सर्वदलीय कमेटी बनी, 60 हजार परिवारों में दहशत
बाबूगिरी ब्यूरो
चंडीगढ़, 7 अप्रैल 2026। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) के मकानों पर चल रही डेमोलिशन ड्राइव को लेकर शहर में सियासी माहौल गर्म हो गया है। सेक्टर-41 में हुई बड़ी जनसभा के बाद अब इस मुद्दे पर सर्वदलीय कमेटी का गठन कर दिया गया है। कांग्रेस, भाजपा और आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए बनाई गई यह कमेटी प्रशासन के साथ बातचीत कर समाधान तलाशेगी।
सेक्टर-41 से शुरू हुई कार्रवाई, शहरभर में असर
डेमोलिशन ड्राइव की शुरुआत सेक्टर-41 से हुई, लेकिन अब इसका असर सेक्टर-29, 39, 45 और 47 तक पहुंच चुका है। करीब 60 हजार सीएचबी अलॉटियों में डर और असमंजस का माहौल बना हुआ है।
कहीं मकान सील किए जा रहे हैं तो कहीं अवैध निर्माणों को तोड़ा जा रहा है। बीते दिनों कई घरों पर कार्रवाई भी हो चुकी है।
नोटिसों पर उठे सवाल, लोगों में रोष
जनसभा में स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि हाउसिंग बोर्ड द्वारा नोटिस अचानक जारी किए गए और पर्याप्त समय भी नहीं दिया गया।
वार्ड-34 के पार्षद गुरप्रीत सिंह गाबी ने कहा कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के इस तरह की कार्रवाई मानवीय दृष्टिकोण के खिलाफ है।
ऑल पार्टी कमेटी की प्रमुख मांगें
बैठक में सर्वसम्मति से गठित कमेटी प्रशासन के सामने ये मांगें रखेगी:
नोटिसों की समीक्षा
डेमोलिशन ड्राइव पर रोक या राहत
वन टाइम सेटलमेंट (OTS) स्कीम लागू करना
मानवीय आधार पर समाधान
सेक्टर-45D में विरोध तेज, धरने की चेतावनी
सेक्टर-45D में भी मकान मालिकों ने बैठक कर इस कार्रवाई को जनविरोधी बताया। समाजसेवी शादाब राठी ने चेतावनी दी कि अगर कार्रवाई नहीं रुकी तो हाउसिंग बोर्ड कार्यालय के बाहर धरना दिया जाएगा।
चुनावी वादे बनाम हकीकत
चुनावों के दौरान तीनों प्रमुख दलों ने OTS लागू करने का वादा किया था, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक कोई ठोस नीति लागू नहीं हुई है।
राजनीतिक दावे:
कांग्रेस: संसद में कानून लाने का वादा
भाजपा: नीड-बेस्ड बदलाव नियमित करने का भरोसा
आम आदमी पार्टी: दिल्ली मॉडल लागू करने की बात
वर्तमान स्थिति (अप्रैल 2026):
केंद्र सरकार ने मार्च 2026 में स्पष्ट किया कि OTS या एम्नेस्टी स्कीम पर कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है
प्रशासन मास्टर प्लान-2031 और हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत कार्रवाई जारी रखे हुए है
प्रशासन का पक्ष: सुरक्षा सबसे अहम
प्रशासन का कहना है कि कई मकानों में किए गए अवैध बदलाव उनकी संरचनात्मक मजबूती को कमजोर कर रहे हैं, जो सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक है। इसलिए नियमों के तहत कार्रवाई जरूरी है।
पीड़ितों का दर्द: “घर भी गया, सामान भी”
सेक्टर-41A की बुजुर्ग महिला एकादशी ने बताया कि उन्होंने दो साल पहले मकान खरीदा था और कोई बदलाव नहीं किया था, इसके बावजूद उनका निर्माण तोड़ दिया गया।
उन्होंने कहा, “हमें भरोसा दिलाया गया था कि OTS आएगी, लेकिन अब हमारा घर भी टूट गया और गहने भी मलबे में दब गए।”
नेताओं के बयान
एचएस लक्की (कांग्रेस): “अलॉटियों को राहत देने के लिए OTS स्कीम लानी होगी।”
विजय पाल (आप): “किसी के सिर से छत नहीं हटने देंगे, भवनों की जांच कराई जाए।”
प्रो. निर्मल दत्त: “स्थायी समाधान के लिए वन टाइम सॉल्यूशन जरूरी है।”
आगे क्या?
अब सबकी नजर सर्वदलीय कमेटी और प्रशासन के बीच होने वाली बैठक पर टिकी है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह मुद्दा चंडीगढ़ में बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।














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