चंडीगढ़। चंडीगढ़ नगर निगम मेयर चुनाव से पहले सियासी तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। पहले आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस के बीच गठबंधन की घोषणा हुई थी, लेकिन अब दोनों दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया है। इस फैसले से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की स्थिति पहले से ज्यादा मजबूत मानी जा रही है।
कांग्रेस ने किया अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान
चंडीगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष एचएस लक्की ने स्पष्ट किया कि पार्टी मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर—तीनों पदों के लिए अपने-अपने उम्मीदवार उतारेगी। इसके साथ ही गठबंधन की संभावनाओं पर विराम लग गया।
AAP भी बिना गठबंधन लड़ेगी चुनाव
AAP की ओर से पंजाब प्रभारी जरनैल सिंह ने कहा कि आम आदमी पार्टी किसी भी सूरत में कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं करेगी। उन्होंने दावा किया कि AAP ही बीजेपी और कांग्रेस जैसी “पुरानी पार्टियों” के खिलाफ आम जनता की सच्ची आवाज है।
तीनों दलों ने उतारे उम्मीदवार
AAP ने मेयर पद के लिए योगेश ढींगरा, सीनियर डिप्टी मेयर के लिए मुन्नवर खान और डिप्टी मेयर के लिए जसविंदर कौर को मैदान में उतारा है।
कांग्रेस ने मेयर पद के लिए गुरप्रीत गाबी, सीनियर डिप्टी मेयर के लिए सचिन गालिब और डिप्टी मेयर के लिए निर्मला देवी को उम्मीदवार बनाया है।
वहीं बीजेपी ने मेयर पद के लिए सौरभ जोशी, सीनियर डिप्टी मेयर के लिए जसंवतप्रीत सिंह और डिप्टी मेयर के लिए सुमन शर्मा को प्रत्याशी घोषित किया है। बीजेपी के तीनों उम्मीदवारों ने निगम कार्यालय पहुंचकर नामांकन दाखिल किया।
बीजेपी के मेयर उम्मीदवार सौरभ जोशी ने कहा कि पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है और मौका मिलने पर वे शहर के विकास कार्यों को आगे बढ़ाएंगे। बीजेपी नेता संजय टंडन ने कहा कि AAP और कांग्रेस की अंदरूनी स्थिति साफ तौर पर बीजेपी को मजबूत बनाती है। पूर्व अध्यक्ष अरुण सूद ने भी दावा किया कि शहर की जनता जानती है कि जमीन पर किस पार्टी ने काम किया है।
AAP को दलबदली का डर, पार्षदों को बाहर रखा
AAP को अपने पार्षदों की दलबदली का शक है। इसी वजह से पार्टी ने अपने सभी 11 पार्षदों को रोपड़ के एक होटल में ठहराया है और उनके मोबाइल फोन बंद कर दिए गए हैं। मतदान या नामांकन के समय ही उन्हें चंडीगढ़ लाया जाएगा।
क्यों टूटा गठबंधन?
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पंजाब विधानसभा चुनाव को देखते हुए AAP और कांग्रेस दोनों ही गठबंधन से होने वाले नुकसान को लेकर आशंकित थीं। पंजाब यूनिट के दबाव और भविष्य की राजनीति को ध्यान में रखते हुए दोनों दलों ने औपचारिक ऐलान से पहले ही अलग रास्ता चुन लिया।
क्या है चुनावी गणित
नगर निगम में कुल 35 पार्षद और 1 सांसद का वोट है। मेयर बनने के लिए 19 वोट जरूरी हैं। मौजूदा स्थिति में बीजेपी के पास 18, AAP के पास 11 और कांग्रेस के पास 6 पार्षद हैं। अगर AAP और कांग्रेस साथ होते तो मुकाबला बराबरी का होता, लेकिन अब बीजेपी की राह आसान मानी जा रही है।
वोटिंग के तरीके पर नजर
इस बार मेयर चुनाव हाथ उठाकर कराए जाने की संभावना है। पहले यह चुनाव सीक्रेट बैलेट से होता था। हालांकि इस पर अंतिम फैसला अभी बाकी है।
AAP में अंदरूनी खींचतान भी आई सामने
नामांकन के दिन AAP की अंदरूनी कलह खुलकर सामने आई, जब पार्टी के पार्षद रामचंद्र ने डिप्टी मेयर पद के लिए निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन भर दिया। हाल ही में AAP के दो पार्षदों के बीजेपी में जाने के बाद पार्टी पहले से दबाव में थी, और अब यह घटनाक्रम उसकी मुश्किलें और बढ़ाता दिख रहा है।
अब सभी की निगाहें 29 जनवरी पर टिकी हैं, जब यह साफ हो जाएगा कि चंडीगढ़ का अगला मेयर कौन बनेगा। मुकाबला अब त्रिकोणीय नजर आ रहा है, लेकिन राजनीतिक समीकरण बीजेपी के पक्ष में झुके हुए दिख रहे हैं।











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