सेक्टर-39 में बनेगी अत्याधुनिक अनाज, फल एवं सब्जी मंडी
रमेश गोयत
चंडीगढ़, 10 जून। चंडीगढ़ प्रशासन ने शहर के कृषि एवं व्यापारिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सेक्टर-39 में प्रस्तावित नई अनाज, फल एवं सब्जी मंडी परियोजना के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। यह समिति परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) की जांच, तकनीकी मूल्यांकन तथा निर्माण कार्यों की निगरानी करेगी, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि पूरा प्रोजेक्ट निर्धारित मानकों और समयसीमा के अनुरूप पूरा हो।
शहर के कृषि एवं व्यापारिक ढांचे को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में चंडीगढ़ प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रशासन ने एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है, जो परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट (डीपीआर) की जांच, तकनीकी मूल्यांकन और निर्माण कार्यों की निगरानी करेगी। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यह महत्वाकांक्षी परियोजना निर्धारित मानकों के अनुरूप और तय समय सीमा में पूरी हो।
चंडीगढ़ प्रशासन के कृषि विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद ने इस समिति के गठन को मंजूरी प्रदान की है। समिति नई मंडी की डीपीआर का परीक्षण करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि परियोजना केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के दिशा-निर्देशों तथा अन्य प्रासंगिक नियमों के अनुरूप हो। समिति अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें राज्य कृषि विपणन बोर्ड (एसएएमबी) के सचिव को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विभिन्न विभागों के अधिकारी होंगे शामिल
परियोजना के व्यापक और निष्पक्ष मूल्यांकन के लिए समिति में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है। कृषि निदेशक, चंडीगढ़ प्रशासन को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा मार्केट कमेटी के प्रशासक, राज्य कृषि विपणन बोर्ड के संयुक्त सचिव, सीपी डिवीजन नंबर-4 के कार्यकारी अभियंता, नगर निगम के पब्लिक हेल्थ डिवीजन के कार्यकारी अभियंता तथा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के उपमंडल अभियंता को सदस्य नियुक्त किया गया है।
प्रशासन का मानना है कि विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक क्षेत्रों के विशेषज्ञ अधिकारियों की मौजूदगी से परियोजना के प्रत्येक पहलू की गहन समीक्षा संभव हो सकेगी और भविष्य में किसी प्रकार की तकनीकी या वित्तीय बाधा नहीं आएगी।
टेंडर से लेकर निर्माण तक रखी जाएगी नजर
समिति की जिम्मेदारी केवल डीपीआर की समीक्षा तक सीमित नहीं होगी। आदेश के अनुसार समिति परियोजना से संबंधित टेंडर दस्तावेजों, विस्तृत नक्शों, निर्माण ड्रॉइंग, लागत अनुमान और अन्य तकनीकी दस्तावेजों की भी जांच करेगी। ये दस्तावेज राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास परामर्श सेवा (NABCONS) द्वारा तैयार किए जाएंगे।
इसके अलावा समिति निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि सभी गतिविधियां निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी हों। निर्माण गुणवत्ता, तकनीकी मानकों और परियोजना की प्रगति पर लगातार नजर रखी जाएगी।
किसानों और व्यापारियों को मिलेगा लाभ
सेक्टर-39 में प्रस्तावित नई मंडी को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की योजना है। इससे किसानों, आढ़तियों, थोक व्यापारियों और उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। वर्तमान समय में कृषि उत्पादों की बढ़ती आवक और व्यापारिक गतिविधियों को देखते हुए आधुनिक मंडी की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
नई मंडी के निर्माण से कृषि उपज की खरीद-बिक्री अधिक व्यवस्थित होगी, परिवहन और भंडारण सुविधाओं में सुधार आएगा तथा किसानों को अपनी उपज के बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी। इसके साथ ही शहर और आसपास के क्षेत्रों में फल, सब्जी और अनाज की आपूर्ति व्यवस्था भी मजबूत होगी।
क्षेत्रीय व्यापार का बन सकता है बड़ा केंद्र
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना पूरी होने के बाद सेक्टर-39 की मंडी उत्तर भारत के प्रमुख कृषि व्यापार केंद्रों में शामिल हो सकती है। चंडीगढ़ के अलावा पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के किसानों और व्यापारियों को भी इसका लाभ मिलेगा। आधुनिक आधारभूत ढांचे, बेहतर यातायात व्यवस्था और सुव्यवस्थित विपणन प्रणाली के कारण यह मंडी क्षेत्रीय कृषि अर्थव्यवस्था को नई गति दे सकती है।
प्रशासन द्वारा समिति के गठन को परियोजना को पारदर्शी, समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अब इस बहुप्रतीक्षित परियोजना के धरातल पर उतरने की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।













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