June 15, 2026 2:11 pm

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भक्ति की सुगंध बिखेरता महाराष्ट्र का 59वां निरंकारी संत समागम

लाखों श्रद्धालुओं का उमड़ा जनसैलाब, सेवा-सत्संग का अनुपम संगम

चंडीगढ़/पंचकूला/मोहाली/सांगली, 26 जनवरी 2026: महाराष्ट्र के सांगली में आयोजित 59वें निरंकारी संत समागम ने भक्ति, सेवा और मानवता की दिव्य सुगंध से वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। सांगली के ईश्वरपुर रोड स्थित लगभग 350 एकड़ के विशाल मैदान में आयोजित इस तीन दिवसीय समागम में महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न राज्यों से लाखों श्रद्धालु भक्त एवं प्रभुप्रेमी सज्जन शामिल हुए। चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला से भी सैकड़ों श्रद्धालु इस महाआयोजन में सहभागी बने।

समागम को संबोधित करते हुए निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने कहा,

“परमात्मा सर्वव्यापी है, सृष्टि के कण-कण में विद्यमान है। उसे प्रत्यक्ष रूप से जानकर और हर क्षण उसके अहसास में जीवन जीने से ही आत्ममंथन की दिव्य आंतरिक यात्रा संभव हो पाती है।”

सतगुरु माता जी ने भक्ति के वास्तविक स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भक्ति दूसरों की कमियां देखने का नहीं, बल्कि स्वयं को सुधारने और संवारने का मार्ग है। मन को निर्मल बनाकर, विनम्रता और सहनशीलता जैसे दिव्य गुणों को अपनाते हुए मानवता के पथ पर चलना ही सच्ची भक्ति है।

उन्होंने कहा कि जब जीवन में ब्रह्मज्ञान का प्रकाश प्रकट होता है, तो व्यक्ति दूसरों के दुःख-दर्द को महसूस करने लगता है। उसके हृदय में दया, करुणा और सेवा की भावना जागृत होती है और वह समाज में ज्ञान की रोशनी फैलाने का प्रयास करता है।

भव्य सेवादल रैली आकर्षण का केंद्र

समागम के दूसरे दिन भव्य एवं अनुशासित सेवादल रैली का आयोजन किया गया। महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों से आए हजारों सेवादल भाई-बहन अपनी-अपनी वर्दियों में रैली में शामिल हुए। सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता जी के आगमन पर सेवादल अधिकारियों द्वारा पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया गया।

रैली के दौरान पी.टी. परेड, संगीतमय योग, मानव पिरामिड, मल्लखंभ, एरोबिक्स, एम्ब्रेला फॉर्मेशन सहित अनेक साहसिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। विभिन्न भाषाओं में प्रस्तुत लघु नाटिकाओं के माध्यम से सेवा, विनम्रता, अहंकार-रहित जीवन और मानवीय मूल्यों का संदेश दिया गया।

सेवादल को संबोधित करते हुए सतगुरु माता जी ने कहा कि सेवा केवल एक कार्य नहीं, बल्कि पूरे मन, श्रद्धा और समर्पण से की जाने वाली साधना है। सेवा के साथ-साथ सत्संग को जीवन का अभिन्न अंग बनाना भी आवश्यक है।

निरंकारी मिशन के नव साहित्य का विमोचन

समागम के प्रथम दिवस सत्संग समारोह के दौरान सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के करकमलों द्वारा समागम विशेषांक “आत्म मंथन”, ‘गुरुदेव हरदेव’ पुस्तक के संशोधित संस्करण सहित मिशन की कई पुस्तकों एवं पत्र-पत्रिकाओं के नवीन संस्करणों का विमोचन किया गया। ये सभी प्रकाशन समागम में लगे स्टॉलों पर श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध कराए गए।

उत्कृष्ट लंगर एवं कैंटीन व्यवस्था

समागम में आए श्रद्धालुओं के लिए विशाल लंगर व्यवस्था की गई है, जहां एक समय में लगभग 10 हजार श्रद्धालु भोजन ग्रहण कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त चार कैंटीनों में रियायती दरों पर चाय, कॉफी, शीत पेय, अल्पाहार एवं मिनरल वाटर की समुचित व्यवस्था की गई है।

समग्र रूप से 59वां निरंकारी संत समागम भक्ति, सेवा, सत्संग और मानवता के संदेश के साथ एक ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायक आध्यात्मिक आयोजन बनकर उभरा।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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