April 5, 2026 10:11 pm

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CHANDIGARH: मार्च एंड में टेंडरों की बाढ़: सेक्टर-1 विधानसभा के पास आम के पौधों के टेंडर पर उठे सवाल

बाबूगिरी ब्यूरो

चंडीगढ़, 23 मार्च — वित्तीय वर्ष के अंतिम दिनों में प्रशासनिक विभागों द्वारा तेजी से टेंडर जारी करने की परंपरा एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ताजा मामला सेक्टर-1 स्थित विधानसभा के पास आम के पौधे लगाने के लिए जारी किए गए एक टेंडर का है, जिसमें लागत और समय-सीमा को लेकर कई गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
प्राप्त दस्तावेज़ों के अनुसार, यह टेंडर 21 मार्च को जारी किया गया है और 31 मार्च को खोला जाएगा। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे कार्य को पूरा करने के लिए मात्र एक महीने का समय निर्धारित किया गया है। टेंडर के तहत कुल 542 आम के पौधे लगाने का प्रस्ताव है, जिनकी ऊंचाई 6 से 8 फीट और पूरी तरह स्वस्थ होना अनिवार्य रखा गया है।
टेंडर में प्रत्येक पौधे की कीमत ₹650 तय की गई है, जो सामान्य बाजार दर के अनुरूप मानी जा सकती है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल ट्री गार्ड की कीमत को लेकर खड़ा हो रहा है। दस्तावेज़ों के अनुसार, हर पौधे के लिए ट्री गार्ड अनिवार्य किया गया है और एक ट्री गार्ड की कीमत ₹9,566.55 आंकी गई है। इस हिसाब से ट्री गार्ड पर होने वाला कुल खर्च पौधों की कीमत से कई गुना अधिक बैठता है।

लागत और प्रक्रिया पर सवाल
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का कहना है कि आमतौर पर एक ट्री गार्ड की कीमत इतनी अधिक नहीं होती, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि या तो लागत का आकलन असामान्य तरीके से किया गया है या फिर इसमें किसी तरह की जल्दबाजी दिखाई जा रही है।
इसके अलावा, केवल एक महीने में 542 बड़े और स्वस्थ पौधे लगाना, उनके लिए गड्ढे तैयार करना, ट्री गार्ड लगाना और अन्य संबंधित कार्यों को पूरा करना व्यवहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

क्या काम पहले से तय है?
टेंडर की शर्तों और समय-सीमा को देखते हुए यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह काम पहले से ही किसी ठेकेदार को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। क्योंकि इतने कम समय में इस स्तर का कार्य पूरा करना सामान्य प्रक्रिया में मुश्किल माना जाता है।

मौसम भी बना चुनौती
मार्च के अंतिम सप्ताह और अप्रैल की शुरुआत में बढ़ती गर्मी के बीच आम के पौधों का रोपण भी एक महत्वपूर्ण पहलू है। विशेषज्ञों का मानना है कि पौधारोपण के लिए सही मौसम और देखभाल जरूरी होती है, अन्यथा पौधों के जीवित रहने की संभावना कम हो जाती है।

मार्च एंड का ‘रश’
सूत्रों के अनुसार, इस समय इंजीनियरिंग विभाग के करीब 170 टेंडर एक साथ खुले हुए हैं। हर साल की तरह इस बार भी वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले बजट खर्च करने की होड़ साफ नजर आ रही है।

प्रशासन की चुप्पी
इस पूरे मामले पर अभी तक संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन टेंडर की शर्तों, लागत और समय-सीमा को लेकर उठ रहे सवालों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।

“मार्च एंड स्पेंडिंग रेस—क्या बजट खत्म करने की होड़ में हो रहा है जनधन का दुरुपयोग?” — आरके गर्ग

सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन ने इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा है कि जैसे ही वित्तीय वर्ष अपने अंतिम चरण में पहुँचता है, सरकारी विभागों में बजट खर्च करने की एक होड़ सी शुरू हो जाती है। यह स्थिति किसी प्रतियोगिता जैसी प्रतीत होती है—जहाँ अधिक खर्च दिखाने को ही “सफलता” माना जाता है।
इस होड़ का परिणाम कई बार ऐसे टेंडरों के रूप में सामने आता है, जिनकी उपयोगिता और प्राथमिकता पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। उदाहरण के तौर पर, सेक्टर-26 पुलिस लाइन के एमटी सेक्शन में वाहनों को धूप से बचाने के लिए लगभग ₹15 लाख का टेम्पररी शेड, जनरेटर के लिए ₹17 लाख का शेड, या हरियाणा विधानसभा में मात्र टेपेस्ट्री रिस्टोरेशन पर ₹30 लाख खर्च करने की योजना—ये सभी फैसले आम जनता के पैसे के उपयोग पर सवाल खड़े करते हैं।
जब देश का एक बड़ा वर्ग आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा हो, तब इस प्रकार के खर्च न केवल असंवेदनशील प्रतीत होते हैं, बल्कि वित्तीय अनुशासन पर भी प्रश्नचिह्न लगाते हैं।
ज़रूरत इस बात की है कि—
बजट खर्च करने की बजाय उसकी प्रभावशीलता और प्राथमिकता पर ध्यान दिया जाए।
वर्ष के अंतिम महीने में जल्दबाजी में लिए गए निर्णयों की स्वतंत्र समीक्षा हो।
हर खर्च को जनहित और पारदर्शिता के सिद्धांतों पर परखा जाए।
अन्यथा, यह “मार्च स्पेंडिंग रेस” केवल आंकड़ों का खेल बनकर रह जाएगी, जिसमें वास्तविक विकास और जनता की जरूरतें पीछे छूट जाएंगी।
अब देखना होगा कि 31 मार्च को टेंडर खुलने के बाद इस पर क्या निर्णय लिया जाता है और क्या प्रशासन इन सवालों का जवाब दे पाता है या नहीं।

Ramkumar Garg
Author: Ramkumar Garg

लेखक

virender chahal

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