अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश
रमेश गोयत
चंडीगढ़, 19 अगस्त 2026: चंडीगढ़ में 18 अगस्त को हुई भारी बारिश के बाद शहर में जलभराव, गिरे पेड़ों, क्षतिग्रस्त सड़कों और यातायात संबंधी समस्याओं का जायजा लेने के लिए पंजाब के राज्यपाल एवं यू.टी. चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने बुधवार को शहर के विभिन्न हिस्सों का व्यापक जमीनी निरीक्षण किया। प्रशासक ने प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर मौके की स्थिति देखी और संबंधित अधिकारियों को समस्याओं के तत्काल समाधान के निर्देश दिए।

सीटीयू बस से लिया शहर का जायजा
प्रशासक ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा सीटीयू बस से किया। उनके साथ चंडीगढ़ के मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद, पंजाब के राज्यपाल के अतिरिक्त मुख्य सचिव वी.पी. सिंह, गृह सचिव मंदीप सिंह बराड़ तथा वित्त सचिव दीप्रवा लाकरा सहित प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
निरीक्षण के दौरान प्रशासक ने शहर के विभिन्न हिस्सों में पहुंचकर भारी बारिश के बाद उत्पन्न परिस्थितियों को देखा और अधिकारियों से मौके पर ही जानकारी हासिल की।

