घुड़सवार पुलिस पेट्रोलिंग से मजबूत होगी सुरक्षा व्यवस्था, ईंधन की बचत और पर्यावरण संरक्षण को भी मिलेगा बढ़ावा
रमेश गोयत
पंचकूला, 19 जून: पंचकूला में कानून व्यवस्था को और अधिक मजबूत, आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में पुलिस विभाग ने एक नई पहल शुरू की है। अब शहर की सड़कों के साथ-साथ जिले के पहाड़ी क्षेत्रों, गांवों, सुनसान इलाकों और संकरी गलियों में भी पंचकूला पुलिस के प्रशिक्षित घोड़े सुरक्षा का जिम्मा संभालेंगे। वाहन आधारित पेट्रोलिंग और पैदल गश्त के साथ अब घुड़सवार पुलिस पेट्रोलिंग को भी पुलिस व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया है।
पंचकूला पुलिस की इस अनूठी पहल का उद्देश्य उन क्षेत्रों तक पुलिस की पहुंच बढ़ाना है, जहां सामान्य वाहनों से पहुंचना मुश्किल होता है। घुड़सवार पुलिस न केवल अपराध नियंत्रण में मदद करेगी, बल्कि संवेदनशील और दूरदराज क्षेत्रों में पुलिस की मौजूदगी को भी प्रभावी बनाएगी।

हाल ही में पंचकूला पुलिस की सेक्टर-21 पुलिस चौकी टीम ने चौकी प्रभारी दीदार सिंह के नेतृत्व में घोड़ों के माध्यम से विशेष गश्त अभियान चलाया। इस दौरान पुलिसकर्मियों ने सार्वजनिक स्थानों, गलियों, खुले क्षेत्रों और संवेदनशील इलाकों में निगरानी की। पुलिस टीम ने स्थानीय लोगों से बातचीत कर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर फीडबैक भी लिया। घुड़सवार पुलिस को देखकर लोगों में उत्सुकता और सुरक्षा का विश्वास देखने को मिला।
ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में मिलेगी बेहतर निगरानी
प्रेस वार्ता के दौरान एसीपी विक्रम नेहरा ने बताया कि वर्तमान में पंचकूला पुलिस के पास घोड़ों का विशेष दस्ता उपलब्ध है, जिसे सेक्टर-21 पुलिस चौकी में रखा गया है। इन घोड़ों का इस्तेमाल अब विशेष परिस्थितियों में किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि घुड़सवार पुलिस को ग्रामीण इलाकों, भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों, सुनसान स्थानों, संकरी गलियों और जिले के पहाड़ी व उबड़-खाबड़ क्षेत्रों में गश्त के लिए लगाया जाएगा। ऐसे क्षेत्रों में जहां पुलिस वाहन आसानी से नहीं पहुंच पाते, वहां घोड़े प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।
एसीपी ने बताया कि इस व्यवस्था के लिए प्रशिक्षित घुड़सवार पुलिसकर्मियों को जिम्मेदारी दी गई है। शुरुआती स्तर पर इस मॉडल के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं और आने वाले समय में इसके प्रभाव का मूल्यांकन किया जाएगा।
अपराधियों पर पड़ेगा मनोवैज्ञानिक प्रभाव
डीसीपी पंचकूला सृष्टि गुप्ता ने कहा कि घुड़सवार पुलिस पेट्रोलिंग केवल गश्त का नया तरीका नहीं है, बल्कि यह पुलिसिंग को अधिक प्रभावी और जनसंपर्क आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि घोड़े से होने वाली पेट्रोलिंग से ईंधन की खपत कम होगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा पुलिस की अलग और प्रभावी मौजूदगी से असामाजिक तत्वों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनेगा और आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना मजबूत होगी।
सफल रहा मॉडल तो बढ़ाया जाएगा दायरा
डीसीपी ने बताया कि फिलहाल इस पहल को ट्रायल के तौर पर शुरू किया गया है। इसके परिणामों और उपयोगिता का विस्तृत आकलन किया जाएगा। यदि यह मॉडल सफल रहता है तो पंचकूला पुलिस की ओर से अतिरिक्त घोड़ों की मांग भेजकर इस व्यवस्था का विस्तार किया जाएगा।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि बदलते समय में अपराध नियंत्रण के लिए आधुनिक तकनीक के साथ-साथ पारंपरिक और प्रभावी तरीकों का इस्तेमाल भी जरूरी है। घुड़सवार पुलिस व्यवस्था इसी सोच का हिस्सा है, जो पंचकूला में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने में मदद करेगी।













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