मुंबई: 3 फरवरी 2026 को भारतीय मुद्रा बाजार में बड़ा उलटफेर देखने को मिला। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया जोरदार मजबूती के साथ 90.40 के स्तर तक पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में करीब 1.2% की यह तेजी हाल के वर्षों की सबसे बड़ी एकल-दिवसीय बढ़त मानी जा रही है। इससे पहले सोमवार को रुपया 91.51 पर बंद हुआ था, लेकिन वैश्विक और घरेलू स्तर पर आए सकारात्मक संकेतों ने इसकी दिशा पूरी तरह बदल दी।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता बना बड़ी वजह
रुपये में आई इस मजबूती के पीछे सबसे बड़ा कारण भारत और अमेरिका के बीच हुआ ऐतिहासिक व्यापार समझौता माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क (टैरिफ) घटाकर 18% करने की घोषणा के बाद निवेशकों का भरोसा भारतीय अर्थव्यवस्था पर फिर से मजबूत हुआ है। इससे पहले कुछ श्रेणियों में यह टैरिफ 50% तक पहुंच गया था, जिससे निर्यातकों में चिंता बनी हुई थी।
टैरिफ में कटौती से आईटी, कपड़ा, फार्मा और रत्न-आभूषण जैसे प्रमुख निर्यात क्षेत्रों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
शेयर बाजार में भी रिकॉर्ड तेजी
रुपये की मजबूती का असर शेयर बाजार पर भी साफ दिखा। बीएसई सेंसेक्स ने 3,600 अंकों से ज्यादा की छलांग लगाते हुए 85,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर लिया। वहीं निफ्टी-50 भी तेजी के साथ 26,500 के नए शिखर की ओर बढ़ता नजर आया।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार ट्रेड डील के बाद विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का भारत की ओर रुख बढ़ सकता है, जो बीते कुछ हफ्तों से लगातार पूंजी निकाल रहे थे।
अर्थव्यवस्था को मिलेगा सीधा लाभ
मजबूत रुपये से भारत के आयात बिल में कमी आने की संभावना है, खासतौर पर कच्चे तेल और इलेक्ट्रॉनिक सामानों के आयात में। इससे चालू खाता घाटे (CAD) को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। गौरतलब है कि पिछले शुक्रवार को रुपया 92.02 के अब तक के सबसे निचले स्तर तक फिसल गया था, लेकिन मौजूदा तेजी ने मंदी की आशंकाओं को काफी हद तक कम कर दिया है।
इसके साथ ही 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड में भी गिरावट दर्ज की गई है, जिसे स्थिर और सकारात्मक आर्थिक माहौल का संकेत माना जा रहा है











Total Users : 291489
Total views : 493854