पंचकूला: पंचकूला नगर निगम के मेयर का कार्यकाल समाप्त होने के बाद पूरी की गई नई वार्डबंदी ने स्थानीय राजनीति की दिशा और दशा दोनों बदल दी है। इस बार वार्डों का ऐसा संतुलन तैयार किया गया है, जिसे सियासी गलियारों में 9 बनाम 11 की बिसात कहा जा रहा है। यह वार्डबंदी इतनी लचीली मानी जा रही है कि बदलते राजनीतिक हालात में किसी भी दल के लिए निगम में सत्ता तक पहुंचने के कई रास्ते खुल सकते हैं। आखिर यह 9 बनाम 11 का गणित क्या है और इसके पीछे के समीकरण क्यों खास माने जा रहे हैं, आइए समझते हैं विस्तार से।
आरक्षण के बाद साफ हुई चुनावी तस्वीर, नए चेहरों की तलाश तेज
नगर निगम पंचकूला के आगामी चुनाव किस दिशा में जाएंगे, इसका अंदाजा अब वार्ड आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद लगने लगा है। आरक्षण सूची जारी होते ही संभावित उम्मीदवार अपने-अपने वार्डों में सक्रिय हो गए हैं।
हालांकि, नई वार्डबंदी ने कई मौजूदा पार्षदों को बड़ा झटका दिया है। ऐसे पार्षद, जो अब तक निगम में अहम भूमिका निभाते रहे हैं, उनके वार्ड आरक्षित हो जाने से दोबारा चुनाव लड़ने की संभावनाएं लगभग खत्म हो गई हैं। इससे राजनीतिक दलों के सामने नए और उपयुक्त चेहरों की तलाश एक बड़ी चुनौती बन गई है।
पंचकूला नगर निगम के कुल 20 वार्डों में से 9 वार्ड महिला आरक्षित, अनुसूचित जाति (एससी) या पिछड़ा वर्ग (बीसी) के लिए सुरक्षित किए गए हैं, जबकि 11 वार्ड सामान्य श्रेणी में रखे गए हैं, जहां महिला और पुरुष दोनों उम्मीदवार मैदान में उतर सकेंगे।
नई वार्डबंदी से इन पूर्व पार्षदों को लगा झटका
नई व्यवस्था के चलते भाजपा और कांग्रेस—दोनों दलों के तीन-तीन निवर्तमान पार्षद सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं।
वार्ड नंबर-1: भाजपा के निवर्तमान पार्षद नरेंद्र लुबाना का वार्ड महिला आरक्षित हो गया है। ऐसे में वे अपने किसी करीबी को आगे बढ़ाने की रणनीति अपना सकते हैं।
वार्ड नंबर-2: भाजपा पार्षद सुरेश कुमार वर्मा का वार्ड भी महिला आरक्षित कर दिया गया है।
वार्ड नंबर-16: भाजपा के निवर्तमान पार्षद राकेश कुमार का वार्ड अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित हुआ है।
कांग्रेस को भी कम नुकसान नहीं हुआ है।
वार्ड नंबर-15: कांग्रेस पार्षद गौतम प्रसाद का वार्ड महिला आरक्षित होने से असमंजस की स्थिति बन गई है।
वार्ड नंबर-17: निवर्तमान पार्षद अक्षयदीप चौधरी का वार्ड अनुसूचित जाति महिला आरक्षित हो गया है।
वार्ड नंबर-18: निवर्तमान पार्षद संदीप सिंह सोही का वार्ड पिछड़ा वर्ग-बी के लिए आरक्षित कर दिया गया है।
जहां पुराने चेहरों को राहत, वहां बदलाव भी दिखा लचीला
नई वार्डबंदी में कुछ ऐसे वार्ड भी हैं, जहां पुराने चेहरों के लिए राह आसान बनी हुई है।
पहले महिला आरक्षित रहे वार्ड नंबर-3 और 4 अब सामान्य श्रेणी में शामिल कर दिए गए हैं। यहां से भाजपा की महिला पार्षद रितू गोयल और सोनिया सूद निर्वाचित रही हैं।
वार्ड नंबर-5 की स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
सेक्टर-16, 17 और 18 को मिलाकर बने वार्ड नंबर-6 को सामान्य श्रेणी में रखा गया है।
पहले वार्ड नंबर-6 से बदलकर बने वार्ड नंबर-7 को इस बार भी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित रखा गया है।
वार्ड नंबर-8 को अनुसूचित जाति से हटाकर सामान्य श्रेणी में शामिल किया गया है।
इसके अलावा वार्ड नंबर-9 (हरेंद्र मलिक – भाजपा), वार्ड नंबर-10 (राजेश कुमार – जजपा) और वार्ड नंबर-11 (गुरमेल कौर – कांग्रेस) में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
वार्ड नंबर-13 से सुनील सिंगला (भाजपा) और वार्ड नंबर-14 से सुशील गर्ग (पहले जजपा, अब भाजपा) के वार्ड भी यथावत रखे गए हैं।
वहीं, वार्ड नंबर-12, जो पहले महिला आरक्षित था और जहां से ओमवती पूनिया (पहले निर्दलीय, वर्तमान में भाजपा) पार्षद रही हैं, अब सामान्य श्रेणी में आ गया है।
अब निगाहें नए चेहरों पर, चुनावी सरगर्मी चरम पर
आरक्षण सूची जारी होने के बाद जहां कई मौजूदा पार्षद और दावेदार अपनी रणनीति पर दोबारा मंथन कर रहे हैं, वहीं यह भी तय माना जा रहा है कि इस बार नगर निगम चुनाव में कई नए चेहरे उभरकर सामने आ सकते हैं।











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