इलेक्ट्रिकल विंग में इलेक्ट्रिशियन की नौकरी के नाम पर पैसे मांगने का आरोप, अगस्त 2025 की शिकायत पर छह महीने तक कार्रवाई का खुलासा नहीं; फरवरी 2026 में पीड़ित से ही जवाब मांगने का पत्र जारी
बाबूगिरी न्यूज़
चंडीगढ़, 17 अक्तूबर। चंडीगढ़ में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की भर्ती और वेतन भुगतान में कथित घोटाले को लेकर सीबीआई की रेड के बाद अब आउटसोर्सिंग कंपनियों की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच चंडीगढ़ प्रशासन के इलेक्ट्रिकल विंग में इलेक्ट्रिशियन की नौकरी दिलाने के नाम पर कथित रिश्वत मांगने का पुराना मामला भी सामने आया है। आरोप है कि पीड़ित ने अगस्त 2025 में सतर्कता विभाग को लिखित शिकायत देने के साथ ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सौंपी थी, लेकिन कार्रवाई करने के बजाय विभाग ने करीब छह महीने बाद फरवरी 2026 में शिकायतकर्ता से ही जवाब मांग लिया।
सवाल सीधा है—जब रिश्वत मांगने की शिकायत और कथित ऑडियो साक्ष्य मौजूद थे, तो सतर्कता विभाग ने अब तक क्या किया? क्या शिकायत की जांच हुई, या मामला सरकारी फाइलों में ही दबा रहा?

रिश्वत की शिकायत पर कार्रवाई कहां गई?
शिकायतकर्ता ओम, निवासी जींद, हरियाणा के अनुसार, चंडीगढ़ प्रशासन के इलेक्ट्रिकल विंग में इलेक्ट्रिशियन की भर्ती के लिए आउटसोर्सिंग एजेंसी से जुड़े एक व्यक्ति ने कथित तौर पर उससे पैसे मांगे थे। शिकायतकर्ता ने इस मामले को अगस्त 2025 में सतर्कता विभाग के समक्ष उठाया था। उसका दावा है कि शिकायत के समर्थन में ऑडियो रिकॉर्डिंग भी दी गई थी।
यदि शिकायत के साथ ऑडियो साक्ष्य सौंपे गए थे, तो यह जानना जरूरी है कि विभाग ने उनकी जांच क्यों नहीं कराई या जांच कराई तो उसका परिणाम क्या रहा। क्या कथित तौर पर पैसे मांगने वाले व्यक्ति से पूछताछ हुई? क्या भर्ती प्रक्रिया के रिकॉर्ड खंगाले गए? क्या संबंधित एजेंसी की भूमिका की जांच की गई?
इन सवालों पर अब तक की कार्रवाई का स्पष्ट विवरण सामने नहीं आया है।

