April 5, 2026 1:18 pm

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HARYANA: सिविल विवाद में अवैध गिरफ्तारी पर हरियाणा मानव अधिकार आयोग सख्त

जस्टिस ललित बत्रा ने पुलिस अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया, मुआवजे पर भी जवाब तलब

धारा 107/151 (अब बी.एन.एस.एस. 126/170) का उद्देश्य निवारक न्याय, दंडात्मक नहीं: आयोग

चंडीगढ़, 08 जनवरी 2026: हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने जिला भिवानी के थाना सदर में सिविल प्रकृति के विवाद के दौरान बी.एन.एस.एस. की धारा 126/170 (पूर्व में दं.प्र.सं. की धारा 107/151) का अनुचित प्रयोग कर एक व्यक्ति को गिरफ्तार किए जाने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने इसे मानव अधिकारों का गंभीर उल्लंघन मानते हुए संबंधित पुलिस अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी करने के आदेश दिए हैं।
आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा के समक्ष प्रस्तुत पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, दो भाइयों के बीच सिविल विवाद की शिकायत की जांच के दौरान सहायक उप निरीक्षक/ई.एस.आई. वीरेंद्र द्वारा निवारक धाराओं के तहत कार्रवाई की गई। आयोग ने स्पष्ट किया कि बी.एन.एस.एस. की धारा 126 एवं 170 का उद्देश्य निवारक न्याय है, न कि दंडात्मक, और इन धाराओं के प्रयोग हेतु आवश्यक शर्तें इस मामले में पूरी नहीं होतीं।
शांति भंग की तात्कालिक आशंका नहीं थी
जस्टिस बत्रा ने अपने आदेश में कहा कि जब मामला सिविल प्रकृति का था और दोनों पक्ष पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति में पुलिस स्टेशन में मौजूद थे, तब शांति भंग या किसी संज्ञेय अपराध की तात्कालिक आशंका नहीं थी। रिपोर्ट के सावधानीपूर्वक परीक्षण से यह भी स्पष्ट होता है कि धारा 126/170 लागू करने की वैधानिक शर्तें पूरी नहीं होती थीं।
धारा 170 का प्रयोग केवल विशेष परिस्थितियों में
आयोग ने दोहराया कि धारा 170 का प्रयोग तभी किया जाना चाहिए जब शांति भंग होने का तात्कालिक खतरा हो या धारा 126 के अंतर्गत शांति भंग की संभावना हो। इसके अलावा, गिरफ्तारी तभी उचित ठहराई जा सकती है जब संबंधित व्यक्ति किसी संज्ञेय अपराध को करने की योजना बना रहा हो और अपराध को अन्यथा रोका न जा सकता हो।

पुलिस रिपोर्ट में मामला सिविल प्रकृति का
पुलिस अधीक्षक, भिवानी ने अपनी दिनांक 02.12.2025 की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि शिकायत की जांच में मामला सिविल प्रकृति का पाया गया। इसके बावजूद सहायक उप निरीक्षक/ई.एस.आई. वीरेंद्र द्वारा जांच को शांति भंग की आशंका और संज्ञेय अपराध की मंशा में परिवर्तित कर दिया गया। आयोग ने इसे बिना ठोस सामग्री के एकतरफा और चयनात्मक कार्रवाई बताते हुए शक्ति के दुरुपयोग और पक्षपातपूर्ण दृष्टिकोण का संकेत माना।

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला
आयोग ने अपने आदेश में राजेंद्र सिंह पठानिया एवं अन्य बनाम राज्य (एन.सी.टी. दिल्ली एवं अन्य), 2011 (13) एस.सी.सी. 329 के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि दं.प्र.सं. की धारा 107/151 (अब बी.एन.एस.एस. 126/170) का उद्देश्य निवारक न्याय है। इन धाराओं के तहत गिरफ्तारी तभी की जा सकती है जब संज्ञेय अपराध की तात्कालिक योजना हो और उसे अन्यथा रोका न जा सके। अन्यथा ऐसी गिरफ्तारी संविधान के अनुच्छेद 21 एवं 22 के अंतर्गत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन मानी जाएगी।

कारण बताओ नोटिस, मुआवजे पर भी स्पष्टीकरण
आयोग के असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि उपलब्ध तथ्यों और गंभीर आरोपों को देखते हुए सहायक उप निरीक्षक/ई.एस.आई. वीरेंद्र, थाना सदर, भिवानी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। साथ ही जिला पुलिस प्रमुख होने के नाते पुलिस अधीक्षक, भिवानी से भी यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि शिकायतकर्ता को मानव अधिकारों के उल्लंघन के लिए मुआवजा क्यों न दिया जाए।
संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपना स्पष्टीकरण आयोग के जांच निदेशक के माध्यम से अगली सुनवाई की तिथि 25 फरवरी 2026 से एक सप्ताह पूर्व आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें।

BabuGiri Hindi
Author: BabuGiri Hindi

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