₹12.27 करोड़; और सेक्टर-61 वेंड के लिए आरक्षित ₹8.21 करोड़, सर्वाधिक बोली ₹11.52 करोड़ प्राप्त हुई।

शेष 14 लाइसेंसिंग इकाइयों के लिए निविदा प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। विभाग ने बताया कि बोलीदाताओं की उत्साही भागीदारी के कारण इन शेष वेंड्स का आवंटन भी सफलतापूर्वक किया जाएगा और राजस्व लक्ष्य से अधिक राशि प्राप्त होने की संभावना है।

अधिकारियों और प्रेक्षकों की उपस्थिति

ई-टेंडरों/वित्तीय बोलियों के उद्घाटन समारोह में आबकारी एवं कराधान आयुक्त निशांत कुमार यादव, आईएएस, उप मंडल दंडाधिकारी (केंद्रीय) नवीन डेनिक्स, कलेक्टर (आबकारी) प्रद्युमन सिंह, एचसीएस, और प्रदीप रावल, एईटीसी उपस्थित रहे। इसके अलावा, प्रशासन द्वारा नियुक्त प्रेक्षक पवितर सिंह, पीसीएस ने भी प्रक्रिया की निगरानी की।

नीति का महत्व और प्रभाव

नवीन आबकारी नीति राज्य में शराब कारोबार को पारदर्शी बनाने, प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और राजस्व संग्रह को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। नीति में टेक्नोलॉजी के व्यापक उपयोग से बोली प्रक्रिया तेज, सुरक्षित और निष्पक्ष बनी है।

सचिव (आबकारी एवं कराधान) दीप्रवा लकड़ा, आईएएस ने बताया कि इस अभूतपूर्व सफलता के बाद विभाग शेष वेंड्स के आवंटन और नीति में वर्णित अन्य प्रावधानों को लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

राज्य प्रशासन का यह कदम शराब कारोबार में पारदर्शिता, राजस्व वृद्धि और सभी हितधारकों को समान अवसर प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

 

BabuGiri Hindi
Author: BabuGiri Hindi

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