May 23, 2026 8:56 pm

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कैथल में रिश्वतखोरी पर बड़ा फैसला: जिला परिषद सदस्य विक्रमजीत और पार्षद प्रतिनिधि भारत हरसौला को 7-7 साल की सजा

कैथल। भ्रष्टाचार के एक अहम मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कैथल जिला परिषद सदस्य विक्रमजीत और पार्षद प्रतिनिधि भारत हरसौला को रिश्वत लेने के दोष में 7-7 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोनों पर जुर्माना भी लगाया गया है। यह फैसला जनवरी 2024 में सामने आए उस मामले से जुड़ा है, जिसमें दोनों आरोपी निर्माण कार्यों से जुड़े बिल पास करवाने के बदले रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किए गए थे।

बिल पास कराने के नाम पर मांगी थी रिश्वत
मामले के अनुसार, जिला परिषद और नगर निकाय से जुड़े निर्माण कार्यों के भुगतान को मंजूरी दिलाने के लिए दोनों आरोपियों ने संबंधित ठेकेदार से रिश्वत की मांग की थी। शिकायत मिलने पर विजिलेंस विभाग ने जाल बिछाया और जनवरी 2024 में दोनों को रिश्वत लेते हुए मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था।

अदालत में आरोप साबित
लंबी सुनवाई और गवाहों के बयान के बाद अदालत ने यह स्पष्ट माना कि दोनों आरोपी अपने पद का दुरुपयोग कर अवैध रूप से लाभ लेने के दोषी हैं। अदालत ने कहा कि जनप्रतिनिधियों से ईमानदारी और पारदर्शिता की अपेक्षा की जाती है, ऐसे में रिश्वतखोरी समाज और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद घातक है। इसी आधार पर अदालत ने दोनों को 7-7 साल की सजा सुनाई।

झूठे आरोपों का भी खुलासा
इस मामले का एक अहम पहलू यह भी रहा कि इन दोनों ने करीब दो साल पहले जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के तत्कालीन जिला परिषद चेयरमैन दीप मलिक पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया था। जांच के दौरान यह आरोप झूठे और बेबुनियाद पाए गए। अदालत और जांच एजेंसियों के निष्कर्षों के बाद दीप मलिक पर लगाए गए आरोपों की साख पूरी तरह खत्म हो गई।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल
फैसले के बाद कैथल के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। इस सजा को भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर भी एक बार फिर बहस तेज हो गई है।

विजिलेंस की कार्रवाई को सराहना
विजिलेंस विभाग की इस कार्रवाई को ईमानदार प्रशासन की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
यह फैसला न केवल दोषियों के लिए चेतावनी है, बल्कि जनसेवा के नाम पर पद का दुरुपयोग करने वालों के लिए भी एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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