अब म्यूटेशन के लिए एस्टेट ऑफिस के चक्कर नहीं, पंजीकरण के बाद अपने आप शुरू होती है प्रक्रिया; करीब 1,800 मामलों का सात दिन के भीतर निपटारा
रमेश गोयत
चंडीगढ़, 11 अगस्त 2026। चंडीगढ़ प्रशासन के एस्टेट ऑफिस की ऑटो-म्यूटेशन प्रणाली ने अपने संचालन का एक वर्ष पूरा कर लिया है। 7 जुलाई 2025 को शुरू की गई इस डिजिटल व्यवस्था को संपत्ति संबंधी सेवाओं में एक महत्वपूर्ण ई-गवर्नेंस सुधार के रूप में देखा जा रहा है। इस व्यवस्था ने संपत्ति के पंजीकरण के बाद म्यूटेशन के लिए अलग से आवेदन करने की पारंपरिक प्रक्रिया को लगभग समाप्त कर दिया है। अब संपत्ति विलेख के पंजीकरण के बाद म्यूटेशन की प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से स्वतः आगे बढ़ती है।
इस प्रणाली का सबसे बड़ा लाभ यह है कि संपत्ति मालिक को म्यूटेशन के लिए अलग से एस्टेट ऑफिस जाने, आवेदन जमा करने या दस्तावेजों की प्रतियां दोबारा देने की आवश्यकता नहीं रहती। सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में संपत्ति विलेख का पंजीकरण होते ही संबंधित जानकारी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से एस्टेट ऑफिस तक पहुंच जाती है। इसके बाद बैकएंड पर म्यूटेशन की प्रक्रिया शुरू होकर डिजिटल तरीके से पूरी की जाती है।
पंजीकरण के बाद स्वतः शुरू होती है म्यूटेशन प्रक्रिया
पहले संपत्ति खरीदने या हस्तांतरण के बाद मालिक को म्यूटेशन के लिए अलग प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। इसके लिए आवेदन, निर्धारित फॉर्म और संबंधित दस्तावेज जमा करने पड़ते थे तथा कई मामलों में आवेदक को एस्टेट ऑफिस के चक्कर भी लगाने पड़ते थे।
ऑटो-म्यूटेशन प्रणाली ने इस प्रक्रिया को बदल दिया है। संपत्ति के पंजीकरण से जुड़ा डेटा अब इलेक्ट्रॉनिक रूप से एस्टेट ऑफिस तक पहुंचता है और उपलब्ध जानकारी के आधार पर म्यूटेशन प्रक्रिया बैकएंड में आगे बढ़ती है।
इससे नागरिकों के समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है। साथ ही संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड को अपडेट करने की प्रक्रिया भी पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित और तकनीक आधारित हुई है।
पूरी प्रक्रिया पेपरलेस और फेसलेस
एस्टेट ऑफिस की नई व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसका पेपरलेस और फेसलेस होना है। म्यूटेशन के लिए अलग से आवेदन, फॉर्म और दस्तावेज बार-बार जमा करने की जरूरत नहीं है। प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संचालित होने के कारण नागरिक और विभाग के बीच प्रत्यक्ष संपर्क भी काफी कम हुआ है।
इसका सीधा फायदा उन संपत्ति मालिकों को मिल रहा है जिन्हें पहले म्यूटेशन के लिए कार्यालय में जाकर प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती थी। अब पंजीकरण के बाद उन्हें केवल डिजिटल माध्यम से प्रक्रिया की स्थिति की जानकारी मिलती रहती है।
लीजहोल्ड का दो और फ्रीहोल्ड का सात कार्य दिवस में म्यूटेशन
एस्टेट ऑफिस द्वारा निर्धारित समय-सीमा के अनुसार लीजहोल्ड संपत्तियों का म्यूटेशन दो कार्य दिवसों में, जबकि फ्रीहोल्ड संपत्तियों का म्यूटेशन सात कार्य दिवसों में किया जाता है।
इस समय-सीमा ने संपत्ति रिकॉर्ड अपडेट करने की प्रक्रिया को अधिक समयबद्ध बनाने में मदद की है। इसके साथ ही एसएमएस आधारित ट्रैकिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे आवेदक अपनी प्रक्रिया की स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकता है।
एक वर्ष में 1,829 मामलों की प्राप्ति
7 जुलाई 2025 को ऑटो-म्यूटेशन प्रणाली शुरू होने के बाद से अब तक कुल 1,829 म्यूटेशन मामलों की प्राप्ति हुई है। इनमें से करीब 1,800 मामलों का पंजीकरण के सात दिनों के भीतर निपटारा किया जा चुका है।
वर्तमान में केवल 29 मामले प्रक्रियाधीन हैं और इन्हें निर्धारित समय-सीमा के भीतर निपटाने की प्रक्रिया जारी है। खास बात यह है कि इन मामलों के लिए भी आवेदकों को एस्टेट ऑफिस में किसी भौतिक दौरे की आवश्यकता नहीं पड़ी।
