केंद्र सरकार ने पाँच प्रमुख कानूनों का विस्तार कर स्टाम्प ड्यूटी, किरायेदारी, फायर सेफ्टी, भूमि रिकॉर्ड और इमिग्रेशन नियमों में किया व्यापक बदलाव
नागरिकों को मिलेगा अधिक सुरक्षा और सुगम सेवाओं का लाभ
रमेश गोयत
चंडीगढ़, 7 मई। चंडीगढ़ यूटी शहर का विस्तार हो रहा है। चंडीगढ़ में अपने खुद का कोई भी कानून नही था, अब तक पंजाब सरकार के कानून के सहारे ही प्रशासन चल रहा है। केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ की केंद्र सरकार के कानून के तहत लाने के बाद अब यह खुद के नए कानून लागू किए है। जिसके तहत
चंडीगढ़ यूटी में बड़े कानूनी सुधार लागू होंगे। यह पारदर्शी प्रशासन की दिशा में अहम कदम है। एच राजेश प्रसाद मुख्य सचिव ने जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र सरकार ने पाँच प्रमुख कानूनों का विस्तार कर स्टाम्प ड्यूटी, किरायेदारी, फायर सेफ्टी, भूमि रिकॉर्ड और इमिग्रेशन नियमों में व्यापक बदलाव किया है। जिससे नागरिकों को अधिक सुरक्षा और सुगम सेवाओं का लाभ मिलेगा।

हरियाणा की तर्ज पर चंडीगढ़ यूटी में लागू होगा नया फायर सेफ्टी कानून
चंडीगढ़ जैसे विकसित एवं तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्र में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को अधिक आधुनिक, प्रभावी और नागरिक-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।
हरियाणा की तर्ज पर चंडीगढ़ यूटी में नया फायर सेफ्टी कानून लागू होगा। इसके तहत हरियाणा अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा अधिनियम, 2022 के प्रावधानों को उपयुक्त संशोधनों सहित संघराज्य क्षेत्र चंडीगढ़ में विस्तारित कर दिया गया है।
यह विस्तार पंजाब रिऑर्गेनाइजेशन एक्ट, 1966 की धारा 87 के अंतर्गत जारी अधिसूचना के माध्यम से किया गया है। यह निर्णय चंडीगढ़ में राज्य विधानमंडल न होने की स्थिति में उपयुक्त राज्य कानूनों के विस्तार की स्थापित प्रक्रिया के अनुरूप है।
वर्तमान में चंडीगढ़ में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था दिल्ली अग्नि निवारण एवं अग्नि सुरक्षा अधिनियम, 1986 (चंडीगढ़ तक विस्तारित) के तहत संचालित हो रही है। हालांकि, शहरी विस्तार, बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों और आधुनिक सुरक्षा मानकों की आवश्यकता को देखते हुए एक अधिक अद्यतन और व्यापक कानून की जरूरत महसूस की जा रही थी।
नया विस्तारित अधिनियम मॉडल फायर सर्विस बिल, 2019 के अनुरूप है और केंद्र सरकार की ईज ऑफ लिविंग तथा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पहलों को भी मजबूती प्रदान करता है। देश में अब तक 12 राज्य इस मॉडल कानून को अपना चुके हैं, जबकि 16 राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों में सुधार प्रक्रिया जारी है।

अधिनियम की प्रमुख विशेषताएं एवं लाभ
आधुनिक एवं समग्र कानूनी ढांचा: पुराने प्रावधानों के स्थान पर एक आधुनिक और व्यापक फायर सेफ्टी सिस्टम लागू होगा, जो शहरी जरूरतों के अनुरूप है।
फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र की बढ़ी वैधता: अब फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट की वैधता 5 वर्ष होगी, जिससे बार-बार नवीनीकरण की आवश्यकता कम होगी।
जोखिम आधारित सुरक्षा प्रणाली: भवन की ऊंचाई के बजाय उपयोग, क्षमता और जोखिम के आधार पर सुरक्षा मानक तय किए जाएंगे।
