बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
शिमला/ हिमाचल, 27 मई। पंचायत चुनावों के दौरान मतदान से 48 घंटे पहले लागू होने वाले “साइलेंस पीरियड” यानी चुनावी मौन के महत्व को लेकर प्रख्यात सामाजिक वैज्ञानिक डॉ. पी.सी. शर्मा ने विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह अवधि मतदाताओं को चुनाव प्रचार के प्रभाव से मुक्त होकर शांतिपूर्वक और विवेकपूर्ण निर्णय लेने का अवसर प्रदान करती है।
World Heritage Foundation के मुख्य संरक्षक एवं अध्यक्ष डॉ. शर्मा ने बताया कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 126, 126A और 135C के तहत चुनाव से जुड़ी प्रचार गतिविधियों पर पूरी तरह रोक रहती है। इस दौरान सार्वजनिक सभाएं, जुलूस, भाषण, प्रेस कॉन्फ्रेंस, राजनीतिक इंटरव्यू और मतदाताओं को प्रभावित करने वाले मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जा सकते।
उन्होंने कहा कि चुनाव क्षेत्र में होटल, दुकान, रेस्टोरेंट या अन्य स्थानों पर शराब की बिक्री और वितरण भी प्रतिबंधित रहता है। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ छह महीने तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
डॉ. शर्मा ने स्पष्ट किया कि चुनावी मौन के दौरान किसी भी प्रकार के ओपिनियन पोल, एग्जिट पोल, राजनीतिक विश्लेषण, साउंड बाइट्स या प्रचार सामग्री का प्रसारण इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर नहीं किया जा सकता। टेलीविजन, रेडियो, एफएम चैनल या केबल नेटवर्क द्वारा नियम तोड़ने पर दो साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी राजनीतिक विज्ञापनों के लिए पूर्व प्रमाणन अनिवार्य है। Google, Facebook, Twitter और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन करना होता है। बिना प्रमाणन के राजनीतिक विज्ञापन प्रसारित करना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
डॉ. शर्मा ने “पेड न्यूज” को लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताते हुए कहा कि मीडिया संस्थानों की जिम्मेदारी निष्पक्ष और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करना है। किसी उम्मीदवार के पक्ष या विपक्ष में झूठी, भ्रामक या प्रायोजित खबरें प्रकाशित करना दंडनीय अपराध है। इसके लिए जिला और राज्य स्तर पर गठित मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी (MCMC) निगरानी करती है।
उन्होंने बताया कि चुनावी मौन के दौरान लाउडस्पीकर के उपयोग पर भी पूरी तरह प्रतिबंध रहता है। किसी वाहन, भवन या सार्वजनिक स्थान पर लाउडस्पीकर लगाने को आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा।
डॉ. शर्मा ने नागरिकों से अपील की कि यदि कहीं भी चुनावी नियमों या आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन दिखाई दे तो उसकी शिकायत cVIGIL मोबाइल एप के माध्यम से तुरंत करें, ताकि स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित किए जा सकें।













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