नगर निगम एजेंडा पास कराने के नाम पर कथित लेन-देन के आरोप; AAP ने DGP से मांगी निष्पक्ष जांच, वायरल ऑडियो की फॉरेंसिक जांच की मांग
बाबूगिरी हिंदी न्यूज़
चंडीगढ़। नगर निगम की राजनीति में इन दिनों 25 लाख और 80 लाख रुपये की कथित लेन-देन की चर्चाओं ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। मामला सिर्फ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सेक्टर-40 में एक व्यावसायिक इमारत के बाहर हुए कथित विवाद और एक महिला पार्षद के पति के साथ मारपीट के बाद यह प्रकरण सोशल मीडिया पर भी तेजी से फैल गया है।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि पूरे प्रकरण में दो अलग-अलग रकम—25 लाख और 80 लाख रुपये—का जिक्र सामने आ रहा है। आम आदमी पार्टी ने अब इस मामले को लेकर चंडीगढ़ के डीजीपी को शिकायत देकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। पार्टी ने 25 लाख रुपये से जुड़े विवाद के साथ-साथ 80 लाख रुपये के कथित लेन-देन से संबंधित वायरल ऑडियो की मूल रिकॉर्डिंग सुरक्षित कर उसकी फॉरेंसिक जांच कराने की मांग भी की है।
25 लाख की कहानी में क्या है विवाद?
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, सेक्टर-40 में एक व्यावसायिक इमारत के बाहर हुए विवाद में मनीमाजरा निवासी आईटी प्रोफेशनल द्वारा कथित तौर पर 25 लाख रुपये वापस मांगे जाने की बात सामने आई है। AAP की शिकायत के मुताबिक यह रकम नगर निगम में किसी एजेंडे को मंजूर कराने के सिलसिले में दिए जाने का आरोप है।
मामला उस समय और संवेदनशील हो गया जब AAP ने दावा किया कि विवाद के दौरान पार्षद के पति की ओर से कथित तौर पर 25 लाख रुपये में से 5 लाख रुपये को अपना हिस्सा बताए जाने का जिक्र सामने आया। हालांकि, यह दावा राजनीतिक शिकायत और आरोपों का हिस्सा है तथा इसकी स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
यही वह बिंदु है जिसने पूरे मामले को साधारण व्यक्तिगत विवाद से निकालकर नगर निगम की राजनीति के केंद्र में ला दिया है।
और फिर सामने आया 80 लाख का वायरल ऑडियो
25 लाख रुपये के विवाद के बीच 80 लाख रुपये के कथित लेन-देन से जुड़ा एक ऑडियो भी चर्चा में आ गया। AAP ने डीजीपी को दी शिकायत में इस ऑडियो का भी उल्लेख करते हुए इसकी मूल रिकॉर्डिंग कब्जे में लेकर फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की है।
आम आदमी पार्टी का कहना है कि ऑडियो में कथित पैसों के लेन-देन के अलावा मार्केट एसोसिएशन, मारपीट और पुलिस अधिकारियों से संबंधित कथित बातचीत जैसे पहलुओं की भी जांच होनी चाहिए।
यानी इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 80 लाख और 25 लाख रुपये की दोनों चर्चाएं एक ही नेटवर्क या घटनाक्रम से जुड़ी हैं, अथवा ये दो अलग-अलग मामले हैं?
इसका जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकता है।
पार्षद के पति की पिटाई ने बदल दिया पूरा नैरेटिव
पूरे विवाद में सबसे ज्यादा चर्चा महिला पार्षद के पति के साथ कथित मारपीट की हो रही है। घटना का जिक्र सोशल मीडिया पर तेजी से हुआ और इसके बाद लोगों ने इसे 25 लाख रुपये के विवाद से जोड़ना शुरू कर दिया।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण सवाल है—मारपीट की असली वजह क्या थी?
क्या यह कथित पैसों की वापसी को लेकर हुआ विवाद था?
क्या इसके पीछे नगर निगम के किसी एजेंडे से जुड़ा मामला था?
