July 22, 2026 7:03 pm

July 22, 2026 7:03 pm

HARYANA NEWS: हरियाणा सचिवालय व अन्य विभागों में रिटायर्ड कर्मचारियों का दबदबा, दोबारा नियुक्ति पर उठे सवाल, युवाओं के हक पर बहस तेज

बाबूगिरी हिंदी न्यूज़

चंडीगढ़/हरियाणा, 24 मई: हरियाणा सचिवालय और विभिन्न सरकारी विभागों में रिटायर्ड कर्मचारियों की दोबारा नियुक्ति को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। सचिवालय से 58 व 60 साल की आयु पर रिटायरमेंट के बाद को भी अधिकारी व कर्मचारी अपने घर नही जा रहा है। रिटायरमेंट पर पहले ही सेटिंग कर दुबारा उसी दिन से रिअपाईटमेंट या एक्टेंसन लेकर उसी कुर्सी पर बैठ जाते है। जिससे बेरोजगार कॉरोज का नम्बर ही नही पड़ रहा है। सचिवालय में रिटायर्ड कर्मचारियों का ही दबदबा देखने को मिलता है। पूरा हरियाणा सचिवालय रिटायर्ड कर्मचारियों से भरा पड़ा है। अधिकतर मंत्रियों व आईएएस ऑफिसरों के पास जमे बैठे है। दुसरे रेगुलर कर्मचारियों कि बुराई करके अपनी नोकरी पड़ी रखते है। जो कर्मचारियों के बीच खाई का भी कार्य कर रहे है। रेगुलर कर्मचारियों को मजबूरन उनके नीचे नोक्ति करनी पड़ रही है। बकायदा इन रिटायर्ड कर्मचारियों को उनके प्राइवेट घरो से सरकारी गाड़ी सुबह शाम लेने व छोड़ने आती है। पिछले दिनों प्रधानमंत्री द्वारा की गई अपील का भी खुलम खुला पालन भी किया जा रहा है। यह मामला प्रदेश सचिवालय में जोरो से गूंज रहा है।

विपक्षी दलों और युवा संगठनों ने सरकार की इस नीति पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इससे बेरोजगार युवाओं के अवसर प्रभावित हो रहे हैं। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक यह मुद्दा गर्माता जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, कई विभागों में सेवानिवृत्ति के बाद भी कर्मचारियों और अधिकारियों को संविदा अथवा विशेष नियुक्ति के माध्यम से दोबारा जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं। आलोचकों का कहना है कि इससे नई भर्ती की प्रक्रिया धीमी पड़ती है और लंबे समय से नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं में निराशा बढ़ रही है।

राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ नेताओं ने आरोप लगाया कि सचिवालय और अन्य विभागों में बड़ी संख्या में रिटायर्ड कर्मचारी दोबारा नियुक्त हैं, जबकि प्रदेश में हजारों युवा रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार को युवाओं के लिए स्थायी रोजगार के अवसर बढ़ाने चाहिए, न कि रिटायर्ड कर्मचारियों पर निर्भर रहना चाहिए।
विरोध करने वालों का तर्क है कि 58 से 60 वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद भी कई अधिकारी दोबारा नियुक्त होकर वेतन, पेंशन और अन्य सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं। ऐसे में युवाओं को नौकरी मिलने की संभावनाएं कम हो जाती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई विभागों में वर्षों से नियमित भर्ती नहीं होने के कारण खाली पदों पर अस्थायी व्यवस्थाएं बनाई जा रही हैं। जानकारी अनुसार कई कर्मचारी 60 साल से भी ऊपर प्रतिनियुक्ति पर चल रहे है। यह सब सेटिंग्स में चल रहा है। पूरा दिन ऑफिसर ही जी हजूरी में निकलताव्हे, क्योंकि डर रहता है कही साहब नाराज होकर नोकरी से निकाल ना दे।

हालांकि, सरकारी सूत्रों का कहना है कि कुछ तकनीकी और प्रशासनिक पदों पर अनुभवी अधिकारियों की जरूरत को देखते हुए पुनर्नियुक्ति की जाती है। उनका तर्क है कि अनुभवी कर्मचारियों की सेवाएं प्रशासनिक कार्यों की निरंतरता बनाए रखने में सहायक होती हैं, खासकर उन विभागों में जहां विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है।
इस मुद्दे पर युवा संगठनों ने सरकार से मांग की है कि खाली पदों पर जल्द स्थायी भर्ती निकाली जाए और पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाई जाए। उनका कहना है कि यदि समय पर भर्ती प्रक्रिया पूरी हो, तो रिटायर्ड कर्मचारियों की दोबारा नियुक्ति की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी के बीच यह मुद्दा आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक विषय बन सकता है। विपक्ष इसे युवाओं के भविष्य से जोड़कर सरकार को घेरने की तैयारी में है, जबकि सरकार प्रशासनिक जरूरतों का हवाला देकर अपने फैसलों का बचाव कर रही है।
फिलहाल, सचिवालय में पुनर्नियुक्तियों को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है और युवाओं के बीच इस विषय पर नाराजगी खुलकर सामने आ रही है।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

बाबूगिरी हिंदी

virender chahal

Our Visitor

3 7 5 3 1 6
Total Users : 375316
Total views : 612160

शहर चुनें