June 5, 2026 4:26 am

June 5, 2026 4:26 am

आफ द रिकार्ड–यशवीर कादियान

सादगी में उसकी जो कशिश नजर आती है,
चांद की रोशनी उसके आगे फीकी पड़ जाती है
जिंदगी शानदार इत्तफाकों से भरी रहती है। इसी वीरवार शाम की शताब्दी ट्रेन से चंडीगढ-दिल्ली यात्रा में सीएम नायब सिंह सैनी इत्तफाक से हमारे हमसफर बन गए। चंडीगढ रेलवे टेसन पर सिक्योरिटी वालों की खूब ही फौज थी। हरियाणा सीआईडी प्रमुख सौरभ सिंह,एसपी अजित सिंह शेखावत समेत पुलिस विभाग का बड़ा अमला मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के इस ट्रेन यात्रा से विदा करवाने के लिए उपस्थित था। जैसा कि ऐसे मौके पर होता है कि मीडिया वाले सीएम सैनी के इस सफर को एक राष्ट्रीय ईवेंट बनाने के लिए अपने मिजाइलनुमा कैमरों के साथ पोजीशन संभाले हुए थे। ये एक तरह से दोनों पक्षों के लिए विन विन सिचुएशन होती है। पत्रकारों को काम मिल जाता है और सामने वाले की पब्लिसिटी हो जाती है। जैसे ही सैनी का काफिला रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक के पास प्रकट हुआ, त्यों ही टीवी चैनल्स के कैमरामैन और पत्रकार एक अदद बाइट करने के लिए मुस्तैद हो गए। इधर, सैनी ने इस मौके को हाथों हाथ लपका। किफायत, पर्यावरण और मोदी जी के संदेश को आत्मसात करते हुए ट्रेन यात्रा के फायदे बताए। गिनाए।

सैनी के आने से पहले ही उनका सुरक्षा दल की एक टुकड़ी रेलवे टेसन पर दाखिल हो चुकी थी। इन सबका लक्ष्य एक ही था कि मुख्यमंत्री को सुरक्षित रेल में बिठाया जाए। रेलवे प्लेटफार्म से ट्रेन में सवार होने की उनकी यात्रा में किसी किस्म की अड़चन न आए। इसलिए सुरक्षा कर्मी हालात पर काफी पैनी निगाह बनाए हुए थे। मुख्यमंत्री पहले बायां कदम उठाएंगे या दांया,उनको डिब्बे में कहां से कितना अंदर लाया जाएगा,कैसे लाया जाएगा, कब इसमें उनको पूरा समाया जाएगा, आदि सूक्ष्म सूक्ष्म से हालात पर वहां गंभीरता से मंथन हो रहा था। जैसा कि कहा भी जाता है कि एक राजा नहीं, बल्कि उसका प्रताप-आभा मंडल-ओरा राज करता है। राजा का प्रताप स्थापित करने के लिए ही ये अनंत काल से ये सारे दांव पेंच चले जा रहे हैं। प्लेटफार्म और उसके आसपास सुरक्षा कर्मियों की भीड़ खामोशी से चिल्ला रही थी कि बतौर सीएम नायब सैनी अब कितनी बड़ी तोप में परिवर्तित हो चुके हैं। सीएम सैनी जब शताब्दी ट्रेन में सवार हुए तो उन्होंने अपनी कातिल मुस्कान के साथ सवारियों का और सवारियों ने आदरपूर्वक एक दूसरे का स्वागत किया। सैनी ने शताब्दी ट्रेन में सवार सवारियों को राम राम की। अपनी सीट पर विराजे और बाहर उनके दर्शन को प्यासे खड़े इलैक्ट्रानिक मीडिया के पत्रकारों को हाथ हिलाकर पोज दिया। उनको निहाल किया। नरम स्वभाव के सैनी के साथ इस ट्रेन के सफर में उनके साथ फोटो खिंचवाने, सैल्फी लेने, हाथ मिलाने, हाल ए दिल सुनाने का लोगों में खासा क्रेज दिखा। यहां तक की दूसरे डिब्बे की सवारियों ने भी इस बहती गंगा में हाथ धोया। मुख्यमंत्री के निजी स्टाफ के विनोद धीमान, रविकांत सैनी और पीएसओ डीएसपी दीपक ने इस नेक काम में इन सवारियों का भरपूर सहयोग किया। वे मुख्यमंत्री के संग लोगों के फोटो खिंचवाने-मधुर मिलने के कार्यक्रम में ना खुद बाधा बने ना किसी को बनने दिया। बल्कि उन्होंने तो इस राह में अड़चनों को जरूर हटाया। रेल के सीटीआई से लेकर चर्तुथ श्रेणी के कर्मचारियों तक ने सैनी के संग फोटो खिंचवाए। हाथ मिलाए। इस डिब्बे में मौजूद पंजाब से ताल्लुक रखने वाली कुछ सवारियों ने मुख्यमंत्री को ये जानकारी पेश कि उनके यहां भी उनका जादू सिर चढ कर बोल रहा है। पंजाब के लोग भी उनको भरपूर पंसद कर रहे हैं। उन से मोहब्बत कर रहे हैं। कुछ उद्योगपति, कुछ अधिकारी और दिल्ली हाईकोर्ट के जज भी मुख्यमंत्री के संग बैठ कर पंजाब के सियासी तापमान पर चर्चा करते रहे। जो उनके साथ बैठ सकता था वो बैठ गया, जो खड़ा हो सकता था वो खड़ा हो गया और जो झुक सकता था वो झुक गया। कुल मिला कर सैनी के अगल बगल एक पंचायत सी लग गई और देर तक पंजाब बनाम हरियाणा पर चर्चा होती रही।