पेशेवर प्रमाणन व्यवस्था: लाइसेंस प्राप्त एजेंसियों के माध्यम से फायर सेफ्टी मूल्यांकन और प्रमाणन अधिक पेशेवर और पारदर्शी होगा।
सरल एवं तेज अनुमति प्रणाली: फायर अधिकारियों की स्पष्ट जिम्मेदारियों से अनुमोदन और प्रवर्तन प्रक्रिया अधिक तेज और पारदर्शी होगी।
दंड प्रणाली का सरलीकरण: आपराधिक प्रावधानों के स्थान पर प्रशासनिक दंड व्यवस्था लागू होगी, जिससे त्वरित कार्रवाई संभव होगी।
नियमित निरीक्षण एवं प्रमाणन: समय-समय पर निरीक्षण से सुरक्षा मानकों का निरंतर पालन सुनिश्चित होगा।
स्पष्ट जवाबदेही व्यवस्था: भवन मालिकों, अधिभोगियों, एजेंसियों और फायर अधिकारियों की जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से तय की गई हैं।
इस अधिनियम के लागू होने से चंडीगढ़ में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी तथा नागरिकों, व्यवसायों और संस्थानों के लिए एक सुरक्षित, पारदर्शी और सुगम नियामकीय वातावरण सुनिश्चित होगा।

चंडीगढ़ में इमिग्रेशन धोखाधड़ी पर लगेगी रोक
पंजाब मानव तस्करी रोकथाम अधिनियम, 2012 एवं संशोधन अधिनियम, 2014 का चंडीगढ़ में विस्तार
चंडीगढ़ में ट्रैवल एजेंटों के नियमन को मजबूत करने तथा मानव तस्करी एवं इमिग्रेशन संबंधी धोखाधड़ी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसके तहत पंजाब मानव तस्करी रोकथाम अधिनियम, 2012 तथा पंजाब मानव तस्करी रोकथाम (संशोधन) अधिनियम, 2014 के प्रावधानों को अब संघराज्य क्षेत्र चंडीगढ़ में भी लागू कर दिया गया है।
यह विस्तार Punjab Reorganisation एक्ट, 1966 की धारा 87 के तहत जारी अधिसूचना के माध्यम से किया गया है। यह निर्णय चंडीगढ़ में विधायिका न होने की स्थिति में राज्य कानूनों के विस्तार की स्थापित प्रक्रिया के अनुरूप है।
बढ़ती इमिग्रेशन गतिविधियों पर नियंत्रण की आवश्यकता
चंडीगढ़ में आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में छात्र एवं युवा विदेश में शिक्षा और रोजगार के लिए आते हैं। इसके चलते ट्रैवल एजेंटों और इमिग्रेशन कंसल्टेंसी की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है।
वर्तमान में इन गतिविधियों का नियमन भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 191(3) के तहत किया जा रहा था, जो इन चुनौतियों से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं माना गया।

नए कानून के प्रमुख लाभ
इस अधिनियम के विस्तार से एक मजबूत कानूनी ढांचा तैयार होगा, जो—
ट्रैवल एजेंटों के प्रभावी नियमन को सुनिश्चित करेगा
मानव तस्करी और धोखाधड़ी पर सख्त नियंत्रण लगाएगा
पंजाब राज्य के साथ नियामक एकरूपता स्थापित करेगा
नागरिकों को शोषण और फर्जीवाड़े से सुरक्षा प्रदान करेगा
अधिनियम के प्रमुख प्रावधान
1. ट्रैवल एजेंट की व्यापक परिभाषा
विदेश यात्रा से जुड़ी सभी सेवाएँ—वीजा परामर्श, टिकटिंग, प्रचार सेवाएँ एवं अनौपचारिक एजेंट—इस कानून के दायरे में आएंगी।
2. अनिवार्य लाइसेंस व्यवस्था
बिना लाइसेंस कोई भी ट्रैवल एजेंट कार्य नहीं कर सकेगा। लाइसेंस जारी करने से पहले पुलिस सत्यापन अनिवार्य होगा।
3. सख्त नियामक नियंत्रण
धोखाधड़ी, गलत जानकारी, आपराधिक दोषसिद्धि या नियम उल्लंघन की स्थिति में लाइसेंस निलंबन या रद्द किया जा सकेगा।
4. मजबूत प्रवर्तन व्यवस्था
अधिकारियों को तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी की शक्तियाँ प्रदान की गई हैं।
