चंडीगढ़, 24 जनवरी 2026: हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने गुरुग्राम के सेक्टर-57 में लंबे समय से जारी अवैध अतिक्रमण और आवासीय क्षेत्र में भवन निर्माण सामग्री के गैरकानूनी भंडारण के मामले में सख्त रुख अपनाया है। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा ने पुलिस और संबंधित प्रशासनिक विभागों को स्पष्ट निर्देश देते हुए स्थायी और संरचनात्मक समाधान सुनिश्चित करने को कहा है।
आयोग के समक्ष शिकायत संख्या 1708/5/2025 की सुनवाई के दौरान विभिन्न विभागों की रिपोर्टों में तथ्यात्मक विरोधाभास सामने आया, जिस पर आयोग ने नाराज़गी जताई। पुलिस रिपोर्ट में जहां अवैध गतिविधियों के जारी रहने की बात कही गई, वहीं एचएसवीपी के संपदा अधिकारी ने अतिक्रमण हटाए जाने का दावा किया।
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता रोशन लाल यादव ने नवीनतम तस्वीरें प्रस्तुत कीं, जिनसे प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट हुआ कि स्थल पर अब भी अवैध रूप से भवन निर्माण सामग्री का डंपिंग और भंडारण हो रहा है। जस्टिस ललित बत्रा ने यह भी सवाल उठाया कि यदि अनधिकृत गतिविधियां जारी हैं, तो फिर सेक्टर-57 की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा 06.06.2025 और 08.12.2025 को अतिक्रमण हटाने की सराहना में प्रशंसा पत्र क्यों जारी किए गए।
इस पर शिकायतकर्ता ने बताया कि निरंतर निगरानी और कठोर प्रवर्तन के अभाव में अतिक्रमण हटाए जाने के बावजूद वही तत्व दोबारा लौट आते हैं और अवैध गतिविधियां फिर शुरू हो जाती हैं। आयोग अध्यक्ष ने इसे प्रशासनिक लापरवाही और कमजोर प्रवर्तन का परिणाम माना।
पुलिस उपायुक्त (पूर्व), गुरुग्राम को निर्देश
स्वयं स्थल का निरीक्षण करें।
अतिक्रमण को स्थायी रूप से हटाने के लिए प्रभावी और समयबद्ध कार्रवाई करें।
भविष्य में अवैध गतिविधियों की पुनरावृत्ति रोकें।
दर्ज सभी एफआईआर की अद्यतन स्थिति आयोग को दें।
प्रत्येक एफआईआर में जांच और ट्रायल की प्रगति की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
एचएसवीपी, गुरुग्राम के लिए सख्त निर्देश
स्थल पर 8 से 10 फीट ऊंची आरसीसी/सीसी बाउंड्री वॉल का निर्माण।
जहां संभव हो, स्थायी लोहे की ग्रिल/फेंसिंग लगाई जाए।
प्रमुख स्थानों पर चेतावनी बोर्ड— “Trespassers Will Be Prosecuted”।
रात्रि दृश्यता के लिए रिफ्लेक्टिव साइन बोर्ड।
संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था।
भूमि सीमांकन के लिए बाउंड्री पिलर्स।
स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय कर नियमित गश्त और आकस्मिक निरीक्षण।
आयोग ने निर्देश दिया है कि इन सभी आदेशों की फोटोग्राफिक साक्ष्य सहित अनुपालन रिपोर्ट अगली सुनवाई 18 मार्च 2026 से कम से कम एक सप्ताह पहले प्रस्तुत की जाए।
सहायक रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि आयोग ने स्पष्ट किया है— सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि नागरिकों के सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक जीवन के अधिकार का भी उल्लंघन है। आयोग ने उपायुक्त, पुलिस आयुक्त, नगर निगम आयुक्त, जीएमडीए, एचएसवीपी सहित सभी संबंधित अधिकारियों को समन्वित कार्रवाई कर स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।











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