बाबूगिरी हिंदी न्यूज़
चंडीगढ़, 30 मई। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सेक्टर-26 थाना क्षेत्र में दर्ज एफआईआर नंबर 44/26 मामले में सामाजिक कार्यकर्ता एवं लेखिका मधु किश्वर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि कई अवसर दिए जाने और नोटिस जारी किए जाने के बावजूद आवेदक ने जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं किया।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि आवेदक की सोशल मीडिया पर बड़ी पहुंच और प्रभाव है। कोर्ट ने कहा कि कथित फर्जी वीडियो से संबंधित ट्विटर पोस्ट के बाद वीडियो सोशल मीडिया पर और तेजी से वायरल हुआ, जिससे मामला और गंभीर हो गया। अदालत ने माना कि किसी संवैधानिक प्राधिकरण पर इस प्रकार के आरोप और उसे सार्वजनिक रूप से बदनाम करने के प्रयास सामाजिक असामंजस्य पैदा कर सकते हैं।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और इस स्तर पर आवेदक की संभावित आपराधिक संलिप्तता से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
बताया जा रहा है कि इससे पहले भी मधु किश्वर ने अग्रिम जमानत के लिए निचली अदालत का रुख किया था, लेकिन 8 मई 2026 को माननीय एसीजेएम अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर आज सुनवाई हुई।
सूत्रों के अनुसार, पुलिस अब मामले की जांच को और तेज कर सकती है। जांच एजेंसियां सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो सामग्री और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही हैं। मामले में यह भी देखा जा रहा है कि कथित वीडियो और सोशल मीडिया गतिविधियों का सार्वजनिक व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा।
कानूनी जानकारों का कहना है कि हाईकोर्ट की इस टिप्पणी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के प्रभाव और संवैधानिक संस्थाओं की साख से जुड़े पहलुओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। वहीं, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में सभी तथ्यों और डिजिटल रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।













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