October 13, 2026 9:30 pm

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ममता की छाँव में, मिलता जग का मान,

ममता की छाँव में, मिलता जग का मान,
माँ के चरणों में सदा, बसता है सम्मान॥

आँचल की उस ओट में, मिलता सारा प्यार,
दुख की हर इक धूप में, बने शीतल बहार।
संकट में संबल बने, देती हर उपकार—
ममता की छाँव में, मिलता जग का मान॥

नींदें अपनी त्यागकर, रखती हम पर ध्यान,
भूखी रहकर भी करे, बच्चों का कल्याण।
त्याग-तपस्या रूप में, है उसका वरदान—
ममता की छाँव में, मिलता जग का मान॥

जीवन की हर राह में, देती सच्चा ज्ञान,
अच्छे-बुरे की सीख से, करती हमें महान।
संस्कारों की नींव है, माँ का पावन दान—
ममता की छाँव में, मिलता जग का मान॥

ईश्वर का ही रूप है, माँ का सच्चा प्यार,
उसके बिन सूना लगे, जीवन का संसार।
सिर झुका कर कीजिए, उसका नित सम्मान—
ममता की छाँव में, मिलता जग का मान॥

-डॉ. प्रियंका सौरभ

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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