5. कठोर दंड प्रावधान
मानव तस्करी और अवैध गतिविधियों पर 3 से 7 वर्ष तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है।
6. अवैध संपत्ति की जब्ती
अवैध रूप से अर्जित चल और अचल संपत्तियों को जब्त करने का अधिकार न्यायालयों को दिया गया है।
7. अपीलीय व्यवस्था
प्रशासनिक आदेशों के विरुद्ध अपील का प्रावधान पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा।
8. पीड़ितों को मुआवजा
अदालतें दोषियों पर दंड के अतिरिक्त पीड़ितों को मुआवजा भी प्रदान कर सकेंगी।
इस निर्णय से चंडीगढ़ में इमिग्रेशन और ट्रैवल एजेंसी सेक्टर में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुरक्षा को मजबूती मिलेगी तथा नागरिकों को फर्जी एजेंटों और मानव तस्करी जैसे अपराधों से प्रभावी संरक्षण प्राप्त होगा।
चंडीगढ़ के आबादी देह क्षेत्रों में भूमि अभिलेख एवं स्वामित्व की स्पष्टता को सुदृढ़ करने हेतु पंजाब आबादी देह (अधिकार अभिलेख) अधिनियम, 2021 का विस्तार
चंडीगढ़ में आबादी देह क्षेत्रों में भूमि स्वामित्व की पारदर्शिता और स्पष्टता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने पंजाब आबादी देह (अधिकार अभिलेख) अधिनियम, 2021 के प्रावधानों को उपयुक्त अनुकूलनों सहित संघराज्य क्षेत्र चंडीगढ़ तक विस्तारित कर दिया है।
“आबादी देह” उन ग्रामीण बसावट क्षेत्रों को कहा जाता है जो पारंपरिक रूप से गांवों का हिस्सा रहे हैं, लेकिन अब तक भू-राजस्व अभिलेखों में औपचारिक रूप से दर्ज नहीं थे। इसी कारण इन क्षेत्रों में स्वामित्व संबंधी अस्पष्टता और भूमि विवादों की स्थिति बनी रहती थी।
यह विस्तार पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 87 के अंतर्गत जारी अधिसूचना के माध्यम से किया गया है। यह चंडीगढ़ जैसे विधायिका रहित संघराज्य क्षेत्र में राज्य विधियों के विस्तार की स्थापित प्रक्रिया के अनुरूप है।
वर्तमान में चंडीगढ़ में आबादी देह क्षेत्रों के लिए अधिकार अभिलेख तैयार करने हेतु कोई पृथक विधिक ढांचा उपलब्ध नहीं था। यह पहल भारत सरकार के NAKSHA कार्यक्रम के अनुरूप भी है, जिसके तहत चंडीगढ़ को भू-स्थानिक सर्वेक्षण हेतु पायलट क्षेत्र के रूप में चयनित किया गया है।
यह अधिनियम भूमि सर्वेक्षण, स्वामित्व की पहचान और अभिलेखन के लिए एक समग्र कानूनी ढांचा प्रदान करता है, जिससे भूमि विवादों में कमी, प्रशासनिक दक्षता में सुधार तथा नियोजित शहरी विकास को बढ़ावा मिलने की अपेक्षा है।

प्रमुख प्रावधान एवं लाभ
आधुनिक तकनीक आधारित सर्वेक्षण एवं सीमांकन
आबादी देह क्षेत्रों का वैज्ञानिक भू-स्थानिक तकनीकों के माध्यम से सटीक सर्वेक्षण और मानचित्रण किया जाएगा।
स्वामित्व अधिकारों की पहचान एवं अभिलेखन
प्रत्येक भू-खंड के वास्तविक स्वामित्व की पहचान कर उसे विधिक मान्यता प्रदान की जाएगी।
अधिकार अभिलेख का निर्माण
कानूनी रूप से मान्य एवं प्रमाणिक भूमि अभिलेख तैयार किए जाएंगे।
पारदर्शी आपत्ति एवं अपीलीय प्रक्रिया
दावों और विवादों के समाधान हेतु सुव्यवस्थित आपत्ति, अपील एवं पुनरीक्षण व्यवस्था लागू होगी।
सार्वजनिक एवं सामुदायिक भूमि की पहचान
सार्वजनिक और सामुदायिक भूमि की पहचान सुनिश्चित कर अतिक्रमण पर नियंत्रण होगा।
अंतिम रिकॉर्ड को राजस्व प्रणाली से जोड़ा जाएगा, जिससे भूमि प्रशासन अधिक प्रभावी बनेगा।
कोई अतिरिक्त वित्तीय या कानूनी भार नहीं
