चंडीगढ़, 22 जनवरी: मेहर चंद महाजन डीएवी महिला महाविद्यालय में आयोजित सात दिवसीय एवं रात्रिकालीन एनएसएस शिविर का दूसरा दिन स्वास्थ्य, ज्ञानवर्धन और कौशल विकास के समन्वय के साथ संपन्न हुआ। दिन की शुरुआत एक प्रकृति भ्रमण और व्यायाम से हुई, जिसने स्वयंसेवकों को पर्यावरण से जुड़ने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया।
‘एक्सप्लोरिंग ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म्स’ विषय पर एक जानकारीपूर्ण सत्र का आयोजन कॉलेज के पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. रमनीक द्वारा किया गया, जिसमें उन्होंने स्वयंसेवकों को विभिन्न डिजिटल संसाधनों से परिचित कराया और समकालीन शैक्षणिक परिदृश्य में तकनीक-आधारित शिक्षण के महत्व पर बल दिया। इसके पश्चात रोटो नॉर्थ, पीजीआईएमईआर की सलाहकार (मीडिया/आईईसी) सुश्री सरयू ने अंगदान पर एक ज्ञानवर्धक व्याख्यान दिया, जिसमें उन्होंने इसके महत्व को रेखांकित किया और जागरूकता एवं संचार से जुड़े प्रमुख पहलुओं पर प्रकाश डाला।‘अंगदान’ विषय पर सुख फाउंडेशन के संस्थापक एवं अध्यक्ष श्री अमित देवान द्वारा एक विचारोत्तेजक व्याख्यान दिया गया, जिसमें उन्होंने विद्यार्थियों को अंगदान के मानवीय और जीवन-रक्षक महत्व के प्रति संवेदनशील बनाया। उन्होंने इस पुण्य कार्य के लिए प्रेरित करते हुए इस नेक उद्देश्य का एंबेसडर बनने हेतु प्रोत्साहित किया।

शिविर का अगला सत्र भौतिकी विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. मोनिका ने ‘साइंस इन डेली लाइफ’ विषय पर एक ज्ञानात्मक सत्र का संचालन किया, जिसमें उन्होंने वैज्ञानिक सिद्धांतों की दैनिक जीवन में प्रासंगिकता को सरल उदाहरणों के माध्यम से स्पष्ट किया। दोपहर के सत्र में श्री अर्पित कुमार दुबे द्वारा ‘आपदा प्रबंधन’ पर एक ज्ञानवर्धक सत्र प्रस्तुत किया गया, जिसमें आपात स्थितियों में तैयारी, प्रतिक्रिया रणनीतियों पर प्रकाश डाला गया।
दिन का समापन खेल गतिविधियों और उसके बाद आयोजित वाद-विवाद/भाषण प्रतियोगिता (डिक्लेमेशन प्रतियोगिता) के साथ उत्साहपूर्ण माहौल में हुआ, जिसने स्वयंसेवकों को अपनी शारीरिक स्फूर्ति और वक्तृत्व कला प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान किया।
कार्यवाहक प्राचार्या नीना शर्मा ने शिविर की सुव्यवस्थित गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि यह शिविर सामाजिक रूप से जिम्मेदार, जागरूक और संवेदनशील नागरिकों के निर्माण के लिए डिज़ाइन किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि ऐसे विविध सत्रों के माध्यम से छात्र न केवल ज्ञान अर्जित करते हैं, बल्कि उनमें सहानुभूति, नेतृत्व क्षमता और सेवा भावना का भी विकास होता है, जो राष्ट्र निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक है।













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