यह आंकड़े बताते हैं कि नई प्रणाली ने संपत्ति संबंधी म्यूटेशन प्रक्रिया को बड़े स्तर पर डिजिटल और समयबद्ध बनाने में मदद की है।
एजेंटों और बिचौलियों पर निर्भरता कम
ऑटो-म्यूटेशन प्रणाली का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू एजेंटों और बिचौलियों पर निर्भरता को कम करना है। जब किसी सरकारी सेवा के लिए नागरिक को बार-बार कार्यालय जाना पड़ता है या अलग से आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी होती है, तो अक्सर उसे प्रक्रिया समझने अथवा दस्तावेज जमा कराने के लिए किसी मध्यस्थ की मदद लेनी पड़ती है।
डिजिटल और स्वतः संचालित व्यवस्था के कारण म्यूटेशन प्रक्रिया सीधे
पंजीकरण प्रणाली से जुड़ गई है। इससे अनावश्यक मानवीय संपर्क कम हुआ है और नागरिक सीधे डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से अपनी संपत्ति संबंधी सेवा प्राप्त कर सकते हैं।
प्रशासनिक विवेकाधिकार और कागजी कार्रवाई में कमी
प्रशासन का कहना है कि ऑटो-म्यूटेशन व्यवस्था ने नागरिकों के प्रत्यक्ष संपर्क, कागजी कार्रवाई और प्रक्रियागत देरी को काफी हद तक कम किया है। इसके साथ ही प्रशासनिक विवेकाधिकार के स्तर को भी कम करने में मदद मिली है।
म्यूटेशन प्रक्रिया का डिजिटल होना संपत्ति स्वामित्व से जुड़े रिकॉर्ड को समय पर अपडेट करने में भी सहायक है। इससे भविष्य में संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड की जांच और विभिन्न सेवाओं के लिए उपलब्ध डेटा को अधिक व्यवस्थित रखने में मदद मिल सकती है।
सुशासन और आसान लिविंग की दिशा में कदम
चंडीगढ़ प्रशासन लगातार सरकारी सेवाओं को डिजिटल, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने पर जोर दे रहा है। एस्टेट ऑफिस की ऑटो-म्यूटेशन प्रणाली इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
इस व्यवस्था में नागरिक को सेवा लेने के लिए कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं है, आवेदन की अलग प्रक्रिया समाप्त की गई है और एसएमएस के माध्यम से प्रक्रिया की स्थिति की जानकारी उपलब्ध कराई जाती है। इससे सरकारी सेवा की पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने का प्रयास किया गया है।
एक वर्ष के दौरान प्राप्त 1,829 मामलों में से करीब 1,800 मामलों का सात दिनों के भीतर निपटारा होना इस डिजिटल व्यवस्था के प्रभाव को दर्शाता है। वहीं, केवल 29 मामले प्रक्रियाधीन हैं और इन्हें भी निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने की प्रक्रिया जारी है।
संपत्ति सेवाओं के डिजिटल भविष्य की ओर चंडीगढ़
निशांत कुमार यादव जिला उपायुक्त एवम सम्पदा अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि एस्टेट ऑफिस की ऑटो-म्यूटेशन प्रणाली केवल म्यूटेशन की प्रक्रिया को आसान बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी सेवाओं को नागरिकों के लिए अधिक सरल बनाने की दिशा में बदलाव का उदाहरण है। पंजीकरण से लेकर म्यूटेशन तक डेटा का डिजिटल प्रवाह होने से नागरिकों को दोहराई जाने वाली प्रक्रियाओं से राहत मिली है।
चंडीगढ़ प्रशासन के लिए यह पहल फेसलेस, पेपरलेस और पारदर्शी शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इसके माध्यम से प्रशासन ने यह संदेश भी दिया है कि तकनीक का इस्तेमाल केवल सरकारी रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने के लिए नहीं, बल्कि नागरिकों के समय, श्रम और अनावश्यक कार्यालयी संपर्क को कम करने के लिए भी किया जा सकता है।
ऑटो-म्यूटेशन प्रणाली के एक वर्ष के आंकड़े इस बात की ओर संकेत करते हैं कि आने वाले समय में संपत्ति संबंधी अन्य सेवाओं को भी इसी तरह डिजिटल और नागरिक-केंद्रित बनाया जा सकता है। इससे चंडीगढ़ में ईजी ऑफ लिविंग को बढ़ावा देने और सुशासन की व्यवस्था को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।













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