इस अधिनियम के विस्तार से कोई नया कर, अपराध या वित्तीय दायित्व लागू नहीं होगा तथा न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
यह पहल चंडीगढ़ में भूमि प्रबंधन प्रणाली को आधुनिक, पारदर्शी और विवाद रहित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
चंडीगढ़ में लागू होगा नया किरायेदारी कानून, किरायानामा होगा अनिवार्य, पुराने रेंट एक्ट की होगी छुट्टी
चंडीगढ़ में किराये के मकानों और दुकानों को लेकर बड़ा कानूनी बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने जीवन सुगमता और पारदर्शी किराया व्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से असम किरायेदारी अधिनियम, 2021 को चंडीगढ़ में लागू करने का फैसला लिया है। इसके लिए पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 87 के तहत अधिसूचना जारी की गई है।
इस नए कानून के लागू होने के बाद चंडीगढ़ में वर्तमान में लागू पूर्वी पंजाब शहरी किराया प्रतिबंध अधिनियम, 1949 की जगह आधुनिक किरायेदारी ढांचा लागू होगा। केंद्र सरकार के अनुसार पुराना कानून वर्तमान सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के हिसाब से अब अप्रासंगिक माना जा रहा था।
केंद्र सरकार ने बताया कि मॉडल किरायेदारी अधिनियम, 2021 को 2 जून 2021 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी। इसके बाद राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने-अपने यहां इसी तर्ज पर कानून लागू करने के लिए कहा गया था। असम किरायेदारी अधिनियम, 2021 इसी मॉडल कानून के अनुरूप बनाया गया है।
सरकार के मुताबिक नया कानून मकान मालिकों और किरायेदारों दोनों के हितों में संतुलन स्थापित करेगा। इसके तहत किरायानामा लिखित रूप में करना अनिवार्य होगा, जिससे किराया, अवधि, किराया बढ़ोतरी और अन्य शर्तें पहले से स्पष्ट रहेंगी और विवाद कम होंगे।

नए कानून में बेदखली और कब्जा वापसी के लिए भी स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया तय की गई है। इससे मनमानी कार्रवाई पर रोक लगेगी और दोनों पक्षों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी।
इसके अलावा अनौपचारिक किरायेदारी व्यवस्थाओं को कम करने पर जोर दिया गया है। सरकार का मानना है कि औपचारिक एग्रीमेंट और संस्थागत तंत्र से पारदर्शिता बढ़ेगी और किरायेदारी से जुड़े मामलों का समाधान तेजी से हो सकेगा।
केंद्र सरकार के अनुसार यह कानून शहर में उपलब्ध खाली मकानों और अन्य आवासीय परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देगा, जिससे विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में किराये के मकानों की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है।
चंडीगढ़ में संपत्ति मूल्यांकन और स्टाम्प शुल्क व्यवस्था होगी और मजबूत, केंद्र ने लागू किए पंजाब संशोधन कानून 2001 और 2003
चंडीगढ़ में संपत्ति खरीद-बिक्री से जुड़े स्टाम्प शुल्क और मूल्यांकन प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सख्त बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने भारतीय स्टाम्प (पंजाब संशोधन) अधिनियम, 2001 और भारतीय स्टाम्प (पंजाब संशोधन) अधिनियम, 2003 के प्रावधानों को अब केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में भी लागू कर दिया है।
