बाबूगिरी ब्यूरो
चंडीगढ़/पंचकूला: हरियाणा सरकार के हजारों कच्चे व अनुबंध आधार पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्ष 2014 में लागू की गई रेगुलराइजेशन पॉलिसी को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया अपना अहम फैसला सुनाने वाला है। इस फैसले का सीधा असर राज्य के विभिन्न विभागों में कार्यरत बड़ी संख्या में कर्मचारियों पर पड़ेगा।
दरअसल, हरियाणा सरकार ने 2014 में एक नीति के तहत लंबे समय से कार्यरत अस्थायी, दैनिक वेतनभोगी और अनुबंध कर्मचारियों को नियमित करने का प्रावधान किया था। इस पॉलिसी को लेकर समय-समय पर कानूनी विवाद सामने आते रहे और मामला अंततः सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
आज आने वाला फैसला यह तय करेगा कि राज्य सरकार की यह पॉलिसी संवैधानिक रूप से सही है या नहीं। यदि कोर्ट इस पॉलिसी को बरकरार रखता है तो हजारों कर्मचारियों को स्थायी नौकरी का लाभ मिल सकता है। वहीं, यदि फैसला इसके खिलाफ आता है तो कर्मचारियों की उम्मीदों को बड़ा झटका लग सकता है।
कर्मचारी संगठनों की ओर से भी इस फैसले पर पैनी नजर रखी जा रही है। कई संगठनों ने पहले ही साफ कर दिया है कि वे अदालत के निर्णय का सम्मान करेंगे, लेकिन कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए आगे की रणनीति भी तैयार रखी जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, राज्य के शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और अन्य विभागों में कार्यरत कर्मचारी इस फैसले से सबसे अधिक प्रभावित होंगे। लंबे समय से नियमितीकरण की मांग कर रहे कर्मचारियों को आज राहत मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल, पूरे हरियाणा में कर्मचारियों के बीच उत्सुकता और तनाव का माहौल बना हुआ है। सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई हैं, जो उनके भविष्य की दिशा तय करेगा।











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