छह महीने बाद पीड़ित को नोटिस, कार्रवाई पर चुप्पी क्यों?
चंडीगढ़ प्रशासन के सतर्कता विभाग ने 3 फरवरी 2026 को शिकायतकर्ता ओम को पत्र जारी किया। पत्र संख्या 2357/Comp-CVO-2026/1166 में शिकायत को स्वीकार करने या उससे इनकार करने के संबंध में जवाब मांगा गया। साथ ही पहचान प्रमाण की स्व-सत्यापित प्रति 15 दिनों के भीतर जमा कराने को कहा गया।
यानी अगस्त 2025 में रिश्वत मांगने की शिकायत किए जाने के करीब छह महीने बाद विभाग की ओर से शिकायतकर्ता को यह पत्र भेजा गया।
शिकायतकर्ता की पहचान सत्यापित करना प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इस अवधि में शिकायत के मूल आरोपों पर क्या कार्रवाई हुई। क्या ऑडियो रिकॉर्डिंग की जांच हुई? क्या शिकायत में लगाए गए आरोपों की प्रारंभिक पड़ताल की गई? क्या संबंधित एजेंसी से जवाब मांगा गया?
शिकायतकर्ता से जवाब मांगने वाला पत्र जारी करना एक बात है, लेकिन रिश्वत मांगने के आरोपों की जांच करना दूसरी। विभाग को बताना चाहिए कि उसने मूल शिकायत पर क्या कार्रवाई की।
ठेकेदारों की सेटिंग या निगरानी तंत्र की नाकामी?
सीबीआई की रेड के बाद आउटसोर्सिंग कंपनियों के माध्यम से होने वाली भर्ती और भुगतान व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ऐसे में इलेक्ट्रिकल विंग में इलेक्ट्रिशियन की नौकरी के नाम पर कथित रिश्वत मांगने का मामला प्रशासनिक निगरानी की गंभीर परीक्षा बन जाता है।
शिकायतकर्ता ने मामले में कार्रवाई न होने पर ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों के बीच संभावित मिलीभगत को लेकर सवाल उठाए हैं। लेकिन इस आशंका को साबित करने के लिए जांच और दस्तावेजी साक्ष्य आवश्यक हैं।
यदि किसी एजेंसी के प्रतिनिधि ने नौकरी दिलाने के बदले पैसे मांगे थे, तो जांच में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि वह व्यक्ति किस हैसियत से काम कर रहा था, भर्ती प्रक्रिया में उसकी भूमिका क्या थी और क्या किसी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी ने उसे संरक्षण दिया था।
क्या शिकायत की अनदेखी हुई, जांच में लापरवाही बरती गई या देरी के पीछे कोई दूसरा कारण था? इन सवालों का जवाब सतर्कता विभाग के रिकॉर्ड से ही मिल सकता है।
सीबीआई की रेड के बीच पुराने मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी
सीबीआई की हालिया रेड और इलेक्ट्रिशियन भर्ती से जुड़ी पुरानी शिकायत के बीच किसी सीधे संबंध की पुष्टि उपलब्ध दस्तावेजों से नहीं होती। फिर भी, दोनों संदर्भों में आउटसोर्सिंग भर्ती व्यवस्था की पारदर्शिता और शिकायतों पर कार्रवाई की गंभीरता महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।
सतर्कता विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि अगस्त 2025 में प्राप्त शिकायत किस अधिकारी को सौंपी गई, ऑडियो रिकॉर्डिंग की जांच हुई या नहीं और शिकायत पर कार्रवाई किस स्तर तक पहुंची।
यदि शिकायत पर कार्रवाई हुई है, तो उसका विवरण सामने आना चाहिए। यदि कार्रवाई नहीं हुई, तो देरी का कारण भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।
विजिलेंस विभाग से सीधे सवाल
अगस्त 2025 में मिली शिकायत पर क्या कार्रवाई की गई?
शिकायत के साथ दी गई ऑडियो रिकॉर्डिंग की जांच हुई या नहीं?
कथित तौर पर रिश्वत मांगने वाले व्यक्ति की पहचान और भूमिका की पड़ताल की गई या नहीं?
H.K. Enterprises से इस मामले में जवाब मांगा गया या नहीं?
इलेक्ट्रिशियन भर्ती से जुड़े रिकॉर्ड की जांच हुई या नहीं?
शिकायतकर्ता को लगभग छह महीने बाद पत्र भेजने की वजह क्या थी?
क्या किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका की जांच की गई?
बड़ा सवाल: शिकायतकर्ता से जवाब मांगना आसान
आरोपों की जांच करना मुश्किल क्यों?
चंडीगढ़ प्रशासन के सतर्कता विभाग के 3 फरवरी 2026 के पत्र ने इस पुराने मामले को फिर से सवालों के घेरे में ला दिया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, उसने रिश्वत मांगने की शिकायत के साथ ऑडियो रिकॉर्डिंग भी दी थी। इसके बावजूद मामले में कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
अब जरूरत केवल पत्राचार की नहीं, बल्कि शिकायत के मूल आरोपों की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की है।
आखिर शिकायत और कथित ऑडियो साक्ष्य मिलने के बाद भी कार्रवाई का स्पष्ट विवरण सामने क्यों नहीं आया? क्या विभाग बताएगा कि छह महीने में जांच कहां तक पहुंची? यही वे सवाल हैं, जिनका जवाब चंडीगढ़ प्रशासन को देना चाहिए।













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