प्रोफेसर दंपति के गंभीर आरोप—माइंडवॉश, पहचान बदलने और यूनिवर्सिटी प्रोफेसरों की भूमिका पर उठे सवाल
पंचकूला, 7 अप्रैल। हरियाणा के सोनीपत स्थित Ashoka University की बीए छात्रा के लापता होने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस प्रकरण की गूंज पंचकूला तक पहुंच गई, जहां Haryana State Commission for Women ने सुनवाई के दौरान सख्त रुख अपनाया।
पीड़ित प्रोफेसर दंपति ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी अक्टूबर 2023 से लापता है और वे लगातार उसकी तलाश में भटक रहे हैं। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी बेटी का कथित तौर पर माइंडवॉश किया गया, उसका नाम तक बदल दिया गया और यहां तक कि उसे ट्रांसजेंडर बना देने का शक भी जताया गया है।
दंपति ने इस मामले में यूनिवर्सिटी की तीन महिला प्रोफेसरों पर भी संदेह जताया है। उनका आरोप है कि उनकी बेटी को इन्हीं प्रोफेसरों ने गायब कर रखा है। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि एक मैग्सेसे पुरस्कार विजेता की बेटी के अकाउंट में पैसे ट्रांसफर किए गए हैं, जिसकी जांच जरूरी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए महिला आयोग ने यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार को तलब किया। हालांकि, सुनवाई के दौरान रजिस्ट्रार सचिन शर्मा आयोग के कई सवालों का जवाब नहीं दे सके, जिससे आयोग की नाराजगी और बढ़ गई।
आयोग की चेयरपर्सन Renu Bhatia ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि यूनिवर्सिटी का यही रवैया रहा तो इस मामले की जांच Central Bureau of Investigation (CBI) या National Investigation Agency (NIA) से करवाने की सिफारिश की जा सकती है।
सुनवाई के दौरान एक चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया कि छात्रा को आयोग की ओर से कोई समन जारी नहीं किया गया, लेकिन उसकी ओर से एक वकील पेश हुआ। इस पर आयोग ने निर्देश दिया कि छात्रा स्वयं आयोग के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखे और इसके लिए शाम 5 बजे तक का समय दिया गया।
वहीं, यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार सचिन शर्मा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि छात्रा अपने घर से लापता हुई है और इस मामले में यूनिवर्सिटी का कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने यूनिवर्सिटी प्रबंधन पर लगाए गए सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया।
मामला अब संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुका है और सभी की नजरें आगामी कार्रवाई और जांच पर टिकी हैं।














Total Users : 350138
Total views : 577770