पंजाब के लोगों ने हरियाणा की औद्योगिक नीति के कसीदे पढे
कुछ उद्यमियों ने हरियाणा की हालिया औद्योगिक नीति की दिल खोल कर तारीफ की। पंजाब के ये उद्यमी बता रहे थे कि किस तरह से नई औद्योगिक नीति से पड़ौसी राज्यों के लोग अब हरियाणा में निवेश करने के लिए उतावले हुए जा रहे हैं। सिरसा की पूर्व भाजपा सांसद पीछे के किसी अन्य डिब्बे की चेयरकार में सवार थी। जब उनको मुख्यमंत्री के शताब्दी ट्रेन से सफर की जानकारी मिली तो वो अपनी सीट छोड़ कर मुख्यमंत्री के साथ एग्जिूक्यूटिव क्लास में आ गई। वो भी काफी देर तक बतियाई। इत्तफाक से हमारी सीट भी सीएम के एकदम करीब थी। हम दोनों की आंखें चार हुई तो हमने भी इस मौके को हाथों हाथ लपका। उन संग बतियाना हुआ। सीएम बता रहे थे कि रेल यात्रा करना उनको बहुत पहले से पंसद रहा है। बतौर सांसद भी वो रेल से सफर करने को तरजीह देते थे। सीएम बनने के बाद जीवन में आए बदलावों पर बात करते हुए वो कहते हैं कि पहले एक विधानसभा का दायित्व था,फिर मंत्री बने तो इन विभागों को प्रदेश स्तर पर देखा,फिर सांसद हुए तो लोकसभा स्तर पर दायित्व बढा। अब जिम्मेदारी और ज्यादा बढ गई है। जिम्मेदारी बेशक बढ गई है,लेकिन निजी जीवन में खास बदलाव नहीं आया,सिवाय इसके कि अब भागदौड़ कुछ बढ गई है। पहले भी वो रात के 12 बजे के बाद ही सोते थे और अब भी। अब तो सोने में और भी लेट हो जाते हैं। अगले दिन के प्रोग्राम-मीटिंग आदि की एडवांस तैयारी करने के बाद ही सोने जाते हैं। सुबह 5 बजे उठ जाते हैं। तभी से काम पर जुट जाते हैं। खाने में उनकी खास डिमांड नहीं रहती। हल्का फुल्का खाना ही पंसद करते हैं। रात को तो भोजन भी नहीं करते। बहुत दफा दूर से लोगों को जरूर ये लगता होगा कि सीएम हैं तो बहुत ही मौज कर रहे होंगे,लेकिन ऐसा असलियत में नहीं होता। कभी कभी तो भागदौड़ इतनी हो जाती है कि भोजन का समय भी नहीं मिल पाता। एक के बाद एक लगातार कार्यक्रम, मीटिंग, पब्लिक से मिलना जुलना, फील्ड के दौरे ये सब इतनी तेजी से होते है कि कब सुबह से शाम और शाम से रात हो गई ये अहसास ही नहीं होता। सांस लेने की फुरसत भी नहीं होती। इस हालात पर कहा जा सकता है..

अपनी मंजिल पे पहुंचना भी,खड़े रहना भी
कितना मुश्किल है बड़े हो के बड़े रहना भी
सीएम के नायाब अंदाज के मुरीद हुए लोग
सीएम सैनी कहते हैं कि उनको ये तसल्ली है कि जनता ने जो हमारी सरकार से उम्मीद लगाई है, उसको पूरा करने-उस पर खरा उतरने के लिए परिश्रम में किसी किस्म की कोताही नहीं है। मैं तो हरियाणे का सीधा सादा आदमी हंू। पार्टी ने दायित्व दे दिया तो अब अपना 100 परसेंट दे रहा हंू। हमारी सीएम से इस चर्चा में किस्म किस्म की बातें हई। ये बातचीत कई किश्तों में हुई। बात तो उन्होंने खुलकर की साथ ही ये भी अनुरोध किया कि हमारी क्या कुछ बात हुई ये राज बेपर्दा ना हो जाए। इसलिए हमने उनके आग्रह का सम्मान किया और यहां इस पर ज्यादा लिखने से गुरेज ही किया। सीएम के साथ हमारी किश्तों में बातचीत का राज ये है कि उनके संग फोटो खिंचवाने के लिए बेकरार लोग उनके पास उमड़े ही रहते थे। जब किसी का दिल करता वो अचानक से प्रकट हो जाता।सैनी की मोहब्बत के मारे इन लोगों को निराश-नाराज करने की कोई वजह नहीं थी। फोटो खिंचवाने के लिए वहां इस कदर मारामारी रही कि कोई ये भी ये अवसर चूकना नहीं चाहता था। शायद वो सीएम सैनी को देख कर यही सोच रहे होंगे..

