विमल चोपड़ा
डेराबस्सी, 5 फरवरी | प्रदेश स्तरीय हड़ताल के आह्वान के तहत मंगलवार को बार एसोसिएशन डेराबस्सी ने कलम छोड़ हड़ताल की, जिसके चलते डेराबस्सी की सभी अदालतों में न्यायिक कार्य पूरी तरह ठप रहा। बार से जुड़े सभी अधिवक्ताओं ने हड़ताल को पूर्ण समर्थन देते हुए किसी भी प्रकार की अदालती कार्रवाई में भाग नहीं लिया।
बार एसोसिएशन के प्रधान एडवोकेट विक्रमजीत सिंह दप्पर ने बताया कि 4 फरवरी को पंजाब भर की विभिन्न बार एसोसिएशनों के प्रधानों की संयुक्त बैठक में तीन दिवसीय पूर्ण हड़ताल का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया था। उन्होंने कहा कि मौजूदा एक्शन प्लान के तहत मामलों के त्वरित निपटारे का अत्यधिक दबाव अधिवक्ताओं पर डाला जा रहा है, जिससे निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण न्याय देना कठिन होता जा रहा है।
एडवोकेट दप्पर ने कहा कि जल्दबाजी में मामलों के निपटारे से न केवल अधिवक्ताओं पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है, बल्कि इससे न्यायिक प्रक्रिया की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिवक्ता न्याय के समर्थक हैं, लेकिन बिना पर्याप्त समय और तैयारी के मामलों का निपटारा न्याय के मूल सिद्धांतों के विपरीत है।
उन्होंने लीगल एड डिफेंस काउंसल स्कीम पर भी गंभीर सवाल उठाए। दप्पर के अनुसार, इस योजना का सीधा असर नियमित रूप से प्रैक्टिस कर रहे अधिवक्ताओं की आजीविका पर पड़ रहा है। मुफ्त कानूनी सहायता को लेकर कथित गलत प्रचार और इसके दुरुपयोग से अधिवक्ता समुदाय में भारी रोष है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को लेकर पहले भी हड़ताल की जा चुकी है, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
हड़ताल के दौरान बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी समिति के उपप्रधान राम कुमार धीमान, महासचिव इंदरपाल सिंह खारी, संयुक्त सचिव सीमा धीमान, हरप्रीत सिंह सैनी सहित सुच्चा वकील, मित्रपाल सैनी, सुमित गोयल, रविंदर बत्रा, दतिंदर गांधी, बिपिंदरदीप, विश्वजीत, सुमन चौहान, अंजली, अरुणा कुमारी, विवेक वशिष्ठ समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे।
अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन को और अधिक तेज किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित प्रशासन की होगी।











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