एडवोकेट विजय बंसल ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप, हरियाणा पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन तक जांच का दायरा बढ़ाने की मांग
पंचकूला/कालका, 4 अप्रैल 2026। पंचकूला नगर निगम में सामने आए कथित 160 करोड़ रुपये के एफडी घोटाले ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। इस मामले में आरोपी अधिकारी विकास कौशिक की नियुक्ति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। शिवालिक विकास मंच के प्रदेश अध्यक्ष एवं हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व सचिव एडवोकेट विजय बंसल ने पूरे प्रकरण की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग उठाई है।
विजय बंसल ने आरोप लगाया कि विकास कौशिक, जो हरियाणा पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन में अकाउंट ऑफिसर के पद पर तैनात था, ने राजनीतिक प्रभाव के चलते नगर निगम पंचकूला में अतिरिक्त चार्ज लिया। उन्होंने आशंका जताई कि नगर निगम से भी बड़ा घोटाला हरियाणा पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन में हो सकता है, जिसकी भी पिछले पांच वर्षों के एफडी और बैंक खातों की सीबीआई से जांच होनी चाहिए।
नियुक्ति प्रक्रिया पर उठे सवाल
विजय बंसल ने सवाल उठाया कि गंभीर आरोपों का सामना कर रहे अधिकारी को कालका नगर परिषद में कार्यकारी अधिकारी के पद पर आखिर किसके प्रभाव से नियुक्त किया गया। उन्होंने कहा कि यह न केवल नियमों की अनदेखी है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
संपत्ति और बैंक खातों की जांच की मांग
बंसल ने मांग की कि घोटाले से जुड़े सभी कर्मचारियों और अधिकारियों की संपत्तियों व बैंक खातों की विस्तृत जांच की जाए, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके। उनका कहना है कि केवल आंतरिक जांच पर्याप्त नहीं है और सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र एजेंसी से जांच जरूरी है। मोरनी व मोहाली में बड़े बड़े फार्म हाउस, लग्जरी गाड़ियों की भी जांच हो।
सरकार पर लगाए संरक्षण के आरोप
एडवोकेट विजय बंसल ने भाजपा सरकार पर भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण देने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार मनमर्जी से अधिकारियों की नियुक्ति कर रही है, जिससे आम जनता का प्रशासन पर विश्वास कमजोर हो रहा है।
उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज
बंसल ने यह भी कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक ऐसे अधिकारियों को संवेदनशील पदों पर तैनात नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने नगर परिषद कालका में उक्त अधिकारी के कार्यकाल के दौरान किए गए कार्यों की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार
मामले में अब तक सरकार या प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस गंभीर विवाद पर क्या कदम उठाती है और क्या वाकई इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी या अन्य मामलों की तरह इसे भी दबा दिया जाएगा।










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