यह निर्णय पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 87 के तहत जारी अधिसूचना के माध्यम से लिया गया है। चंडीगढ़ में अपनी विधानसभा नहीं होने के कारण यहां समय-समय पर उपयुक्त राज्य कानूनों को लागू करने की परंपरा रही है। इसी कड़ी में अब पंजाब के स्टाम्प कानूनों में किए गए संशोधनों को चंडीगढ़ तक विस्तारित किया गया है।

अब तक क्या थी समस्या
वर्तमान में भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 में पंजाब सरकार द्वारा किए गए संशोधन चंडीगढ़ में लागू नहीं थे। इसके चलते संपत्तियों के वास्तविक बाजार मूल्य निर्धारण, स्टाम्प शुल्क की गणना और अपील प्रक्रिया में स्पष्टता की कमी बनी रहती थी। अधिकारियों के अनुसार इसी कमी का फायदा उठाकर कई मामलों में संपत्तियों का कम मूल्य दिखाकर स्टाम्प शुल्क चोरी की संभावना बनी रहती थी।
संपत्ति के अवमूल्यन पर लगेगी रोक
नए संशोधनों के लागू होने के बाद प्रशासन को संपत्तियों के अवमूल्यन की जांच करने और वास्तविक बाजार मूल्य तय करने के अधिक अधिकार मिलेंगे। धारा 47-ए के तहत कलेक्टर को यह शक्ति दी गई है कि यदि किसी संपत्ति का मूल्य जानबूझकर कम दर्शाया गया है तो वह वास्तविक बाजार मूल्य निर्धारित कर कम जमा किए गए स्टाम्प शुल्क की वसूली कर सकेगा।
प्रशासन का मानना है कि इससे संपत्ति लेन-देन में निष्पक्षता आएगी और सरकारी राजस्व में भी वृद्धि होगी।
अपील व्यवस्था होगी स्पष्ट
संशोधनों में मूल्यांकन संबंधी आदेशों के खिलाफ अपील का स्पष्ट प्रावधान भी किया गया है। इससे नागरिकों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी और प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी। अधिकारियों के अनुसार यह कदम संपत्ति विवादों और मूल्यांकन से जुड़े मामलों में स्पष्टता लाने में मदद करेगा।
कब्जे वाले एग्रीमेंट पर भी लगेगा स्टाम्प शुल्क
नई व्यवस्था के तहत ऐसे विक्रय समझौते जिनमें संपत्ति का कब्जा भी दिया जाता है, उन्हें स्टाम्प शुल्क के लिए बिक्री विलेख के बराबर माना जाएगा। इससे केवल एग्रीमेंट के जरिए कब्जा देकर स्टाम्प शुल्क बचाने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी।
प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने पर जोर
संशोधनों के जरिए मूल्यांकन, वसूली और प्रवर्तन से जुड़े प्रावधानों को अधिक व्यवस्थित बनाया गया है। इससे प्रशासनिक प्रक्रिया तेज और प्रभावी होने की उम्मीद है। साथ ही स्टाम्प शुल्क चोरी रोकने और अनुपालन सुनिश्चित करने में भी सहायता मिलेगी।
अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी लागू
सरकारी जानकारी के अनुसार पंजाब, असम, गुजरात और कर्नाटक जैसे कई राज्यों ने पहले ही अपने स्टाम्प कानूनों में ऐसे संशोधन किए हैं। वहीं लक्षद्वीप में इस प्रकार की व्यवस्था लागू की जा चुकी है और अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में भी इसे लागू करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
पंजाब के साथ बनेगी कानूनी एकरूपता
केंद्र सरकार का कहना है कि इन संशोधनों के लागू होने से चंडीगढ़ और पड़ोसी राज्य पंजाब के बीच स्टाम्प शुल्क और संपत्ति मूल्यांकन संबंधी नियमों में एकरूपता आएगी। इससे संपत्ति लेन-देन से जुड़े मामलों में कानूनी स्पष्टता बढ़ेगी और पारदर्शी व्यवस्था स्थापित करने में मदद मिलेगी।













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