नई एफटीए नीति से पंजाब-हरियाणा को मिलेगा निर्यात का बड़ा मौका
रमेश गोयत
चंडीगढ़, 9 जून। भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने मंगलवार को चंडीगढ़ में एक उच्च-स्तरीय हितधारक संवाद आयोजित कर पंजाब और हरियाणा के उद्योगों, निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), किसानों तथा सरकारी अधिकारियों को भारत के तेजी से विस्तारित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) नेटवर्क से मिलने वाले नए अवसरों की जानकारी दी। कार्यक्रम का उद्देश्य दोनों राज्यों की निर्यात क्षमता को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाकर व्यापार और रोजगार के नए द्वार खोलना रहा।
इस अवसर पर वाणिज्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव नितिन कुमार यादव ने कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के चंडीगढ़ स्थित क्षेत्रीय कार्यालय का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में एपीडा के अध्यक्ष अभिषेक देव वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ कार्यालय पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ क्षेत्र में कृषि निर्यात को नई गति देगा और किसानों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा।
भारत का निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा
मीडिया को संबोधित करते हुए नितिन कुमार यादव ने बताया कि पिछले एक दशक में भारत के कुल निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2014-15 में जहां देश का कुल वस्तु एवं सेवा निर्यात 468 अरब अमेरिकी डॉलर था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 863 अरब अमेरिकी डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है।
उन्होंने कहा कि इसी अवधि में वस्तु निर्यात 310 अरब डॉलर से बढ़कर 442 अरब डॉलर और सेवा निर्यात 158 अरब डॉलर से बढ़कर 421 अरब डॉलर हो गया। गैर-पेट्रोलियम निर्यात भी 387.9 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुका है, जो भारत के निर्यात आधार की मजबूती और विविधता को दर्शाता है।

नए एफटीए से उद्योगों को मिलेगा सीधा लाभ
संवाद के दौरान बताया गया कि भारत द्वारा किए गए नए मुक्त व्यापार समझौतों के तहत वस्त्र एवं परिधान, इंजीनियरिंग उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स और औषधि क्षेत्रों को कई देशों में 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच मिलेगी। यह पंजाब और हरियाणा के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं।
अतिरिक्त सचिव ने बताया कि भारत-ईएफटीए व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता (टीईपीए) के तहत भारत के लगभग 98 प्रतिशत निर्यात को शुल्क-मुक्त पहुंच प्राप्त होगी। वहीं भारत-यूरोपीय संघ एफटीए से भारतीय निर्यातकों को लगभग 3.2 लाख करोड़ रुपये के व्यापार अवसर मिलने की संभावना है।
उन्होंने कहा कि भारत-यूएई सीईपीए और भारत-मॉरीशस सीईसीपीए जैसे समझौतों के कारण भारत के 99 प्रतिशत निर्यात को इन बाजारों में शून्य शुल्क पहुंच मिल रही है। इसके अलावा भारत और अमेरिका के बीच ‘मिशन 500’ पहल के तहत 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
पंजाब और हरियाणा के लिए विशेष अवसर
नितिन कुमार यादव ने कहा कि पंजाब के लिए वस्त्र, परिधान, इंजीनियरिंग, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों में अपार संभावनाएं मौजूद हैं। वहीं हरियाणा के प्रमुख निर्यात उत्पादों में बासमती चावल, भैंस का मांस, गैर-बासमती चावल, प्राकृतिक शहद, डेयरी उत्पाद और विभिन्न खाद्य उत्पाद शामिल हैं। औषधि और रसायन क्षेत्र में भी निर्यात विस्तार की व्यापक संभावनाएं हैं।
निर्यात अवसंरचना को किया गया मजबूत
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की निदेशक मोनिका गौर ने बताया कि पंजाब और हरियाणा में निर्यात अवसंरचना को मजबूत बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। अमृतसर हवाई अड्डे पर पैकहाउस और गुणवत्ता अनुपालन सुविधाओं का विस्तार किया गया है, जबकि हॉर्टीनेट ट्रेसबिलिटी प्लेटफॉर्म के जरिए किसानों और खेतों का पंजीकरण मजबूत किया गया है।
हरियाणा में बासमती नेट और हॉर्टीनेट प्रणालियों को एकीकृत कर अंतरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप व्यवस्था विकसित की गई है। इसके अलावा निर्यातकों को वैश्विक पैकेजिंग और लेबलिंग मानकों की जानकारी देने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
कृषि निर्यात में क्षेत्र की बढ़ती पहचान
बैठक में क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण निर्यात उपलब्धियों का उल्लेख किया गया। इनमें अबोहर से सिंगापुर और रूस को किन्नू की खेप, डेराबस्सी से दक्षिण कोरिया को रेडी-टू-ईट पॉपकॉर्न का पहला निर्यात, पठानकोट से कतर और यूएई को लीची, संगरूर से कनाडा को मूल्यवर्धित बाजरा उत्पाद तथा हरियाणा से मेडागास्कर को हजारों टन चावल कर्नेल्स का निर्यात शामिल है।
इसके अलावा सोनीपत के अटेरना गांव की किसान उत्पादक कंपनी द्वारा कनाडा को सोया चाप का पहला निर्यात भी उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में सामने आया।
25,060 करोड़ रुपये का निर्यात संवर्धन मिशन
हितधारक संवाद में केंद्र सरकार के निर्यात संवर्धन मिशन (ईपीएम) की भी विस्तार से जानकारी दी गई। नवंबर 2025 में स्वीकृत इस मिशन का कुल बजट 25,060 करोड़ रुपये है और इसे अगले छह वर्षों तक लागू किया जाएगा।
इस मिशन के तहत एमएसएमई, किसानों और निर्यातकों को सस्ती वित्तीय सहायता, प्री-शिपमेंट एवं पोस्ट-शिपमेंट ऋण पर ब्याज सहायता, ई-कॉमर्स निर्यात समर्थन, गुणवत्ता मानकों के अनुपालन, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बाजार पहुंच जैसी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।
निर्यातकों से सक्रिय भागीदारी का आह्वान
एपीडा चंडीगढ़ के क्षेत्रीय प्रमुख हरप्रीत सिंह ने कहा कि यह संवाद पंजाब और हरियाणा के किसानों, एफपीओ, एमएसएमई और निर्यातकों को वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने सभी हितधारकों से उत्पाद-विशिष्ट निर्यात योजनाएं तैयार करने, एपीडा की सहायता योजनाओं का लाभ उठाने और नए एफटीए अवसरों का अधिकतम उपयोग करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में पंजाब और हरियाणा की निर्यात क्षमता महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और नए व्यापार समझौते दोनों राज्यों के किसानों, उद्योगों और उद्यमियों के लिए आर्थिक विकास के नए रास्ते खोलेंगे।












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