या फिर व्यक्तिगत विवाद को बाद में राजनीतिक रंग मिल गया?
अभी इन सवालों का कोई अंतिम आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है।
AAP ने सीधे DGP के दरवाजे पर पहुंचाया मामला
मामले को गंभीरता से लेते हुए AAP नेताओं ने डीजीपी से शिकायत कर एफआईआर और निष्पक्ष जांच की मांग की है। पार्टी ने डीजीपी की सीधी निगरानी में SIT गठित करने अथवा मामले को विजिलेंस या CBI को सौंपने का विकल्प भी सुझाया है।
शिकायत में केवल बयान दर्ज करने की बात नहीं कही गई, बल्कि पैसों के कथित ट्रेल, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बैंक खातों, CCTV फुटेज, मोबाइल टावर लोकेशन और वायरल ऑडियो जैसे डिजिटल एवं वित्तीय साक्ष्यों की जांच की मांग की गई है।
यही मांग इस मामले को राजनीतिक बयानबाजी से आगे ले जाती है। क्योंकि अगर जांच एजेंसियां वास्तव में पैसे के लेन-देन का कोई प्रमाण खोजती हैं, तो मामला काफी गंभीर हो सकता है।
कांग्रेस भी जांच की मांग को लेकर मैदान में
मामले में कांग्रेस ने भी उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई है। एक कांग्रेस नेता ने कथित लेन-देन के पूरे मनी ट्रेल, कॉल रिकॉर्ड और बैंक खातों की जांच की मांग की है। उन्होंने इस विवाद को नगर निगम और राजनीतिक व्यवस्था से जुड़े गंभीर सवालों के रूप में उठाया है।
इससे साफ है कि 80 लाख और 25 लाख का मामला अब केवल दो पक्षों के बीच विवाद नहीं रह गया है, बल्कि नगर निगम की राजनीति में विपक्ष के लिए भी बड़ा मुद्दा बन चुका है।
नगर निगम के एजेंडे तक पहुंचती है कहानी
इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू कथित तौर पर नगर निगम के एजेंडे को पास कराने के लिए पैसे के इस्तेमाल से जुड़ा आरोप है।
यदि जांच में यह साबित होता है कि किसी एजेंडे को पारित कराने के लिए वास्तव में पैसे का लेन-देन हुआ था, तो मामला बेहद गंभीर हो सकता है। लेकिन अभी तक उपलब्ध जानकारी में यह आरोप और राजनीतिक शिकायत के स्तर पर है। इसलिए किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने से पहले जांच के निष्कर्ष का इंतजार जरूरी है।
ऑफ द रिकॉर्ड सबसे बड़ा सवाल
चंडीगढ़ के राजनीतिक गलियारों में अब चर्चा इस बात की है कि आखिर 25 लाख रुपये की मांग, 5 लाख रुपये के कथित हिस्से, 80 लाख रुपये के वायरल ऑडियो और पार्षद के पति के साथ हुई मारपीट—इन सभी कड़ियों के बीच वास्तविक संबंध क्या है?
अगर ये सभी घटनाएं एक ही लेन-देन से जुड़ी निकलती हैं तो कहानी बहुत बड़ी हो सकती है। अगर ये अलग-अलग घटनाएं हैं, तो सोशल मीडिया ने संभवतः इन्हें एक ही विवाद के रूप में जोड़ दिया है।
फिलहाल 80 लाख और 25 लाख की रकम चंडीगढ़ की राजनीति में दो ऐसे आंकड़े बन चुके हैं, जिनके पीछे छिपी असली कहानी सामने आने का इंतजार है।
और अब असली परीक्षा पुलिस जांच, वायरल ऑडियो की फॉरेंसिक रिपोर्ट, CCTV फुटेज और कथित पैसों के ट्रेल की होगी। तब पता चलेगा कि सोशल मीडिया पर चल रही कहानी में कितना सच है और कितना राजनीतिक आरोप।














Total Users : 401019
Total views : 646877