October 28, 2026 10:22 am

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चंडीगढ़ में 30 हजार आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती व्यवस्था पर उठे सवाल, HKRN की तर्ज पर सरकारी एजेंसी बनाने की मांग

CBI की कार्रवाई के बाद संयुक्त कर्मचारी मोर्चा ने उठाई आवाज, ठेकेदारों की मध्यस्थता खत्म कर DC रेट पर भर्ती करने की मांग

बाबूगिरी न्यूज

चंडीगढ़, 17 अक्टूबर। चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती एवं वेतन भुगतान में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की कार्रवाई के बाद आउटसोर्स भर्ती व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। चंडीगढ़ में करीब 30 हजार आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती और उनके वेतन भुगतान की व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए अब हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN) की तर्ज पर एक केंद्रीकृत सरकारी एजेंसी गठित करने की मांग उठी है।
संयुक्त कर्मचारी मोर्चा, यूटी एवं एमसी चंडीगढ़ ने प्रशासन से मांग की है कि आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती के लिए निजी ठेकेदारों पर निर्भरता समाप्त की जाए और पूरी प्रक्रिया सरकारी निगरानी में लाई जाए। मोर्चा का कहना है कि इससे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी, कर्मचारियों को समय पर वेतन मिलेगा और उन्हें भविष्य निधि (EPF) तथा कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं का लाभ सुनिश्चित हो सकेगा।

निजी ठेकेदारों के माध्यम से भर्ती पर उठाए सवाल
संयुक्त कर्मचारी मोर्चा के कन्वीनरों गोपाल दत्त जोशी, सुरमुख सिंह, सुखबीर सिंह, रंजीत हंस और विपिन शेर सिंह ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि वर्तमान व्यवस्था में निजी ठेकेदारों के माध्यम से कर्मचारियों की भर्ती किए जाने के कारण कई तरह की समस्याएं सामने आती हैं।
मोर्चा के अनुसार, आउटसोर्स कर्मचारियों को वेतन में कथित कटौती, भुगतान में देरी तथा EPF और ESI से संबंधित परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कर्मचारियों को अपनी मेहनत का पूरा भुगतान समय पर मिले और उनके कानूनी अधिकारों का उल्लंघन न हो, इसके लिए मौजूदा व्यवस्था में बदलाव जरूरी है।
मोर्चा ने कहा कि जब कर्मचारियों की नियुक्ति सरकारी विभागों और नगर निगम की जरूरतों को पूरा करने के लिए की जाती है, तो उनकी भर्ती, वेतन भुगतान और सामाजिक सुरक्षा की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के लिए भी एक पारदर्शी सरकारी तंत्र होना चाहिए।

HKRN की तर्ज पर बने केंद्रीकृत सरकारी एजेंसी
मोर्चा ने हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN) की तर्ज पर चंडीगढ़ में भी एक केंद्रीकृत सरकारी एजेंसी गठित करने की मांग की है। प्रस्तावित एजेंसी के माध्यम से आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती, वेतन भुगतान और संबंधित रिकॉर्ड का प्रबंधन किया जा सकेगा।
मोर्चा का कहना है कि इस व्यवस्था से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ कर्मचारियों के हितों की रक्षा करने में भी मदद मिलेगी। ठेकेदारों की मध्यस्थता कम होने से कर्मचारियों के वेतन और अन्य लाभों से संबंधित शिकायतों के समाधान के लिए एक जवाबदेह व्यवस्था विकसित की जा सकेगी।
इसके साथ ही मोर्चा ने मांग की कि कर्मचारियों को सरकारी व्यवस्था के तहत निर्धारित डीसी रेट पर नियोजित किया जाए, ताकि उन्हें उनके काम के अनुरूप निर्धारित वेतन और अन्य वैधानिक लाभ मिल सकें।

CBI की कार्रवाई के बाद जवाबदेही तय करने की मांग
चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम में आउटसोर्स भर्ती तथा वेतन भुगतान में कथित अनियमितताओं को लेकर CBI की कार्रवाई के संदर्भ में मोर्चा ने मामले की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की है।
मोर्चा का कहना है कि जांच में यदि कोई अधिकारी, ठेकेदार या अन्य संबंधित व्यक्ति दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, ऐसी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, जिससे भविष्य में कर्मचारियों की भर्ती और वेतन भुगतान में अनियमितताओं की आशंका को कम किया जा सके।
हालांकि, कथित अनियमितताओं में किसी व्यक्ति या संस्था की भूमिका और जिम्मेदारी जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही तय की जानी चाहिए।

मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
संयुक्त कर्मचारी मोर्चा ने चंडीगढ़ प्रशासन से इस मुद्दे पर तत्काल ठोस निर्णय लेने की अपील की है। मोर्चा ने चेतावनी दी कि यदि HKRN की तर्ज पर केंद्रीकृत सरकारी एजेंसी गठित करने की मांग पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो संबंधित कर्मचारियों को संगठित कर लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।
मोर्चा के कन्वीनरों गोपाल दत्त जोशी, सुरमुख सिंह, सुखबीर सिंह, रंजीत हंस और विपिन शेर सिंह ने स्पष्ट किया कि आउटसोर्स कर्मचारियों के अधिकारों, सम्मान, रोजगार की सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
मोर्चा के अनुसार, कर्मचारियों को केवल रोजगार उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि उन्हें निर्धारित वेतन समय पर मिले, उनके सामाजिक सुरक्षा लाभ सुरक्षित रहें और शिकायतों के निवारण के लिए जवाबदेह व्यवस्था उपलब्ध हो।
अब सवाल यह है कि CBI की कार्रवाई के बाद चंडीगढ़ प्रशासन आउटसोर्स भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाता है और HKRN की तर्ज पर सरकारी एजेंसी गठित करने की मांग पर कब तक निर्णय लिया जाता है।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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