रमेश गोयत
चंडीगढ़, 3 जून। हरियाणा पुलिस ने संगठित अपराध और गैंगस्टर नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए तकनीक आधारित नया ‘क्राइम इंटेलिजेंस मॉडल’ लागू किया है। इसके तहत रोहतक, झज्जर, सोनीपत और फरीदाबाद जिलों में गठित विशेष रोहतक-झज्जर-सोनीपत-फरीदाबाद (आरजेएसएफ) यूनिट पिछले 10 वर्षों में जघन्य अपराधों में शामिल अपराधियों का विस्तृत डिजिटल डाटाबेस तैयार कर उनकी गतिविधियों पर 24 घंटे निगरानी रख रही है।
यह निर्णय हरियाणा के पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल की अध्यक्षता में पंचकूला के सेक्टर-6 स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में लिया गया। बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशकों, पुलिस आयुक्तों और जिला पुलिस अधीक्षकों ने भाग लिया।
पायलट प्रोजेक्ट से बना राज्यस्तरीय मॉडल
बैठक के दौरान रोहतक रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सिमरदीप सिंह ने आरजेएसएफ यूनिट की कार्यप्रणाली और उपलब्धियों का प्रस्तुतीकरण किया। उन्होंने बताया कि डीजीपी के निर्देश पर इस यूनिट की शुरुआत रोहतक में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की गई थी। शुरुआती सफलता के बाद इसे झज्जर, सोनीपत और फरीदाबाद तक विस्तारित किया गया। अब यह यूनिट चार जिलों में अपराध नियंत्रण और अपराधियों की निगरानी के लिए विशेष इंटेलिजेंस तंत्र के रूप में कार्य कर रही है।
10,892 अपराधियों का तैयार हुआ विस्तृत डाटाबेस
आरजेएसएफ यूनिट ने हत्या, हत्या के प्रयास और अन्य गंभीर अपराधों में संलिप्त 10,892 अपराधियों का विस्तृत डाटाबेस तैयार किया है। इसमें अपराधियों का आपराधिक इतिहास, वर्तमान गतिविधियां, संपर्क सूत्र, सामाजिक पृष्ठभूमि और जोखिम स्तर जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल हैं। पुलिस का मानना है कि इस विश्लेषण से दोबारा अपराध करने की संभावना वाले व्यक्तियों की पहचान करने में मदद मिलेगी।
गैंगस्टर नेटवर्क में नई भर्ती रोकने पर फोकस
यूनिट केवल सक्रिय अपराधियों की निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि उन व्यक्तियों पर भी नजर रख रही है जिन्हें गैंगस्टर गिरोह अपने नेटवर्क में शामिल करने की कोशिश कर सकते हैं। विशेष रूप से छोटे अपराधियों, जमानत पर बाहर आए आरोपियों और आपराधिक प्रवृत्ति के युवाओं की गतिविधियों का विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि उन्हें संगठित अपराध का हिस्सा बनने से पहले चिन्हित किया जा सके।
तकनीक और फील्ड इंटेलिजेंस का समन्वय
आरजेएसएफ यूनिट आधुनिक तकनीक, मानव स्रोतों और फील्ड इंटेलिजेंस के संयोजन से काम कर रही है। विशेष टीमें अपराधियों के वर्तमान पते, संपर्कों, सामाजिक गतिविधियों और नेटवर्क की जानकारी एकत्र कर रही हैं। इस डेटा का तकनीकी विश्लेषण कर संभावित आपराधिक गतिविधियों का पूर्वानुमान लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
पूरे हरियाणा में साझा होगा अपराधियों का डाटा
डीजीपी अजय सिंघल ने कहा कि अपराधी किसी एक जिले तक सीमित नहीं रहते, इसलिए आरजेएसएफ यूनिट द्वारा तैयार की गई सूचनाओं और डाटाबेस को भविष्य में राज्य के अन्य जिलों के साथ भी साझा किया जाएगा। इससे अंतर-जिला समन्वय मजबूत होगा और अपराधों की रोकथाम में तेजी आएगी।
STF की बड़ी कार्रवाई, तीन वर्षों में 941 गैंग सदस्य गिरफ्तार
बैठक में हरियाणा स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की उपलब्धियों की भी समीक्षा की गई। STF के पुलिस अधीक्षक वसीम अकरम ने बताया कि वर्ष 2024 में 323, वर्ष 2025 में 470 और वर्ष 2026 में 28 मई तक 148 गैंग सदस्यों एवं अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। इस प्रकार पिछले तीन वर्षों में STF ने कुल 941 गैंग सदस्यों को गिरफ्तार कर संगठित अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है।
विदेशों से 22 गैंगस्टरों की वापसी
हरियाणा STF ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय गैंगस्टरों के खिलाफ भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। STF के गठन के बाद अब तक 22 वांछित गैंगस्टरों को विभिन्न देशों से डिपोर्ट या प्रत्यर्पित कर भारत लाया जा चुका है। वर्ष 2026 में अब तक 9 गैंगस्टरों की भारत वापसी सुनिश्चित की गई है। इसके अलावा 14 अन्य वांछित गैंगस्टर विभिन्न देशों में हिरासत में हैं और उन्हें भारत लाने की प्रक्रिया जारी है।
इंटेलिजेंस आधारित पुलिसिंग पर जोर
बैठक को संबोधित करते हुए डीजीपी अजय सिंघल ने कहा कि बदलते अपराध स्वरूप और गैंगस्टर नेटवर्क की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए पुलिस को पारंपरिक व्यवस्था से आगे बढ़कर डेटा आधारित और इंटेलिजेंस संचालित रणनीति अपनानी होगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जघन्य अपराधों में शामिल व्यक्तियों, सक्रिय गैंग सदस्यों और उनके सहयोगियों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जाए तथा जिलों के बीच सूचनाओं का प्रभावी आदान-प्रदान सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि हरियाणा पुलिस का लक्ष्य केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि अपराध की संभावनाओं को पहले ही समाप्त करना है, ताकि संगठित अपराध और गैंगस्टर नेटवर्क पर निर्णायक प्रहार किया जा सके।













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