बाबूगिरी ब्यूरो
चंडीगढ़: हरियाणा में सामने आया करीब 590 करोड़ रुपये का बैंक घोटाला अब प्रदेश के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में गिना जा रहा है। इस पूरे मामले में 18 सरकारी विभागों की धनराशि शामिल है, जिसे फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के नाम पर निजी बैंकों में निवेश किया गया, लेकिन बाद में उसमें भारी गड़बड़ी सामने आई।
राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए Central Bureau of Investigation (CBI) से जांच कराने के लिए केंद्र को सिफारिश भेज दी है।
घोटाले के बड़े आंकड़े (Key Figures)
कुल घोटाला राशि: करीब ₹590 करोड़
प्रभावित विभाग: 18 सरकारी विभाग
मुख्य बैंक: IDFC FIRST Bank
अन्य संदिग्ध बैंक:
AU Small Finance Bank
Kotak Mahindra Bank
ED छापेमारी: 19 ठिकानों पर
अब तक गिरफ्तारियां:
2 सरकारी वित्त अधिकारी
कई बैंक कर्मचारी
ज्वेलर्स और बिचौलिए
जांच एजेंसियां: ACB, ED, प्रस्तावित CBI जांच
कैसे खुला घोटाले का राज
सरकारी विभागों ने अपनी अतिरिक्त धनराशि को सुरक्षित रखने के लिए FD के रूप में जमा कराया था। लेकिन जब एक विभाग ने अपना खाता बंद कर राशि दूसरे बैंक में ट्रांसफर करनी चाही, तब खातों में वास्तविक बैलेंस और रिकॉर्ड में बड़ा अंतर सामने आया।
यहीं से करोड़ों के इस घोटाले का खुलासा हुआ।
घोटाले का तरीका (Modus Operandi)
जांच में सामने आया कि:
FD के नाम पर जमा राशि को अन्य खातों में डायवर्ट किया गया
कमीशन के लालच में
उच्च ब्याज वाली FD तोड़ी गईं
और कम ब्याज पर निजी बैंकों में निवेश किया गया
इससे सरकार को हर साल करोड़ों रुपये का राजस्व नुकसान हुआ
कई मामलों में बिना वित्त विभाग की मंजूरी के निजी बैंकों में खाते खोले गए
सूत्रों के अनुसार, हरियाणा पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन में भी इसी तरह के सैकड़ों संदिग्ध खाते खोले गए।
किन-किन की भूमिका संदिग्ध
कई आईएएस अधिकारी जांच के घेरे में
एक वरिष्ठ अधिकारी की बैंक अधिकारी पत्नी पर भी शक
बैंक कर्मचारियों, ज्वेलर्स और बिचौलियों की मिलीभगत के संकेत
जांच एजेंसियों की कार्रवाई
राज्य का एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) पहले से जांच कर रहा था
Enforcement Directorate (ED) ने 19 ठिकानों पर छापेमारी कर अहम दस्तावेज जुटाए
अब मामला CBI को सौंपे जाने की प्रक्रिया में है
सरकार का सख्त रुख
हरियाणा के मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini ने स्पष्ट कहा है कि:
“इस घोटाले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना ही बड़ा अधिकारी क्यों न हो।”
आगे क्या होगा
CBI जांच के बाद बड़े खुलासों की संभावना
और अधिक अधिकारियों व बैंकिंग नेटवर्क का पर्दाफाश
सरकार को हुए नुकसान की रिकवरी और जिम्मेदारी तय
590 करोड़ का यह घोटाला सिर्फ वित्तीय गड़बड़ी नहीं, बल्कि सरकारी सिस्टम, बैंकिंग चैन और बिचौलियों की संगठित साठगांठ का मामला बनता जा रहा है।
CBI जांच के बाद यह साफ होगा कि यह घोटाला कितनी गहराई तक फैला है और इसमें शामिल “बड़े चेहरे” कौन हैं।










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