June 21, 2026 5:58 pm

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PANCHKULA NEWS: पंचकूला को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने की मुहिम शुरू, पुलिस कमिश्नर पंकज नैन की बड़ी पहल

6 सदस्यीय विशेष टीम गठित, सार्वजनिक स्थानों और ट्रैफिक सिग्नलों पर आज से अभियान शुरू

बच्चों से भीख मंगवाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई, पुनर्वास के साथ कानूनी शिकंजा भी कसेगी पुलिस
रमेश गोयत
चंडीगढ़/पंचकूला, 15 जून। पंचकूला को सुरक्षित, व्यवस्थित और अपराध मुक्त शहर बनाने की दिशा में पुलिस प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए शहर को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। पुलिस कमिश्नर पंकज नैन के निर्देश पर सोमवार से “भिक्षावृत्ति मुक्त पंचकूला ड्राइव” की शुरुआत कर दी गई है। इस अभियान के तहत सार्वजनिक स्थानों, ट्रैफिक सिग्नलों, बाजारों, अस्पतालों और धार्मिक स्थलों पर भीख मांगने वालों की पहचान कर उनका पुनर्वास किया जाएगा, जबकि बच्चों से जबरन भीख मंगवाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
डीसीपी सृष्टि गुप्ता ने बताया कि अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए महिला थाना प्रभारी इंस्पेक्टर राजेश कुमारी के नेतृत्व में छह सदस्यीय विशेष टीम का गठन किया गया है। यह टीम शहर के प्रमुख चौराहों, बस स्टैंडों, बाजारों, अस्पतालों और अन्य भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में लगातार गश्त और निगरानी करेगी। टीम का उद्देश्य केवल भिक्षावृत्ति को रोकना ही नहीं बल्कि जरूरतमंद लोगों को सामाजिक संस्थाओं और पुनर्वास केंद्रों से जोड़कर उन्हें मुख्यधारा में वापस लाना भी है।

बच्चों से भीख मंगवाना गंभीर अपराध
पुलिस कमिश्नर पंकज नैन ने स्पष्ट किया कि बच्चों का इस्तेमाल भीख मंगवाने के लिए करना कानूनन गंभीर अपराध है। उन्होंने बताया कि किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 76 के तहत किसी भी बच्चे को भीख मांगने के लिए मजबूर करना या उसका उपयोग करना गैर-कानूनी है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर पांच वर्ष तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है।
उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति भीख मंगवाने के लिए बच्चे को शारीरिक रूप से नुकसान पहुंचाता है या उसे अपंग बनाता है तो उसके खिलाफ सात से दस वर्ष तक की कठोर कैद और पांच लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। पुलिस ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरतेगी।

माता-पिता पर भी होगी कार्रवाई
कमिश्नर नैन ने चेतावनी दी कि यदि कोई माता-पिता या परिजन अपने बच्चों से भीख मंगवाते पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है और किसी भी कीमत पर उनके शोषण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सड़क सुरक्षा से भी जुड़ा है मुद्दा
पुलिस अधिकारियों के अनुसार रेड लाइटों और व्यस्त चौराहों पर भीख मांगने वालों के अचानक वाहनों के सामने आने से सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। इसके अलावा ऐसी गतिविधियों की आड़ में आपराधिक तत्वों के सक्रिय होने की संभावना भी रहती है, जिससे कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

पुलिस ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर
अभियान को सफल बनाने के लिए पंचकूला पुलिस ने आम नागरिकों से सहयोग की अपील की है। पुलिस ने 8146630022 हेल्पलाइन नंबर जारी करते हुए कहा है कि यदि किसी भी व्यक्ति को सड़क किनारे, चौराहे या अन्य सार्वजनिक स्थान पर कोई भीख मांगता दिखाई दे अथवा बच्चों से जबरन भीख मंगवाने की सूचना मिले तो तत्काल इस नंबर पर जानकारी दें। सूचना मिलने पर पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई करेगी।
पुलिस प्रशासन का मानना है कि जनसहयोग और सख्त निगरानी के माध्यम से पंचकूला को भिक्षावृत्ति की समस्या से मुक्त कर एक सुरक्षित, संवेदनशील और व्यवस्थित शहर बनाया जा सकता है।

सिटी ब्यूटीफुल को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने के दावे सवालों के घेरे में
चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा “सिटी ब्यूटीफुल” को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने के किए जा रहे दावे जमीनी हकीकत से मेल खाते नजर नहीं आ रहे हैं। शहर के अधिकांश प्रमुख ट्रैफिक सिग्नलों और चौक-चौराहों पर आज भी महिलाओं, बुजुर्गों और छोटे बच्चों द्वारा खुलेआम भीख मांगते देखा जा सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी के बावजूद कई स्थानों पर भिक्षावृत्ति का सिलसिला लगातार जारी है। सूत्रों के अनुसार सुबह के समय पड़ोसी क्षेत्र मोहाली से ऑटो और टेम्पो के माध्यम से कई लोगों, विशेषकर बच्चों के साथ, चंडीगढ़ के विभिन्न ट्रैफिक सिग्नलों पर छोड़ा जाता है और शाम होने पर उन्हें वापस ले जाया जाता है।
शहरवासियों का आरोप है कि कई बार पुलिस और संबंधित एजेंसियां इन्हें मौके से हटाती तो हैं, लेकिन कुछ समय बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है। ऐसे में भिक्षावृत्ति पर स्थायी रोक लगाने के प्रयास प्रभावी साबित नहीं हो पा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल अभियान चलाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि इसके पीछे सक्रिय गिरोहों की पहचान, बच्चों के शोषण पर सख्त कार्रवाई और प्रभावी पुनर्वास व्यवस्था सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।
गौरतलब है कि भिक्षावृत्ति की रोकथाम और जरूरतमंद लोगों के पुनर्वास के लिए प्रशासन द्वारा विभिन्न विभागों और सामाजिक संस्थाओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है, लेकिन शहर की सड़कों पर दिखाई देने वाली स्थिति इन प्रयासों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर रही है। ऐसे में प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने चुनौती यह है कि वे दावों को धरातल पर उतारकर चंडीगढ़ को वास्तव में भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने की दिशा में ठोस परिणाम दिखाएं।

RAMESH GOYAT
Author: RAMESH GOYAT

With over 20 years of experience in Hindi journalism, Ramesh Goyat has served as District Bureau Chief in Kaithal and worked with the Haryana , Punjab , HP and UT Bureau in Chandigarh. Coming from a freedom fighter family, he is known for his fast, accurate, and credible reporting. Through Babugiri Hindi, he aims to deliver impartial and fact-based news to readers.

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