DC समेत वरिष्ठ अधिकारियों की गाड़ियों पर बहुरंगी बीकन लाइट को लेकर उठे सवाल
बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
चंडीगढ़, 16 जून। देशभर में वीआईपी संस्कृति पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2017 में लालबत्ती व्यवस्था समाप्त किए जाने के नौ वर्ष बाद भी हरियाणा में कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की सरकारी गाड़ियों पर बहुरंगी (लाल-नीली-सफेद) बीकन लाइट लगाए जाने का मामला सामने आया है। इस मुद्दे को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अधिवक्ता हेमंत कुमार ने राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री और हरियाणा सरकार के शीर्ष अधिकारियों तक विस्तृत शिकायत भेजकर कार्रवाई की मांग की है।
अधिवक्ता का आरोप है कि हरियाणा के विभिन्न जिलों में तैनात उपायुक्त (डीसी), अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी), उपमंडलाधीश (एसडीएम) तथा अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अपनी आधिकारिक गाड़ियों पर बहुरंगी बीकन लाइट का उपयोग कर रहे हैं, जबकि वर्तमान केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के तहत उन्हें ऐसी कोई अनुमति प्राप्त नहीं है।
2017 में खत्म कर दी गई थी लालबत्ती संस्कृति
केंद्र सरकार ने 1 मई 2017 से लागू केंद्रीय मोटरयान (सातवां संशोधन) नियम, 2017 के माध्यम से देशभर में वीआईपी लालबत्ती संस्कृति को समाप्त कर दिया था। इसके तहत मोटर वाहन नियमों के नियम-108 में संशोधन कर लाल, नीली अथवा बहुरंगी बीकन लाइट के उपयोग को बेहद सीमित श्रेणियों तक सीमित कर दिया गया।
नियमों के अनुसार केवल अग्निशमन सेवाओं, पुलिस, रक्षा एवं अर्द्धसैनिक बलों द्वारा कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाले वाहनों तथा प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदा प्रबंधन से जुड़े वाहनों को ही बहुरंगी बीकन लाइट के उपयोग की अनुमति है। इतना ही नहीं, इन वाहनों को भी बीकन लाइट का उपयोग केवल ड्यूटी के दौरान ही करने का अधिकार है।
डीसी, एडीसी और एसडीएम को नहीं है वैधानिक अधिकार
हेमंत कुमार ने अपने अभ्यावेदन में स्पष्ट किया है कि भले ही उपायुक्त, अतिरिक्त उपायुक्त और एसडीएम जैसे अधिकारी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 के तहत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की शक्तियां रखते हों, लेकिन यह अधिकार उन्हें अपनी सरकारी गाड़ियों पर बहुरंगी बीकन लाइट लगाने की अनुमति नहीं देता।
उन्होंने कहा कि विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट अथवा अन्य प्रशासनिक अधिकारियों पर भी यही नियम लागू होते हैं और किसी भी अधिकारी को केवल पद के आधार पर बीकन लाइट उपयोग करने का अधिकार प्राप्त नहीं है।
नौ वर्षों से सार्वजनिक नहीं हुई अधिकृत वाहनों की सूची
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू उठाते हुए अधिवक्ता ने बताया कि केंद्र सरकार की 1 मई 2017 की अधिसूचना के अनुसार प्रत्येक राज्य का परिवहन विभाग हर वर्ष सार्वजनिक नोटिस जारी कर यह जानकारी देगा कि किन-किन अधिकृत आपातकालीन वाहनों को बहुरंगी बीकन लाइट प्रयोग करने की अनुमति दी गई है।
इसके अलावा ऐसे अधिकृत वाहनों पर परिवहन विभाग द्वारा जारी होलोग्रामयुक्त सुरक्षा स्टिकर प्रदर्शित करना भी अनिवार्य है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि हरियाणा परिवहन विभाग ने पिछले नौ वर्षों के दौरान न तो ऐसी कोई वार्षिक सार्वजनिक सूची जारी की और न ही अधिकृत वाहनों का विवरण सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कराया।
राष्ट्रपति से लेकर मुख्यमंत्री तक भेजा गया ज्ञापन
इस संबंध में भेजे गए अभ्यावेदन की प्रतियां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, हरियाणा के राज्यपाल आशीम घोष, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, परिवहन मंत्री अनिल विज, परिवहन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजा शेखर वुन्द्रू, ट्रांसपोर्ट कमिश्नर अतुल कुमार तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई हैं।
अधिवक्ता ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि प्रशासनिक अधिकारियों की गाड़ियों पर बहुरंगी बीकन लाइट किस वैधानिक आधार पर लगाई जा रही हैं और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो तत्काल प्रभाव से उन्हें हटाया जाए।
बड़ा सवाल: क्या नियम सभी के लिए समान हैं?
यह मामला एक बार फिर उस बहस को जन्म देता है कि जब केंद्र सरकार ने वीआईपी संस्कृति को समाप्त करने के लिए लालबत्ती व्यवस्था खत्म कर दी थी, तो फिर प्रशासनिक अधिकारियों की गाड़ियों पर बहुरंगी बीकन लाइट का उपयोग किस आधार पर जारी है। यदि यह उपयोग नियमों के अनुरूप नहीं है, तो यह कानून के समान अनुपालन और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन जाता है।
अब सबकी निगाहें केंद्र और हरियाणा सरकार पर टिकी हैं कि क्या इस शिकायत के बाद मामले की जांच होगी, अधिकृत वाहनों की सूची सार्वजनिक की जाएगी और कथित रूप से नियमों के विपरीत चल रही इस व्यवस्था पर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।















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