April 25, 2026 8:50 pm

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PANCHKULA 145 करोड़ FD घोटाला: पंचकूला में ED की बड़ी कार्रवाई, बैंक-निगम गठजोड़ का खुलासा

बाबूगिरी ब्यूरो
नई दिल्ली/चंडीगढ़, 24 अप्रैल 2026: पंचकूला नगर निगम से जुड़े 145 करोड़ रुपये के कथित फिक्स्ड डिपॉज़िट (FD) घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच तेज करते हुए कई शहरों में एक साथ छापेमारी की है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से की जा रही है और मामले में बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।

कई शहरों में एक साथ रेड
ईडी की टीमों ने चंडीगढ़, पंचकूला के अलावा पंजाब के ज़ीरकपुर, डेराबस्सी और राजपुरा में करीब एक दर्जन ठिकानों पर छापेमारी की। यह पूरा मामला प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत दर्ज किया गया है, जिसकी शुरुआत मार्च 2026 में हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की FIR से हुई थी।

क्या है 145 करोड़ FD घोटाला?
जांच के अनुसार, पंचकूला नगर निगम की 145 करोड़ रुपये की FD कोटक महिंद्रा बैंक की सेक्टर-11 शाखा में जमा थी। आरोप है कि इस रकम को फर्जी दस्तावेजों के जरिए असली खातों से निकालकर “अनधिकृत” खातों में ट्रांसफर कर दिया गया।

किन-किन पर गिरी गाज
ईडी ने जिन लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की, उनमें शामिल हैं:
बैंक के पूर्व डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पुष्पेंद्र सिंह
पूर्व कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजर दिलीप कुमार राघव

नगर निगम के पूर्व सीनियर अकाउंट्स ऑफिसर विकास कौशिक
छापेमारी के दौरान एजेंसी को कई “आपत्तिजनक दस्तावेज़” और डिजिटल सबूत मिले हैं, जिन्हें जब्त कर जांच के लिए भेजा गया है।

फर्जी दस्तावेज और ईमेल से खेल
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने जाली ऑथराइजेशन लेटर के जरिए नगर निगम के नाम पर नए बैंक खाते खुलवाए।
लेन-देन को वैध दिखाने के लिए अनधिकृत ईमेल आईडी का इस्तेमाल कर ट्रांजैक्शन अप्रूवल लिया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया को छुपाया जा सके।

क्रिमिनल नेटवर्क’ का खुलासा
ईडी के मुताबिक, इस घोटाले में बैंक अधिकारियों, नगर निगम कर्मचारियों और निजी फाइनेंसरों के बीच गहरा गठजोड़ था।
जांच में सामने आया है कि:
निगम के फंड को पहले अनधिकृत खातों में ट्रांसफर किया गया
फिर रकम को कई फाइनेंसरों—रजत दह्रा, स्वाति तोमर, कपिल कुमार और विनोद कुमार—के जरिए घुमाया गया
बाद में यह पैसा मुख्य आरोपियों और उनके परिवार तक वापस पहुंचाया गया

रियल एस्टेट में निवेश के संकेत
ईडी को शक है कि घोटाले की रकम का कुछ हिस्सा रियल एस्टेट कंपनियों और निजी निवेश में लगाया गया, ताकि मनी ट्रेल छिपाई जा सके।

फर्जी FD रसीदों से किया गया भ्रम
आरोप है कि नगर निगम को 16 फर्जी FD रसीदें दी गईं, जिनमें 145.03 करोड़ रुपये के निवेश और 158.02 करोड़ रुपये की मैच्योरिटी वैल्यू दिखाई गई। इससे अधिकारियों को गुमराह किया गया।

आगे की कार्रवाई
ईडी अब जब्त दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच कर रही है और मनी ट्रेल को ट्रैक किया जा रहा है। इस मामले में और गिरफ्तारियां व संपत्ति अटैचमेंट की कार्रवाई संभव मानी जा रही है।
यह घोटाला सरकारी फंड की सुरक्षा और बैंकिंग सिस्टम की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है, जिस पर अब पूरे क्षेत्र की नजर बनी हुई है।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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