मेरा चांद मुझे आया है नजर,ए रात जरा थम थम के गुजर-छाया है नशा मेरी आंखों पर

इसी दौरान रेलवे के भी कुछ अफसरों ने उनको रेलवे सेफ्टी पर अपने लैपटाप में प्रजेंटेशन दिया। इस क्षेत्र में क्या कुछ नया हो रहा है, इस पर ब्रीफ किया। इस यात्रा के दौरान सीएम ने बहुतों को मोबाइल फोन पर भी निपटाया। कई अधिकारियों से बात की। उनके निजी सचिव रविकांत उन से लगातार मोबाइल पर लोगों की बात करवाते रहे। कुछ सरकारी व्यस्तत्ताओं के बारे में विनोद धीमान भी सीएम को लगातर ब्रीफ करते रहे। ऐसा लगता है कि सीएम सैनी को ये अच्छे से अहसास है कि ये रूतबा,ये जलवा,ये प्रतिष्ठा सब अस्थाई है। हम सब किराएदार हैं और ये अपना मकान बदलते रहते हैं। संभवत: तभी उनके स्वभाव में अभी अकड़ या पद के साथ आने वाला अहंकार प्रकट नहीं हुआ है। वो ग्राउडेंड ही रहते हैं। ऐसा कहने वाला शायद ही कोई हो जो सीएम पर ये इल्जाम लगाए कि उन्होंने कभी किसी से पावर के नशे में बदतमीजी की है। जब ट्रेन नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पहुंचने कोे हुई तो फिर से सुरक्षा कर्मियों की डिब्बे में हलचल बढ गई। सीएम को आगे के दरवाजे से उतरा जाएगा या पिछले से..प्लेटफार्म से अपनी सरकारी गाड़ी तक वो कैसे जाएंगे.. पैदल या इलैक्ट्रिक बग्गी से, समेत इन कई जरूरी चुनौतीपूर्ण विषयों पर फैसले लेने के लिए सुरक्षाकर्मी जददोजहद करते रहे। यहां रेलवे स्टेशन पर भी सीएम के स्वागत में सरकारी अमले के अलावा इलैक्ट्रानिक मीडिया के पत्रकार भी पलके पावंडे बिछाए हाजिर थे। वो सीएम की एक अदद बाइट लेना चाह रहे थे और सीएम ने उनको कतई निराश नहीं किया। जहां से -जैसे उनकी आज की ट्रेन की यात्रा शुरू हुई थी..उसी तरह से खत्म भी हुई। पर्यावरण के संरक्षण और किफायत के महत्व पर उन्होंने जनता जर्नादन को महत्वपूर्ण संदेश दिया। सैनी के इस संदेश की गंूज दूर दूर तक.. बहुत दूर तक सुनाई दी। देनी भी चाहिए। अगर ऐसा नहीं हो पाता तो सूचना व जनसम्पर्क के अमले और हम पत्रकारों का तो जीना ही किसी काम नहीं आएगा। इसलिए सैनी का ये ट्रेन से सफर सोशल मीडिया से लेकर अखबार-टीवी पर छाया रहा। अपने सफर से जुड़ी इन खबरों को देख पढ कर ही शायद सीएम को भी अहसास हुआ होगा कि वो पर्यावरण संरक्षण में कितना विराट योगदान दे रहे हैं। सीएम की इस सादगी पर कहा जा सकता है..

यूं नहीं है कि फ़कत मैं ही उसे चाहता हंू
जो भी उस पेड़ की छांव में गया बैठ गया
इतना मीठा था वो गुस्से भरा लहजा मत पूछ
उस ने जिस जिस को भी जाने को कहा बैठ गया
उस की मर्जी वो जिसे पास बिठा ले अपने
इस पे क्या लड़ना फलां मेरी जगह बैठ गया
बात दरियाओं की,सूरज की, न तेरी है यहां
दो कदम जो भी उसके चला बैठ गया
यारों की महफिलों में नहीं होती बैठने की जगह मुकर्रर
जो भी इक बार जहां बैठ गया,बैठ गया

RAMESH GOYAT
Author: RAMESH GOYAT

With over 20 years of experience in Hindi journalism, Ramesh Goyat has served as District Bureau Chief in Kaithal and worked with the Haryana , Punjab , HP and UT Bureau in Chandigarh. Coming from a freedom fighter family, he is known for his fast, accurate, and credible reporting. Through Babugiri Hindi, he aims to deliver impartial and fact-based news to readers.

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