सेक्टर-17 से मनीमाजरा और बापूधाम तक निरीक्षण
गुलाब चंद कटारिया ने सेक्टर-17, सेक्टर-22, सेक्टर-43, सेक्टर-46, सेक्टर-47, जगतपुरा, ट्रिब्यून चौक, शास्त्री नगर-मनीमाजरा, बापूधाम तथा सेक्टर-26 मंडी क्षेत्र समेत शहर के कई हिस्सों का दौरा किया।
उन्होंने इन क्षेत्रों में जलभराव, सड़क एवं यातायात की स्थिति, गिरे हुए पेड़ों और शाखाओं तथा बारिश के कारण पैदा हुए अन्य अवरोधों की समीक्षा की। अधिकारियों ने उन्हें विभिन्न स्थानों पर बारिश के बाद सामने आई समस्याओं और अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी दी।
जलभराव और गिरे पेड़ों को तुरंत हटाने के निर्देश
प्रशासक ने नगर निगम और इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि जलभराव वाले क्षेत्रों में पानी की निकासी सुनिश्चित करने के साथ-साथ गिरे हुए पेड़ों और शाखाओं को तत्काल हटाया जाए। उन्होंने क्षतिग्रस्त सड़कों और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं की आवश्यक मरम्मत भी प्राथमिकता के आधार पर कराने को कहा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बारिश के बाद प्रभावित क्षेत्रों की सफाई और बहाली के कार्य में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करते हुए लोगों को जल्द से जल्द राहत उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि चंडीगढ़ के लोगों की सुरक्षा, सुविधा और कल्याण प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों और एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे आपसी तालमेल के साथ काम करें और बारिश के बाद सामने आने वाली किसी भी समस्या पर त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करें।
उन्होंने अधिकारियों से यह भी कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति सामान्य होने तक निगरानी बनाए रखी जाए और जहां भी नागरिकों को परेशानी हो रही है, वहां तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाएं।
भारी बारिश से कई इलाकों में हुआ था जलभराव
गौरतलब है कि 18 अगस्त को चंडीगढ़ में भारी बारिश हुई थी। तेज बारिश के कारण शहर के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी, जबकि कुछ प्रमुख मार्गों पर यातायात भी प्रभावित हुआ। कई स्थानों पर पेड़ और शाखाएं गिरने से भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
प्रशासक का यह दौरा बारिश के बाद शहर की वास्तविक स्थिति का मौके पर आकलन करने और संबंधित विभागों की ओर से समयबद्ध तरीके से राहत, सफाई, मरम्मत एवं बहाली कार्य सुनिश्चित कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
चंडीगढ़ में धंसती जमीन को लेकर चिंता, समय रहते वैज्ञानिक जांच की जरूरत
सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन ने प्रशासन से पूरे शहर का भू-तकनीकी सर्वेक्षण कराने की मांग की
चंडीगढ़। चंडीगढ़ को देश के सबसे सुनियोजित और आधुनिक शहरों में गिना जाता है। चौड़ी सड़कें, खुले स्थान, हरित पट्टियां और वैज्ञानिक ढंग से विकसित बुनियादी ढांचा इसकी पहचान हैं। ऐसे में शहर के विभिन्न हिस्सों में सड़क, फुटपाथ, पार्किंग क्षेत्र और अन्य स्थानों पर जमीन धंसने अथवा नीचे बैठने की घटनाएं गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है
सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन, चंडीगढ़ ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन से समय रहते व्यापक वैज्ञानिक जांच कराने का आग्रह किया है। एसोसिएशन का कहना है कि जमीन धंसने की घटनाओं को केवल अलग-अलग स्थानों की सड़क मरम्मत की समस्या मानकर नहीं देखा जाना चाहिए। इसके पीछे कोई व्यापक भू-वैज्ञानिक, जल-निकासी या भूमिगत जल रिसाव से जुड़ा कारण है या नहीं, इसकी विशेषज्ञों से जांच कराना जरूरी है।
भूमिगत जल रिसाव भी हो सकता है संभावित कारण
एसोसिएशन के अनुसार, जमीन धंसने का एक संभावित कारण भूमिगत जल का रिसाव हो सकता है। यदि नगर निगम की जलापूर्ति व्यवस्था की पाइपलाइनों में कहीं बड़े स्तर पर रिसाव हो रहा है और पानी लगातार जमीन के भीतर जा रहा है, तो लंबे समय में मिट्टी के कणों के खिसकने, भूमिगत खाली स्थान बनने और जमीन की भार सहने की क्षमता प्रभावित होने की संभावना हो सकती है।
हालांकि, एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक संभावित कारण है और इसे जांच के बिना निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। वास्तविक कारणों का पता वैज्ञानिक और व्यवस्थित जांच के बाद ही लगाया जा सकता है।
पूरे शहर का मिट्टी परीक्षण कराने का सुझाव
एसोसिएशन ने प्रशासन से चंडीगढ़ के विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में मिट्टी परीक्षण और भू-तकनीकी सर्वेक्षण कराने की मांग की है। इसके तहत अलग-अलग क्षेत्रों से मिट्टी के नमूने लेकर उनकी वैज्ञानिक जांच की जाए, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन स्थानों की जमीन कमजोर हो रही है, कहां भूमिगत जल रिसाव की आशंका है और किन क्षेत्रों में मिट्टी की संरचना में किसी तरह का बदलाव आया है।
एसोसिएशन का कहना है कि यह सर्वेक्षण केवल उन स्थानों तक सीमित नहीं होना चाहिए जहां जमीन पहले ही धंस चुकी है। पूरे शहर का भूमि संवेदनशीलता मानचित्र तैयार किया जाना चाहिए। इसमें कमजोर मिट्टी वाले क्षेत्र, भूमिगत जल रिसाव की संभावित जगहें, पुरानी अथवा क्षतिग्रस्त पाइपलाइन, सीवर लाइन, वर्षा जल निकासी व्यवस्था तथा बार-बार जमीन धंसने वाले स्थानों को चिन्हित किया जाना चाहिए।
जलापूर्ति पाइपलाइनों का रिसाव जांच अभियान हो
एसोसिएशन ने नगर निगम की पेयजल पाइपलाइनों की व्यापक रिसाव जांच कराने का भी सुझाव दिया है। यदि पाइपलाइनों से बड़ी मात्रा में पानी रिसकर नष्ट हो रहा है तो यह केवल जल संरक्षण का मामला नहीं है, बल्कि सड़क, सार्वजनिक ढांचे और नागरिकों की सुरक्षा से भी सीधे जुड़ा विषय है।
एसोसिएशन के मुताबिक, किसी स्थान पर जमीन धंसने के बाद केवल ऊपर से मिट्टी डालकर या सड़क की सतही मरम्मत कर समस्या का समाधान मान लेना उचित नहीं है। पहले यह पता लगाना जरूरी है कि जमीन के नीचे वास्तविक स्थिति क्या है। ऊपरी मरम्मत के साथ भूमिगत कारणों की जांच भी जरूरी है।
संयुक्त उच्चस्तरीय टीम बनाने की मांग
सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन ने सुझाव दिया है कि चंडीगढ़ प्रशासन, नगर निगम तथा संबंधित अभियंताओं और भू-तकनीकी विशेषज्ञों की एक संयुक्त उच्चस्तरीय टीम गठित की जाए। यह टीम चरणबद्ध तरीके से पूरे शहर का सर्वेक्षण करे और संवेदनशील क्षेत्रों की प्राथमिकता सूची तैयार करे।
एसोसिएशन का कहना है कि इस तरह की जांच में शुरुआती स्तर पर खर्च जरूर आएगा, लेकिन भविष्य में किसी बड़े हादसे अथवा व्यापक बुनियादी ढांचे के नुकसान के बाद होने वाला खर्च इससे कहीं अधिक हो सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात नागरिकों की सुरक्षा है।
‘पहले जांच, फिर मरम्मत’ के सिद्धांत पर हो कार्रवाई
एसोसिएशन ने कहा कि चंडीगढ़ जैसे योजनाबद्ध शहर में जमीन का बार-बार धंसना केवल सामान्य रखरखाव की समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह शहर की भूमिगत संरचना, जलापूर्ति व्यवस्था और वर्षा जल निकासी प्रणाली की स्थिति से भी जुड़ा महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है।
एसोसिएशन ने प्रशासन से आग्रह किया कि इस मामले में ‘पहले जांच, फिर मरम्मत’ के सिद्धांत पर कार्रवाई की जाए। यदि किसी क्षेत्र की भूमि कमजोर पाई जाती है तो समय रहते उसे मजबूत किया जा सकता है। पाइपलाइन में रिसाव मिलने पर उसे रोका जा सकता है और यदि किसी गंभीर भू-वैज्ञानिक समस्या के संकेत मिलते हैं तो उसका समाधान भी समय रहते शुरू किया जा सकता है।
सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन ने कहा कि भूमिगत समस्याएं सामान्य रूप से दिखाई नहीं देतीं, लेकिन यदि समय रहते उनका पता नहीं लगाया गया तो उनके परिणाम गंभीर और अप्रत्याशित हो सकते हैं। इसलिए प्रशासन को जमीन धंसने की घटनाओं को चेतावनी के रूप में लेते हुए तत्काल वैज्ञानिक और ठोस कार्रवाई करनी चाहिए।













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