नुक (ग्रीनलैंड): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर एक बार फिर सख्त बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड पर अमेरिका के नियंत्रण से कम कुछ भी स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह टिप्पणी उन्होंने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारियों के साथ होने वाली अहम वार्ता से कुछ घंटे पहले की।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि अमेरिका को राष्ट्रीय सुरक्षा के उद्देश्य से ग्रीनलैंड की जरूरत है। उन्होंने दावा किया कि यदि अमेरिका ने नेतृत्व नहीं किया तो रूस या चीन इस रणनीतिक आर्कटिक द्वीप पर प्रभाव बढ़ा सकते हैं। ट्रंप के मुताबिक ग्रीनलैंड के अमेरिका के हाथों में आने से नाटो और अधिक शक्तिशाली और प्रभावी बनेगा।
ग्रीनलैंड नाटो सहयोगी डेनमार्क का अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है, लेकिन इस मुद्दे पर वहां के निवासियों ने साफ कर दिया है कि यह इलाका बिकाऊ नहीं है। इसके बावजूद व्हाइट हाउस ने इस संभावना से इनकार नहीं किया है कि अमेरिका जबरन इस द्वीप पर कब्जा कर सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है।
इस पूरे मामले को लेकर कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की बुधवार को वाशिंगटन में डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन और ग्रीनलैंड की विदेश मंत्री विवियन मोट्ज़फेल्ड से बैठक प्रस्तावित है। ग्रीनलैंड की राजधानी नुक की 22 वर्षीय छात्रा तुता मिकेलसन ने ‘एसोसिएटेड प्रेस’ से कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिकी अधिकारियों को पीछे हटने का स्पष्ट संदेश मिलेगा।
ट्रंप ने यह भी कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिका के ‘गोल्डन डोम’ मिसाइल रक्षा कार्यक्रम के लिए बेहद अहम है और इसे अमेरिकी सुरक्षा मजबूत करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने रूसी और चीनी जहाजों से पैदा होने वाले खतरे को इसके पीछे एक बड़ा कारण बताया, हालांकि विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों ने इन दावों पर सवाल उठाए हैं।
इस बीच, अमेरिका में डेनमार्क के राजदूत अमेरिकी कांग्रेस में आर्कटिक कॉकस के सांसदों से मुलाकात करने वाले हैं। वहीं न्यू हैम्पशायर की डेमोक्रेट सीनेटर जीन शाहीन और अलास्का की रिपब्लिकन सीनेटर लिसा मुर्कोव्स्की ने एक द्विदलीय विधेयक पेश किया है, जिसमें किसी नाटो सदस्य देश या ग्रीनलैंड जैसे क्षेत्र पर उसकी सहमति के बिना कब्जा या विलय करने के लिए अमेरिकी सरकारी धन के इस्तेमाल पर रोक लगाने का प्रावधान है।
इसके अलावा दोनों दलों के सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल सप्ताह के अंत में डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारियों से मुलाकात के लिए कोपेनहेगन रवाना होगा। यह दौरा इस बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को कम करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।











Total Users : 291470
Total views : 493831