चंडीगढ़: हरियाणा के शहरी स्थानीय निकाय विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध ताज़ा आंकड़ों के विश्लेषण में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। प्रदेश के कुल 87 शहरी निकायों में से 14 शहरी निकायों में बीते तीन महीनों के दौरान पंजीकृत संपत्तियों (प्रॉपर्टीज) की संख्या में कमी दर्ज की गई है, जिनमें 3 नगर निगम भी शामिल हैं।
हालांकि इसी अवधि में पूरे प्रदेश में कुल 7,403 संपत्तियों की बढ़ोतरी भी दर्ज हुई है, लेकिन इसमें से 6,357 संपत्तियां अकेले गुरुग्राम नगर निगम में ही बढ़ी हैं।
अम्बाला और पंचकूला जिले सबसे अधिक प्रभावित
विश्लेषण के अनुसार अम्बाला और पंचकूला ऐसे दो जिले हैं, जिनके अंतर्गत आने वाले सभी शहरी निकायों में संपत्तियों की संख्या घटी है।
शहरी स्थानीय निकाय विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार—
जनसंख्या संबंधी डेटा नागरिक संसाधन सूचना विभाग (CRID) से लिया गया है, जो 23 अक्टूबर 2025 तक अपडेटेड है।
क्षेत्रफल संबंधी आंकड़े जीआईएस डेटाबेस पर आधारित हैं, जो 12 जनवरी 2026 तक अपडेटेड हैं।
प्रॉपर्टी टैक्स से जुड़े आंकड़े 27 जनवरी 2026 तक अपडेटेड बताए गए हैं।
अम्बाला जिले में चारों निकायों में गिरावट
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट और म्युनिसिपल कानून विशेषज्ञ हेमंत कुमार ने बताया कि जब उन्होंने अम्बाला जिले के चारों शहरी निकायों के आंकड़ों का अध्ययन किया, तो वे हैरान रह गए।
अम्बाला नगर निगम:
23 अक्टूबर 2025: 1,26,384 संपत्तियां
27 जनवरी 2026: 1,23,476 संपत्तियां
कमी: 2,908 संपत्तियां
अम्बाला सदर नगर परिषद:
पहले: 1,13,906
अब: 1,12,307
कमी: 1,599
बराड़ा नगरपालिका समिति:
पहले: 21,429
अब: 21,070
कमी: 359
नारायणगढ़ नगरपालिका समिति:
पहले: 21,219
अब: 21,196
कमी: 23
पंचकूला और सोनीपत नगर निगम में भी कमी
पंचकूला नगर निगम:
पहले: 1,04,118
अब: 1,03,159
कमी: 959 संपत्तियां
कालका नगर परिषद:
पहले: 57,267
अब: 57,080
कमी: 187
सोनीपत नगर निगम:
पहले: 1,98,904
अब: 1,98,874
कमी: 30 संपत्तियां
हेमंत कुमार ने इसे एक संयोग बताते हुए कहा कि अम्बाला, पंचकूला और सोनीपत—तीनों नगर निगमों में आने वाले महीनों में नगर निकाय चुनाव प्रस्तावित हैं, जहां संपत्तियों की संख्या में कमी दर्ज हुई है।
अन्य जिलों में भी दिखी गिरावट
इसके अलावा प्रदेश के अन्य शहरी निकायों में भी संपत्तियों की संख्या घटी है—
बवानी खेड़ा (भिवानी): 1,417
पटौदी-जाटौली मंडी (गुरुग्राम): 1,209
सोहना नगर परिषद: 748
नारनौंद (हिसार): 35
सीवन (कैथल): 2,634
नारनौल नगरपालिका समिति: 166
बावल (रेवाड़ी): 10

सवालों के घेरे में सिस्टम
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रॉपर्टी डेटा में इस तरह की गिरावट असामान्य है। इसके पीछे डिलीशन, मर्जिंग, पुनः सर्वेक्षण या तकनीकी संशोधन जैसे कारण हो सकते हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति संबंधित विभागीय अधिकारी ही स्पष्ट कर सकते हैं।
यह मामला न सिर्फ प्रशासनिक पारदर्शिता, बल्कि आगामी शहरी निकाय चुनावों के लिहाज़ से भी अहम माना जा रहा है।











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