10 मई को मतदान, टिकट वितरण से पहले ही पार्टियों में खींचतान तेज; चंडीगढ़ कनेक्शन ने बढ़ाई हलचल
रमेश गोयत
चंडीगढ़/पंचकूला। हरियाणा में घोषित नगर निगम चुनावों के बीच पंचकूला की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। 10 मई को प्रस्तावित मतदान से पहले टिकट की दौड़ ने सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। सबसे बड़ा विवाद इस बार “स्थानीय बनाम बाहरी” नेताओं को लेकर खड़ा हो गया है, जिसने राजनीतिक दलों के लिए नई चुनौती पैदा कर दी है।
टिकट को लेकर बढ़ी सियासी खींचतान
चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद से ही पंचकूला में दावेदारों की लंबी कतार लग गई है। मेयर और पार्षद पदों के लिए कई नए चेहरे सामने आ रहे हैं। लेकिन इस बार खास बात यह है कि चंडीगढ़ से जुड़े कई नेता भी पंचकूला में सक्रिय हो गए हैं, जिससे स्थानीय नेताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि कई दावेदार अपने लिए मजबूत आधार दिखाने के लिए पंचकूला में निवास और सामाजिक कनेक्शन भी स्थापित कर रहे हैं।
‘मेहनत हमारी, टिकट बाहरी को’—स्थानीय नेताओं का दर्द
पंचकूला के जमीनी कार्यकर्ताओं और नेताओं का कहना है कि वे सालभर क्षेत्र में काम करते हैं, लेकिन चुनाव आते ही बाहरी चेहरे टिकट की दौड़ में आगे निकल जाते हैं। इससे संगठन के भीतर असंतोष साफ दिखाई देने लगा है।
एक वरिष्ठ स्थानीय नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा,
“हम जनता के बीच रहकर काम करते हैं, लेकिन चुनाव आते ही पैराशूट उम्मीदवार आ जाते हैं। इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरता है।”
चंडीगढ़ कनेक्शन बना विवाद की जड़
इस बार विवाद की मुख्य वजह चंडीगढ़ से जुड़े नेताओं की बढ़ती सक्रियता बताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, कई नेता पंचकूला में राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं और मेयर से लेकर पार्षद टिकट तक के लिए लॉबिंग कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह ट्रेंड भविष्य में स्थानीय राजनीति के संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
पार्टियों के सामने संतुलन की चुनौती
भाजपा, कांग्रेस और अन्य दलों के लिए टिकट वितरण सबसे बड़ी परीक्षा बन गया है। यदि स्थानीय नेताओं की अनदेखी होती है, तो अंदरूनी बगावत की स्थिति बन सकती है, जिसका सीधा असर चुनाव परिणामों पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नगर निगम चुनावों में स्थानीय मुद्दे—जैसे सफाई, सड़क, पानी और सीवरेज—सबसे अहम होते हैं। ऐसे में स्थानीय चेहरों की अनदेखी करना राजनीतिक रूप से नुकसानदायक हो सकता है।
जनता की राय भी बंटी
पंचकूला के मतदाताओं की राय भी इस मुद्दे पर अलग-अलग है।
कुछ लोग अनुभवी और प्रभावशाली नेताओं को मौका देने के पक्ष में हैं, भले ही वे बाहरी हों।
वहीं बड़ी संख्या में मतदाता स्थानीय उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने की बात कर रहे हैं, जो क्षेत्र की समस्याओं को बेहतर समझते हैं।
आगे क्या?
जैसे-जैसे नामांकन की तारीख नजदीक आएगी, टिकट को लेकर खींचतान और तेज होने की संभावना है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि राजनीतिक दल “स्थानीय बनाम बाहरी” के मुद्दे को कैसे संभालते हैं।
फिलहाल इतना तय है कि पंचकूला नगर निगम चुनाव में इस बार मुकाबला सिर्फ पार्टियों के बीच नहीं, बल्कि टिकट के लिए नेताओं के बीच भी बेहद दिलचस्प और कांटे का होने वाला है।
10 मई 2026 को मतदान, 13 मई को मतगणना के बाद परिणाम
राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश के तीन प्रमुख नगर निगमों—पंचकूला, अंबाला और सोनीपत—के चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा कर दी है। जारी कार्यक्रम के अनुसार इन तीनों नगर निगमों में 10 मई 2026 को मतदान कराया जाएगा, जबकि 13 मई को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे।
चुनाव की घोषणा के साथ ही संबंधित क्षेत्रों में चुनाव आचार संहिता (मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट) तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। इसके लागू होते ही सरकारी योजनाओं की नई घोषणाओं, शिलान्यास कार्यक्रमों और अधिकारियों के तबादलों पर रोक लग गई है, ताकि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे।
नामांकन प्रक्रिया 21 से 25 अप्रैल तक
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी शेड्यूल के अनुसार, चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवार 21 अप्रैल से 25 अप्रैल 2026 तक नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। इसके बाद नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी और वैध उम्मीदवारों की सूची जारी होगी। नाम वापसी की तिथि पूरी होने के बाद चुनावी मैदान में अंतिम प्रत्याशियों की तस्वीर साफ हो जाएगी।










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