चंडीगढ़: केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में हरियाणा और पंजाब के बीच 60-40 अनुपात के तहत अधिकारियों की तैनाती की व्यवस्था एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। खासतौर पर एसएसपी (लॉ एंड ऑर्डर) की नियुक्ति को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। अब तक चली आ रही परंपरा के अनुसार चंडीगढ़ में एसएसपी (लॉ एंड ऑर्डर) की तैनाती पंजाब कैडर से डेपुटेशन पर की जाती रही है, जबकि एसपी ट्रैफिक एंड सिक्योरिटी जैसे अहम पदों पर हरियाणा कैडर के अधिकारियों की नियुक्ति होती रही है।
चंडीगढ़ यूटी में प्रशासनिक संतुलन बनाए रखने के लिए वर्षों से हरियाणा और पंजाब के बीच 60-40 अनुपात का फार्मूला लागू है। इसी व्यवस्था के तहत अधिकांश वरिष्ठ पदों पर दोनों राज्यों के अधिकारियों को बारी-बारी से जिम्मेदारी दी जाती रही है। हालांकि अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या भविष्य में भी यही परंपरा अनिवार्य रूप से जारी रहेगी या नहीं।
दरअसल, नियमों के अनुसार चंडीगढ़ के प्रशासक (गवर्नर) को यह अधिकार प्राप्त है कि वे चाहें तो यूटी कैडर के किसी आईपीएस अधिकारी को भी एसएसपी (लॉ एंड ऑर्डर) जैसे महत्वपूर्ण पद पर तैनात कर सकते हैं। माना जा रहा है कि इससे यूटी प्रशासन में वरिष्ठ अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल और समन्वय स्थापित हो सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम की जड़ में करीब तीन महीने पहले जारी किया गया चंडीगढ़ प्रशासन का एक अहम नोटिफिकेशन है। इस अधिसूचना में स्पष्ट किया गया था कि ग्रुप-ए श्रेणी के आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की तैनाती अब किसी विशेष पद से बंधी नहीं होगी। यानी कोई अधिकारी जिस पद के लिए डेपुटेशन पर चंडीगढ़ आएगा, यह जरूरी नहीं होगा कि उसे उसी पद पर ही तैनात किया जाए। इन सभी नियुक्तियों का अंतिम अधिकार प्रशासक गुलाब चंद कटारिया के पास होगा।
मौजूदा समय में चंडीगढ़ की एसएसपी (लॉ एंड ऑर्डर) कंवरदीप कौर का तीन साल का कार्यकाल आगामी मार्च में पूरा हो रहा है। आमतौर पर कार्यकाल समाप्त होने से पहले पंजाब कैडर से नए एसएसपी के लिए पैनल मंगवा लिया जाता है, लेकिन इस बार अब तक ऐसा नहीं किया गया है। यही वजह है कि प्रशासनिक गलियारों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक, यह चर्चा भी तेज है कि मौजूदा एसएसपी अपने कार्यकाल को आगे बढ़ाने के प्रयास कर रही हैं। वहीं दूसरी ओर, यूटी कैडर के किसी आईपीएस अधिकारी को एसएसपी (लॉ एंड ऑर्डर) बनाए जाने की संभावना पर भी गंभीरता से विचार हो रहा है। यदि ऐसा होता है, तो यह चंडीगढ़ पुलिस प्रशासन में एक बड़ा बदलाव माना जाएगा।
कुल मिलाकर, 60-40 अनुपात की परंपरा, गवर्नर को मिले नए अधिकार और मौजूदा एसएसपी का कार्यकाल समाप्त होने की समयसीमा—इन सभी कारणों से चंडीगढ़ में एसएसपी (लॉ एंड ऑर्डर) की अगली नियुक्ति को लेकर सियासी और प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं और तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में इस पर अंतिम फैसला क्या होता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।













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