June 15, 2026 3:58 pm

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चंडीगढ़ नगर निगम में 116 करोड़ की एफडी घोटाले की आहट, एमओयू उल्लंघन के बावजूद बैंक को नहीं किया डी-इम्पैनल

तत्कालीन ज्वाइंट कमिश्नर ने भी बैंक को डी-इम्पैनल करने की थी सिफारिश

बाबूगिरी ब्यूरो
चंडीगढ़, 21 मार्च. चंडीगढ़ नगर निगम में वित्तीय अनियमितताओं का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें अधिकारियों की लापरवाही और प्रक्रियात्मक चूक के चलते करीब 116 करोड़ रुपये की एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) उसी बैंक में कर दी गई, जिसे पहले ही पैनल से हटाने (डी-इम्पैनल) के आदेश दिए जा चुके थे। यह पूरा मामला एमओयू (समझौता ज्ञापन) के उल्लंघन, फाइल दबाने और आंतरिक निगरानी में कमी को उजागर करता है।

एमओयू का उद्देश्य और शुरुआती चूक
नवंबर 2023 में तत्कालीन नगर निगम कमिश्नर अनिंदिता मित्रा के कार्यकाल में सेक्टर-32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के साथ एक एमओयू किया गया था।
इस समझौते के तहत बैंक को शहर के पानी और बिजली बिलों की डेटा स्क्रीनिंग कर एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट तैयार करनी थी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं रिहायशी कनेक्शनों का व्यावसायिक उपयोग तो नहीं हो रहा।
इसके बदले बैंक में नगर निगम का खाता खोलकर आगामी वित्तीय वर्ष का प्रॉपर्टी टैक्स जमा किया जाना था।
लेकिन बैंक ने तय समयसीमा में डेटा रिपोर्ट जमा नहीं की।

नोटिस के बावजूद नहीं मिला जवाब
तत्कालीन ज्वाइंट कमिश्नर शंभू राठी ने बैंक को लगातार तीन नोटिस जारी किए, लेकिन बैंक की ओर से कोई जवाब नहीं आया।
इसके बाद उन्होंने बाकायदा फाइल नोटिंग के जरिए बैंक को डी-इम्पैनल करने की सिफारिश भी की।

कमिश्नर के आदेश भी रहे बेअसर
फरवरी 2024 में कमिश्नर अनिंदिता मित्रा ने बैंक को पैनल से हटाने के आदेश जारी कर दिए।
इसके बावजूद:
प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच ने फाइल को दबा लिया
मामला आगे नहीं बढ़ाया गया
चीफ अकाउंट्स ऑफिसर (CAO) ने केवल खाता बंद करवाया, लेकिन बैंक को आधिकारिक रूप से डी-इम्पैनल नहीं किया

13 महीने बाद उसी बैंक में 116 करोड़ की एफडी
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि करीब 13 महीने बाद, अकाउंट्स विभाग ने इसी बैंक की सेक्टर-32 ब्रांच में स्मार्ट सिटी फंड के 116 करोड़ रुपये की एफडी खोल दी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते बैंक को पैनल से हटा दिया जाता, तो यह संभावित घोटाला टल सकता था।

एमओयू में बड़ी तकनीकी चूक
जांच में सामने आया कि:
बैंक ने एमओयू सीधे अपने नाम से नहीं, बल्कि थर्ड पार्टी के जरिए साइन करवाया
इसके बावजूद नगर निगम ने बिना जांच के समझौते को मंजूरी दे दी
इसी तकनीकी खामी के चलते बाद में बैंक को ब्लैकलिस्ट करने में कानूनी अड़चन आ गई

एफडी में गड़बड़ी और संदिग्ध भूमिका
एफडी में गड़बड़ी की जानकारी सामने आने के बाद:
निगम का एक आउटसोर्स कर्मचारी अनुभव मिश्रा अचानक गायब हो गया
तीन दिन बाद वह अपनी बहन के साथ सीएओ से मिलने पहुंचा
उसे कमिश्नर से मिलने को कहा गया, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी
इसके बाद से वह फिर लापता बताया जा रहा है
जांच में यह भी सवाल उठ रहे हैं कि:
एफडी किसने बनवाई?
फर्जी एफडी नंबर किसने वेरिफाई किए?
आउटसोर्स कर्मचारी को ओटीपी एक्सेस किसने दिया?

ईओडब्ल्यू में मामला दर्ज, लेकिन दिशा पर सवाल
नगर निगम ने इस मामले में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) में एफआईआर दर्ज करवाई है।
हालांकि, आरोप है कि मामले को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के टेकओवर में लापरवाही की ओर मोड़ने की कोशिश की जा रही है।
अब तक:
2 कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया
एक एसओ पर भी कार्रवाई की गई
लेकिन मुख्य जिम्मेदारी तय करने पर सवाल बने हुए हैं।

अन्य बैंक खातों की भी जांच शुरू
इस पूरे विवाद के बाद:
फाइनेंस सेक्रेटरी ने नगर निगम के 85 बैंक खातों की जांच के आदेश दिए हैं
विशेष रूप से पंजाब एंड सिंध बैंक के खातों की एंट्री भी जांच के दायरे में है
बताया जा रहा है कि वेतन भुगतान और पीएफ से जुड़ी एंट्रियों में भी गड़बड़ी की शिकायतें मिली हैं।

बड़ा सवाल: जिम्मेदार कौन?
यह मामला केवल एक बैंक या एक एफडी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नगर निगम की आंतरिक नियंत्रण प्रणाली, जवाबदेही और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अब देखना यह होगा कि जांच एजेंसियां इस मामले में असली जिम्मेदारों तक पहुंच पाती हैं या नहीं।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

बाबूगिरी हिंदी

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