August 6, 2026 7:14 am

August 6, 2026 7:14 am

HARYANA NEWS: 661 करोड़ बैंक घोटाला: CBI की जांच में बड़ा मोड़, IAS अधिकारी बन सकता है सरकारी गवाह!

बाबूगिरी हिंदी न्यूज़
चंडीगढ़/नई दिल्ली: हरियाणा में IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक से जुड़े 661 करोड़ रुपये के कथित बैंक घोटाले की जांच में बड़ा मोड़ आने के संकेत मिले हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) हरियाणा कैडर के एक वरिष्ठ IAS अधिकारी को सरकारी गवाह बनाने की संभावनाओं पर विचार कर रही है। माना जा रहा है कि यदि अधिकारी जांच एजेंसी के समक्ष सरकारी गवाह बनता है तो घोटाले के पूरे नेटवर्क, धन के प्रवाह और इसमें शामिल लोगों की भूमिका से जुड़े कई अहम राज सामने आ सकते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, CBI को जांच के दौरान ऐसे संकेत मिले हैं जो यह दर्शाते हैं कि सरकारी विभागों के बैंक खाते खोलने, फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदें (एफडीआर) तैयार कराने और सरकारी धन को विभिन्न खातों में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया में कुछ अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही हो सकती है। ऐसे में किसी अधिकारी का सरकारी गवाह बनना जांच एजेंसी के लिए मजबूत साक्ष्य जुटाने में मददगार साबित हो सकता है।

दिल्ली-एनसीआर तक पहुंची जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए CBI ने जांच का दायरा हरियाणा और चंडीगढ़ से बाहर बढ़ाते हुए दिल्ली-एनसीआर तक विस्तारित कर दिया है। हाल ही में एजेंसी ने चंडीगढ़, पंचकूला और दिल्ली-एनसीआर में हरियाणा कैडर के तीन IAS अधिकारियों और एक IFS अधिकारी के आवास समेत छह स्थानों पर छापेमारी की। तलाशी अभियान के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं, जिनकी गहन जांच की जा रही है।

पूछताछ से मिले महत्वपूर्ण सुराग
जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जिस अधिकारी को सरकारी गवाह बनाए जाने पर विचार हो रहा है, उससे पहले भी कई दौर की पूछताछ की जा चुकी है। अधिकारी लंबे समय तक विकास एवं पंचायत विभाग में कार्यरत रहा है और वर्तमान में सिविल सचिवालय में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहा है। उसके पास मौजूद प्रशासनिक और वित्तीय प्रक्रियाओं से जुड़ी जानकारी पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

निजी कंपनी भी जांच के घेरे में
CBI की जांच में नोएडा स्थित एक निजी कंपनी का नाम भी सामने आया है। एजेंसी को आशंका है कि घोटाले से जुड़ी धनराशि पहले कंपनी के खातों में जमा कराई गई और बाद में उसे विभिन्न निजी खातों में स्थानांतरित किया गया। कंपनी के परिसरों में हुई तलाशी के दौरान वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड, दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं।

CBI और ED दोनों कर रही हैं जांच
661 करोड़ रुपये के इस बहुचर्चित घोटाले की जांच फिलहाल CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) दोनों एजेंसियां कर रही हैं। CBI पहले ही 13 व्यक्तियों और दो कथित फर्जी संस्थाओं के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। जांच में सामने आया है कि सरकारी विभागों की करोड़ों रुपये की राशि को कथित तौर पर फर्जी एफडीआर के माध्यम से बैंकिंग प्रणाली में घुमाकर विभिन्न खातों में ट्रांसफर किया गया।

कई वरिष्ठ अधिकारी रडार पर
मामले में कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं। इनमें मोहम्मद शाइन, पंकज अग्रवाल, विनीत गर्ग, आर.के. सिंह, प्रदीप कुमार, मनीराम शर्मा, संकेत कुमार और डॉ. वैभव शर्मा शामिल हैं। हरियाणा सरकार इन अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 17A के तहत जांच की अनुमति पहले ही प्रदान कर चुकी है।
जांच एजेंसियों की नजर अब उस संभावित सरकारी गवाह पर टिकी हुई है, जिसके बयान से घोटाले की पूरी साजिश, धन के लेन-देन और कथित तौर पर शामिल लोगों की भूमिकाओं से पर्दा उठ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस हाई-प्रोफाइल बैंक घोटाले की जांच में बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

RAMESH GOYAT
Author: RAMESH GOYAT

With over 20 years of experience in Hindi journalism, Ramesh Goyat has served as District Bureau Chief in Kaithal and worked with the Haryana , Punjab , HP and UT Bureau in Chandigarh. Coming from a freedom fighter family, he is known for his fast, accurate, and credible reporting. Through Babugiri Hindi, he aims to deliver impartial and fact-based news to readers.

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