August 27, 2026 11:54 pm

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बठिंडा कोर्ट में कंगना रनौत की पेशी, किसान नेताओं के बयान दर्ज; अगली सुनवाई 10 फरवरी को

बठिंडा (पंजाब): किसान आंदोलन के दौरान बहादुरगढ़ जंडियां निवासी महिंदर कौर की तस्वीर को लेकर किए गए ट्वीट के मामले में मानहानि का सामना कर रहीं अभिनेत्री कंगना रनौत मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बठिंडा कोर्ट में पेश हुईं। इस दौरान शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से ‘क्रांतिकारी किसान यूनियन’ के दो गवाह—सुरजीत सिंह फूल और जसवीर सिंह बहादुरगढ़ जंडियां—के बयान दर्ज किए गए। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी तय की है।

कंगना रनौत के वकीलों ने अदालत में दलील दी कि महिंदर कौर किसान आंदोलन का हिस्सा नहीं थीं। इसके जवाब में किसान नेता सुरजीत सिंह फूल ने गवाही देते हुए कहा कि महिंदर कौर वास्तव में आंदोलन में शामिल थीं और अभिनेत्री द्वारा उनकी तस्वीर का इस्तेमाल कर किया गया ट्वीट झूठा था।

अदालत में कंगना रनौत की ओर से एक हलफनामा भी पेश किया गया, जिसमें कहा गया कि यदि आवश्यकता पड़ी तो वह व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होंगी। वहीं, शिकायतकर्ता के वकील रघबीर सिंह बहनीवाल ने बताया कि कंगना रनौत के विदेश जाने पर रोक लगाने और उनका पासपोर्ट अदालत में जमा कराने को लेकर एक अर्जी दी गई थी। इस पर शिकायतकर्ता पक्ष अपना जवाब दाखिल करेगा। कोर्ट ने इस मुद्दे पर विचार के लिए समय दिया है और पासपोर्ट जमा कराने संबंधी नई याचिका दायर की जाएगी।

रघबीर सिंह बहनीवाल ने बताया कि दोनों गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं और कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज भी अदालत को सौंपे गए हैं।

किसान नेता सुरजीत सिंह फूल ने कहा कि कंगना रनौत ने अब तक महिंदर कौर से किसी प्रकार की माफी नहीं मांगी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अहंकार के चलते मामला यहां तक पहुंचा है और यह लड़ाई अंत तक लड़ी जाएगी। फूल ने यह भी बताया कि अदालत में उनसे पूछा गया था कि क्या उन्होंने वह ट्वीट पढ़ा था और क्या उन्हें अंग्रेजी आती है, जिस पर उन्होंने कहा कि उन्होंने ट्वीट की तस्वीर देखी थी और अंग्रेजी समझते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि कंगना रनौत का ट्वीट पूरी तरह झूठा था, क्योंकि किसान आंदोलन में किसी को शामिल होने के लिए पैसे नहीं दिए गए थे। लोग आंदोलन में दान और मदद के लिए पहुंचे थे और पंजाब सहित देशभर से सहायता मिली थी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभाव और संसाधनों के बल पर इस मामले को खारिज कराने की कोशिशें की गईं, लेकिन कानूनी प्रक्रिया के चलते मामला आज भी बठिंडा कोर्ट में विचाराधीन है।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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