September 20, 2026 12:17 am

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यमुनानगर के शेरपुर गांव का लाल शहीद, डोडा सड़क हादसे में नायक सुधीर नरवाल का निधन

यमुनानगर, 23 जनवरी। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में हुए भीषण सड़क हादसे में शहीद हुए 10 जवानों में यमुनानगर जिले के शेरपुर गांव निवासी नायक सुधीर नरवाल (30) भी शामिल हैं। जैसे ही शहादत की खबर गांव और परिवार तक पहुंची, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। घर में खुशियों से भरी घर वापसी की तैयारी मातम में बदल गई।
नायक सुधीर नरवाल तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे और इकलौते भाई थे। वे 27 जनवरी को छुट्टी पर घर लौटने वाले थे, लेकिन उससे पहले 22 जनवरी को उनकी शहादत की सूचना परिवार को मिली। खबर मिलते ही मां का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि पत्नी रूबी बेसुध अवस्था में हैं।

2016 में सेना ज्वाइन, बचपन से था फौज में जाने का सपना
साल 2016 में भारतीय सेना में भर्ती हुए सुधीर नरवाल बचपन से ही देश सेवा का सपना देखते थे। सेना में चयन के लिए वे रोजाना अपने गांव शेरपुर से करीब 20 किलोमीटर दूर जगाधरी के तेजली खेल परिसर में अभ्यास करने जाते थे। उनकी मेहनत और लगन पर न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे गांव को गर्व था। उनके असमय निधन से गांव का माहौल गमगीन है।
मां की पुकार: “मेरे बेटे को मेरे पास लेकर आओ”
शहीद की मां बेटे के जाने से टूट चुकी हैं। वह बार-बार यही कह रही हैं कि “मेरे सुधीर को मेरे पास लेकर आओ।” पत्नी रूबी सदमे में हैं। सुधीर ने 12वीं पास करने के बाद सेना ज्वाइन की थी और कॉलेज की पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी। सेना में जाने के कुछ समय बाद ही उनके पिता हरपाल सिंह का निधन हो गया था।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
सुधीर की दो बहनें हैं—एक बहन कविता शादी के बाद न्यूजीलैंड में रहती हैं, जबकि दूसरी बहन कुलविंदर की भी शादी हो चुकी है। सुधीर का चार वर्षीय बेटा आयांश है। पत्नी रूबी एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। शहादत के बाद घर में मातम पसरा हुआ है और रिश्तेदार व ग्रामीण परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं।

घर आने की खुशी मातम में बदली
परिवार के रिश्तेदार सुमित ने बताया कि 15 जनवरी को ही सुधीर से उनकी बात हुई थी। वे 27 आर्म्ड रेजिमेंट में नायक के पद पर तैनात थे और बेहद होनहार व अनुशासित सैनिक थे। परिवार के सदस्य सुरेश पाल ने बताया कि सुधीर हर तीन-चार महीने में छुट्टी लेकर घर आते थे। पिछली बार वे दिवाली पर घर आए थे और 12 नवंबर की एक शादी में शामिल होकर ड्यूटी पर लौटे थे। 27 जनवरी को फिर घर आने की खुशी थी, लेकिन हादसे की खबर ने सब कुछ बदल दिया।
मौसम बना बाधा, पार्थिव शरीर लाने में देरी
खराब मौसम के चलते फिलहाल शहीद सुधीर नरवाल के पार्थिव शरीर को गांव लाने में दिक्कतें आ रही हैं। वहीं, न्यूजीलैंड में रह रही बहन के भारत पहुंचने में भी समय लग सकता है। शहीद की शहादत से न केवल उनका परिवार बल्कि पूरा देश एक वीर सपूत से वंचित हो गया है।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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